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CCSU में बड़ा एक्शन, 147 छात्र ब्लैकलिस्ट, नेताओं से लेकर सिपाही तक पर गाज

मेरठ के चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय ने 147 छात्रों और पूर्व छात्रों को दागी घोषित कर कैंपस में एंट्री पर रोक लगा दी है।

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मेरठ

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Anuj Singh

Apr 12, 2026

मेरठ यूनिवर्सिटी में सियासी तूफान!

मेरठ यूनिवर्सिटी में सियासी तूफान!

Meerut News: मेरठ के चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय (CCSu) के प्रशासन ने एक अहम फैसला लिया है, जिससे शहर की सियासत और छात्र राजनीति में खलबली मच गई है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने 147 छात्रों और पूर्व छात्रों को 'दागी' घोषित कर दिया है। इन सभी की सूची पुलिस को सौंप दी गई है और उनके कैंपस में आने पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है।

सूची में कौन-कौन शामिल?

इस सूची में कई प्रमुख छात्र नेता और राजनीतिक कार्यकर्ताओं के नाम हैं। भाजपा, समाजवादी पार्टी (सपा), राष्ट्रीय लोक दल (रालोद), कांग्रेस और एनएसयूआई से जुड़े नेता इसमें शामिल हैं। प्रमुख नामों में दिग्विजय भाटी, अनुज जावला, राहुल कुमार उर्फ संसार राणा, अरुण खटाना, कृष्णपाल गुर्जर, प्रदीप कसाना, आदित्य पंवार, पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष विजय सिंह राष्णा, एनएसयूआई के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष रोहित राणा और कांग्रेस नेता लव कसाना शामिल हैं। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि सूची में कार्तिक जिंदल का नाम भी है, जो फिलहाल उत्तर प्रदेश पुलिस में कांस्टेबल के पद पर तैनात हैं।

विश्वविद्यालय प्रशासन का क्या कहना है?

विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना है कि ये कदम कैंपस में बढ़ती हिंसा, हंगामे और बाहरी लोगों के अनचाहे हस्तक्षेप को रोकने के लिए उठाया गया है। इनमें से कई लोगों पर पहले आपराधिक मामले दर्ज हैं या छात्र राजनीति के दौरान अनुशासन भंग करने के आरोप हैं। चीफ प्रोक्टर प्रो. वीरपाल सिंह ने बताया कि यह सूची कैंपस में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए बनाई गई है। अगर किसी का नाम गलती से शामिल हो गया है या उसे आपत्ति है, तो वह लिखित में विश्वविद्यालय को आवेदन दे सकता है। उस पर विचार किया जाएगा।

छात्रों का विरोध प्रदर्शन

जैसे ही यह सूची सार्वजनिक हुई, छात्रों में नाराजगी फैल गई। छात्र नेता अक्षय बैंसला के नेतृत्व में कई छात्रों ने कैंपस में विरोध प्रदर्शन किया। छात्रों का आरोप है कि विश्वविद्यालय प्रशासन राजनीतिक दबाव में काम कर रहा है और कुछ नेताओं को बदनाम करने की कोशिश की जा रही है।

पुलिस का बयान

मेरठ पुलिस ने बताया कि विश्वविद्यालय की यह सूची अभी तक पुलिस को आधिकारिक रूप से नहीं मिली है। सूची मिलने के बाद जांच की जाएगी और जरूरी कार्रवाई की जाएगी।

क्या होगा आगे?

यह फैसला छात्र राजनीति पर लगाम लगाने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है। लेकिन इसके साथ ही राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप भी शुरू हो गए हैं। छात्रों और पूर्व छात्रों में चर्चा है कि यह सूची कितनी निष्पक्ष है और क्या इसका असर आने वाले छात्र संघ चुनावों पर पड़ेगा। विश्वविद्यालय प्रशासन का लक्ष्य शांतिपूर्ण माहौल बनाना है, जबकि छात्र इसे राजनीतिक साजिश बता रहे हैं। मामला अभी गर्म है और दोनों पक्षों के बयान आने वाले दिनों में और तीखे हो सकते हैं।