पिछली बार सीएम याेगी ने कहा था- बिना डीजे आैर डमरू के कैसी कांवड़ यात्रा, इस बार अफसरों ने दिए ये निर्देश

कांवड़ यात्रा के दौरान डीजे को लेकर नए दिशा-निर्देश दिए गए

By: sanjay sharma

Published: 20 Jul 2018, 07:04 PM IST

मेरठ। मेरठ कमिश्नरी में कांवड़ यात्रा की तैयारियों की समीक्षा करने आए प्रमुख सचिव (गृह) और डीजीपी ने हर बार की तरह इस बार भी डीजे बजाने को लेकर दिशा-निर्देश दिए हैं। दोनों अधिकारियों ने निर्देश दिए कि कांवड़ यात्रा के दौरान शिविरों में डीजे को निर्धारित डेसीबल पर ही बजने दिया जाए। दोनों अधिकारियों ने जिले के अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने के लिए निर्देशित किया। उन्होंने कहा कि अगर बार-बार कहने के बाद भी बात न मानी जाए तो संचालक के खिलाफ कार्रवाई करें। प्रमुख सचिव (गृह) ने कहा कि कावंड़ियों की संख्या 15 से 20 प्रतिशत तक बढ़ी है।

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पिछले साल मुख्यमंत्री ने डीजे को लेकर कही थी बड़ी बात

वर्ष 2017 की कांवड़ यात्रा के दौरान मुख्यमंत्री आदित्यनाथ योगी ने कहा था कि बिना डीजे, डमरू कैसी कांवड़ यात्रा। हालांकि डीजे पर प्रतिबंध लगाने की यह बात बेमानी साबित होती रही है। सरकार चाहे किसी की रही हो, डीजे पर कभी प्रभावी अंकुश लग ही नहीं पाया। हर बार कांवड़ यात्रा में खूब डीजे बजे। डीजे की ध्वनि से ध्वनि प्रदूषण के मानक जरूर बिगड़ जाते हैं। हर बार कांवड़ यात्रा में डीजे पर प्रतिबंध का फरमान जारी होता है। इस बार भी हुआ है, लेकिन यह प्रतिबंध कभी लग नहीं पाया। इससे पूर्व की सरकारों के समय में भी कांवड़ यात्रा के दौरान डीजे पर जमकर धमाल हुआ है।

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बिना डीजे नहीं चलती डाक कांवड़

बड़े-बड़े डीजे लेकर शिवभक्त निकलते हैं। डाक कांवड़ आदि का तो आधार ही डीजे बन गया है। मेरठ, दिल्ली से लेकर हरियाणा के युवाओं के बड़े ग्रुप विशाल डीजे के साथ कांवड़ लाते हैं। हर बार यह चर्चा का विषय बनता है। डीजे से साम्प्रदायिक माहौल खराब करने का आरोप लगता है, लेकिन सही बात यह कि पिछले काफी कई वर्षों में डीजे के कारण आसपास कहीं कोई ऐसी घटना नहीं हुई, जिससे माहौल खराब हो गया हो।

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ध्वनि प्रदूषण की सीमा कर देता है पार

डीजे मानक से कई गुना ज्यादा ध्वनि प्रदूषण करता है। नतीजा, इससे बेहद ध्वनि प्रदूषण होता है, जो स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होता है। कांवड़ यात्रा की बात करें तो मेरठ के कई हिस्सों में इस दौरान ध्वनि प्रदूषण दिन में सामान्य से 42 डेसीबल तो रात में 40 डेसिबल ज्यादा पहुंच जाता है। कांवड़ यात्रा के दौरान दिल्ली रोड समेत शहर का कोई ऐसा इलाका नहीं बचता, जहां ध्वनि प्रदूषण न बढ़ जाता हो।

दिल के मरीजों को होती है परेशानी

ध्वनि प्रदूषण के कारण सबसे अधिक परेशानी दिल के मरीजों को होती है। तेज आवाज से कान के पर्दों को नुकसान होता है। इससे व्यक्ति अनिद्रा का भी शिकार हो सकता है। इसके असर से शरीर में बेचैनी बढ़ जाती है। सामान्य से अधिक ध्वनि मनुष्य में कई तरह के रोग पैदा कर सकती है।

डीजे संचालकों को देंगे हिदायत

कांवड़ यात्रा के दौरान डीजे मानक से अधिक न बजे इसके लिए डीजे संचालकों को हिदायत देने की बात चल रही है। उन्हें कहा जाएंगा कि वे डीजे की ध्वनि को सीमित कर दे, जिससे वह मात्रा से अधिक न बजे।

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