
कांवड़ यात्रा
मेरठ। हर साल सावन शिवरात्रि को लाखों कांवड़िए कांवड़ लाकर भगवान शिव का जलाभिषेक करते हैं। इसको लेकर शासन स्तर से व्यवस्थाएं होती हैं। कांवड़ यात्रा से दिल्ली-देहरादून हार्इवे (एनएच-58) सबसे ज्यादा हार्इवे प्रभावित रहता है, क्योंकि कांवड़ यात्रा के दौरान इसके पूरे ट्रैफिक का रूट बदलना पड़ता है। इस साल भी यही किया जा रहा है, लेकिन अगले साल से यह व्यवस्था बदलने जा रही है। प्रदेश के प्रमुख सचिव गृह अरविन्द कुमार आैर डीजीपी आेपी सिंह ने अगले साल से यह व्यवस्था बदलने का दावा किया है। उनके मुताबिक शासन इस तरह के इंतजाम करने की तैयारी में है, जिससे कांवड़ यात्रा के दौरान एनएच-58 बंद नहीं करना पड़ेगा।
कांवड़ पटरी मार्ग किए जाएंगे तैयार
प्रमुख सचिव गृह ने कांवड़ यात्रा की समीक्षा बैठक में शामिल होने के बाद बताया कि अगले साल तक गंग नहर के किनारे दोनों पटरियां पक्की कर दी जाएंगी आैर कांवड़ियों को आने-जाने में कोर्इ परेशानी नहीं होगी। कांवड़ पटरी मार्ग तैयार होने के बाद दिल्ली-देहरादून नेशनल हार्इवे को बंद नहीं करना पड़ेगा। उन्होंने बताया कि उत्तराखंड की सीमा खत्म होने के बाद गंग नहर के बराबर से निकलने वाला चौधरी चरण सिंह कांवड़ मार्ग यूपी के कर्इ जनपदों की सीमा से गुजरता है। इस कांवड़ मार्ग की एक पटरी को ही अभी तक पक्का किया गया है। अगले साल तक कांवड़ मार्ग की दोनों पटरियां पक्की कर ली जाएंगी। यहां कांवड़ियों का आवागमन शुरू होने के बाद दिल्ली- देहरादून नेशनल हार्इवे पर दबाव काफी हद तक कम हो जाएगा आैर कांवड़ यात्रा के दौरान इसे बंद करने की जरूरत नहीं पड़ेगी। उन्होंने कहा कि शासन स्तर से कांवड़ मार्ग की पटरियों को पक्का किए जाने के दिशा-निर्देश दिए गए हैं आैर अगली कांवड़ यात्रा तक काम पूरा कर लिया जाएगा।
तीन चरणों में होता है रूट डायवर्जन
कांवड़ यात्रा के दौरान दिल्ली-देहरादून नेशनल हार्इवे (एनएच-58) पर तीन चरणों में ट्रैफिक डायर्वजन किया जाता है। पहले चरण में भारी वाहनों का रूट बदला जाता है, दूसरे चरण में एनएच-58 को वन-वे किया जाता है आैर तीसरे चरण में एनएच-58 पर हल्के आैर भारी वाहनों की आवाजाही बंद कर दी जाती है। इस बार ये तीनों चरण 28 जुलार्इ से शुरू होकर नौ अगस्त तक रहेंगे।
Published on:
21 Jul 2018 11:30 am
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