
केपी त्रिपाठी
मेरठ। कानपुर में हुई मुठभेड़ में मारे गए 10 पुलिसकर्मियों के बाद से महकमे में सुरक्षा संबंधी तमाम उपाए किए जा रहे हैं। देर से ही सही 10 पुलिसकर्मियों की शहादत के बाद खुली आंख तो अधिकारियों ने दबिश में जाते समय सुरक्षा की प्राथमिकता पर जोर दे दिया। कानपुर की घटना प्रदेश में पहली ऐसी घटना नहीं है जबकि बदमाशों ने खाकी का सीना छलनी किया हो। मेरठ जोन में भी बदमाश खाकी का सीना छलनी करते रहे हैं। योगी राज में अपराध और अपराधियों पर जीरो टालरेंस की नीति अब हवा हो चुकी है। लोगों के सुरक्षा की जिम्मेदारी उठाने वाली खाकी की जान आज खुद खतरे में है तो सोचिए जनता की हिफाजत कैसे होगी। कानपुर में अपने साथियों की शहादत के बाद पुलिसकर्मी तो क्या अधिकारी भी गहरे सदमे में हैं।
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15 साल में हुई जोन में दस घटनाओं में शहीद हुए पुलिसकर्मी :—
गत 15 वर्षों में मेरठ जोन में करीब 10 घटनाएं ऐसी हुई जिनमें पुलिसकर्मियों ने सीने पर गोली खाई और शहीद हुए। सहारनपुर में तो सीओ के पीछे हटने पर सिपाही ने सीना आगे कर दिया था। मेरठ में नीटू कैल गिरोह ने पुलिसकर्मी की हत्या कर कस्टडी से बदमाश छुड़वा लिए थे। बुलंदशहर में गोवंश के हत्यारोपितों ने कोतवाल की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। अभी हाल में ही 19 मई 2020 को परतापुर थाना क्षेत्र के गांव ततीना कई पुलिसकर्मियों को बंधक तक बना लिया था। पथराव में तीन पुलिसकर्मी घायल हुए थे। इसी तरह से बुलंदशहर में 4 दिसंबर 2018 को स्याना कोतवाली के प्रभारी की हत्या कर दी थी। सीओ और दो पुलिसकर्मियों को जिंदा जलाने का प्रयास भी किया गया था। सहारनपुर के सरसवा रोड पर सीओ ने कार सवार को चेकिंग के लिए रोका तो उसने फायरिंग कर दी। सीओ को बचाने के प्रयास में गोली लगने से सिपाही की मौत हो गई थी। 2 दिसंबर 2014 को मेरठ के लिसाड़ीगेट थाना क्षेत्र के समर गार्डन चौकी पर तैनात सिपाही एकांत यादव की गोली से मौत हो गई थी।
पुलिसकर्मियों पर हमले की घटनाएं :—
- 09 फरवरी 2005 को नीटू कैल गिरोह ने पेशी से मेरठ लाए जा रहे अपने साथी को छुड़ाया। गोली लगने से एक सिपाही की मौत हो गई।
- 12 अक्टूबर 2005 को गाजियाबाद के धौलाना थानाक्षेत्र में बदमाशों ने दो सिपाहियों की चाकुओं से हत्या कर दी थी।
- 01 दिसंबर 2005 में बडौत में मुजफ्फनगर पुलिस की हिरासत से फरार धर्मेंद्र उर्फ पठान के साथ मुठभेड़ में सिपाही शहीद हुए।
- 07 नवंबर 2007 सिवालखास में पुलिस पर हमले में एक सिपाही शहीद हो गए थे। दो सीओ समेत पंद्रह पुलिस वालों को कमरे में बंद कर आग लगाने की कोशिश की गई थी।
- 07 जून 2011 को बदमाशों से मुठभेड़ में सरूरपुर के करनावल निवासी सिपाही सचिन शहीद हो गए थे।
- 15 अक्टूबर 2011 को सहारनपुर के बेहट की धौलाकुआं चौकी पर तैनात सिपाही बलवीर की गोली मारकर हत्या।
- 22 जुलाई 2013 को बड़ौत में चौकी में घुसकर हमलावरों ने सिपाही की हत्या की।
- 13 दिसंबर 2014 को मुजफ्फरनगर में जिला कारागार के सामने बदमाशों ने प्रधान बंदी रक्षक को गोलियों से भूना।
-26 अप्रैल 2016 को ग्रेट नोएडा में हिस्ट्रीशीटर के घर दबिश देने गई पुलिस पर बरसी गोलियों में दारोगा अख्तर खान की मौत हो गई थी।
- 24 जून 2016 को हापुड़ में लूट के दौरान बदमाशों ने दारोगा की गोली मारकर हत्या कर दी थी।
Updated on:
04 Jul 2020 03:06 pm
Published on:
04 Jul 2020 03:03 pm
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