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मेरठ में बागेश्वर बाबा का बड़ा बयान, बोले- ज्यादा शिक्षित होना घर टूटने का कारण

Bageshwar Baba: मेरठ जिले में बागेश्वर बाबा ने कहा कि चित्र कैसा भी हो, लेकिन चरित्र हमेशा अच्छा होना चाहिए। चित्र दोबारा बन सकता है, पर चरित्र पर एक बार लगा दाग कभी नहीं हटता। 

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मेरठ

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Sanjana Singh

Mar 26, 2025

मेरठ में बागेश्वर बाबा का बड़ा बयान, बोले- ज्यादा शिक्षित होना घर टूटने का कारण

Dhirendra Shastri: मेरठ में श्री हनुमंत कथा सुनाने पहुंचे बागेश्वर धाम पीठाधीश्वर आचार्य धीरेंद्र शास्त्री ने बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि आज घरों के टूटने का कारण ज्यादा शिक्षित होना हो गया है। इसके साथ ही, उन्होंने औरंगजेब को लेकर कहा कि देश को तोड़ने वाला महान नहीं हो सकता। देश को जोड़ने वाले लोग महान होते हैं। उन्होंने कहा कि हिंदू राष्ट्र बनाना ही लक्ष्य है और वह सत्य और सनातन के सपने को लेकर आगे बढ़ रहे हैं।

मेरठ से शुरू हो हिंदू राष्ट्र की क्रांति

श्री हनुमंत कथा के पहले दिन आचार्य धीरेंद्र शास्त्री ने कहा कि क्रांति के शहर मेरठ से एक नई क्रांति की शुरुआत होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि पहले मेरठ ने आजादी की क्रांति शुरू की थी, और अब हिंदू राष्ट्र के लिए क्रांति की आवाज यहां से दिल्ली तक गूंजनी चाहिए।

‘घर टूटने का कारण ज्यादा शिक्षित होना’

HT की रिपोर्ट के मुताबिक, कथा में धीरेंद्र शास्त्रत्त्ी ने कहा कि घर में हनुमंत कथा होगी तो घर कभी नहीं टूटेंगे। आज घरों के टूटने का कारण ज्यादा शिक्षित होना हो गया है। आज लोग ज्यादा शिक्षित हो गए हैं, संस्कार की कमी हो गई है। धार्मिक आयोजन कम और पाश्चात्य संस्कृति को लोग अपना रहे हैं, जिसके चलते लोगों के घर टूट रहे हैं। उन्होंने कहा कि पहले लोग कम पढ़े लिखे थे पूरे कपड़े पहनते थे, आज लोग शिक्षित हो गए हैं तो उनके कपड़े भी कम हो गए हैं।

‘जीवन में मंगल होना चाहिए’

आचार्य धीरेंद्र शास्त्री ने श्रद्धालुओं को संदेश दिया कि "मस्त रहो, व्यस्त रहो। मंगल ग्रह पर जीवन हो या न हो, लेकिन जीवन में मंगल होना चाहिए।" उन्होंने बताया कि हनुमान जी की भक्ति से सभी दुख दूर हो सकते हैं और कुंडली के मंगल दोष भी समाप्त हो सकते हैं।

यह भी पढ़ें: मेरठ में शुरू हुई धीरेंद्र शास्त्री की कथा, जानिए कथास्थल तक पहुंचने का रास्ता

‘चित्र से अधिक चरित्र महत्वपूर्ण’

उन्होंने कथा के दौरान कहा कि चित्र कैसा भी हो, लेकिन चरित्र हमेशा अच्छा होना चाहिए। चित्र दोबारा बन सकता है, पर चरित्र पर एक बार लगा दाग कभी नहीं हटता। अपने कर्मों को अच्छा रखने पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि दूसरों के सुख-दुख में साथ देना सबसे बड़ा धर्म है।

‘जैसी संगति वैसा असर’

आचार्य धीरेंद्र शास्त्री ने संगति का महत्व समझाते हुए कहा कि जिस प्रकार बुरी संगत इंसान को जीवन भर पछतावा देती है, उसी प्रकार अच्छी संगत इंसान को उन्नति की राह पर ले जाती है। उन्होंने हनुमान जी की भक्ति को राम भक्ति का माध्यम बताया और इसे जीवन में अपनाने का संदेश दिया।

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