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मौत से पहले बुजुर्ग मरीज कहता रहा- मुझमे कोरोना के लक्षण हैं, भर्ती कर लो, तब किसी ने नहीं सुनी

Highlights मेरठ के केसरगंज क्षेत्र के किराना दुकानदार की संक्रमण से मौत लकवा पडऩे पर अस्पताल में भर्ती, मौत के बाद पॉजिटिव की पुष्टि मेडिकल कालेज प्रशासन ने संबंधित चिकित्सक से मांगा स्पष्टीकरण  

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मेरठ। मेरठ के केसरगंज क्षेत्र के 66 वर्षीय किराना दुकानदार की मौत के बाद आयी कोरोना पॉजिटिव की रिपोर्ट से व्यवस्था पर सवाल उठ गए हैं। मृतक के परिजनों ने भी चिकित्सीय व्यवस्था पर सवाल उठाए, जबकि बुजुर्ग किराना दुकानदार जब मेडिकल कालेज में भर्ती थे तो उसी दौरान उनके भांजे का वीडियो वायरल हुआ था, जिसमें व्यवस्था पर सवाल उठाए गए थे। परिजनों का कहना है कि वह खुद कोरोना जांच के लिए भटकते रहे, वह खुद कहते रहे कि मुझमें कोरोना के लक्षण हैं। भर्ती करके जांच कर लो, लेकिन तब उन्हें भर्ती नहीं किया गया। जब उन्हें लकवा मार गया तो उन्हें अस्पताल में भर्ती किया गया। उनकी कोरोना रिपोर्ट भी मौत के बाद आयी। इस मामले में मेडिकल कालेज प्रशासन ने लापरवाही मानते हुए संबंधित चिकित्सक से स्पष्टीकरण मांगा है।

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बुजुर्ग के भांजे राजन सिंघल का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया, जिसमें उन्होंने आरोप लगाया है कि कोरोना जैसे लक्षण होने के बावजूद मेडिकल कॉलेज में उन्हें भर्ती करने में आनाकानी की गई। उन्होंने पहले सीएमओ और फिर डीएम को इसके बारे में अवगत कराया। स्वास्थ्य विभाग की टीम एंबुलेंस में मंगलवार रात को इन्हें मेडिकल ले गई थी, लेकिन रात में ही दवाई देकर इन्हें इनकी पत्नी के साथ वहां से भेज दिया गया। बुधवार को स्वास्थ्य विभाग की टीम इनके घर आयी, फिर उनका सैंपल लिया गया। गुरुवार को इनकी तबीयत ज्यादा खराब हुई तो मेडिकल कालेज में उन्हें भर्ती करने से मना करने का आरोप लगाया गया है। अचानक बुजुर्ग को लकवा पड़ा तो उन्हें भर्ती किया गया। शाम को परिजनों ने जब फोन किया तो उन्हें बताया गया कि उनकी मृत्यु हो गई है। मौत के बाद बुजुर्ग की कोरोना रिपोर्ट पॉजिटिव आयी।

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कोरोना रिपोर्ट पॉजिटिव आने के बाद मेडिकल कालेज समेत पूरे स्वास्थ्य विभाग में अफरातफरी मच गई। साथ ही बुजुर्ग के रहने के स्थान पर भी खौफ फैल गया। मेडिकल कालेज के प्राचार्य डा. आरसी गुप्ता ने बताया कि बुजुर्ग दुकानदार 24 अप्रैल को शाम छह बजे भर्ती हुए थे। उस समय उनको बुखार, खांसी और ज्यादा उच्च रक्तचाप के साथ बांयी ओर फालिश की बीमारी थी। 25 अप्रैल की सुबह कोरेाना सैंपल लिया गया था। यहां पर इलाज तत्परता से किया गया। अत्यधिक रक्तचाप के कारण ब्रेन हेमरेज से अस्पताल में भर्ती होने के 24 घंटे के अंदर ही उनकी मृत्यु हो गई। 21 अप्रैल की रात को ओपीडी में वह दिखाने आए थे, उन्हें दवा लिखकर भेज दिया गया था। संबंधित चिकित्सक से स्पष्टीकरण मांगा गया है। स्पष्टीकरण के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।