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पुनर्मतदान से पहले किसानों ने बढ़ाई भाजपा की मुश्किलें, टेंशन में आए भाजपाई दिग्गज

बीजेपी के सातों विधायकों को गांव में नहीं घुसने देने का किया ऐलान
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मेरठ

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Iftekhar Ahmed

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Updated: 30 May 2018, 1:27 PM IST

BJP leaders

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मेरठ. कैराना में होने वाले पुनर्मतदान से पहले गन्ना किसानों ने फसल का 5 माह से पेमेंट नहीं होने के विरोध में मेरठ और बागपत के विधायकों का पुतला फूंका। किसानों का आरोप है सरकार ने 14 दिनों के अंदर गन्ना भुगतान का वादा किसानों से किया था, सरकार बनने के एक साल से भी ज्यादा वक्त गुजर गाने के बाद भी किसान परेशान हैं। ये किसान अपनी मांगों को लेकर कई दिन से मेरठ के कमिश्नरी पार्क में धरना दे रहे हैं। लेकिन जब कहीं से भी किसानों को कोई मदद या आस्वासन नहीं मिला तो मेरठ के कमिश्नर कार्यालय के सामने किसानों ने जमकर सरकार के खिलाफ नारेबाजी की और पुतला फूंका।

कमिश्नरी चौराहे पर अजगर किसान मजदूर संगठन के साथ किसानों ने सबसे पहले चौधरी चरण सिंह की मूर्ति को दूध से नहलाया। इसके बाद माल्यार्पण किया। उसके बाद कमिश्नरी कार्यालय के सामने पहुंचकर किसानों ने सरकार से अपना विरोध जाहिर करते हुए मेरठ और बागपत के विधायकों का पुतला जलाया। इस दौरान किसानों का कहना है कि जब बीजेपी की सरकार आई थी, तब सरकार ने वादा किया था कि किसानों का 14 दिन के अंदर गन्ने का भुगतान कर दिया जाएगा, लेकिन आज तक चीनी मिल मालिक उनका भुगतान नहीं कर रहे हैं, जिस वजह से किसानों के बच्चों की पढ़ाई और शादियां तक नहीं हो पा रही है। इस दौरान किसान बहुत ही गुस्से में नजर आए। किसानों का कहना है सरकार को उनकी बातें माननी होगी और जल्द से जल्द उनके गन्ने का भुगतान भी करना होगा। नहीं तो वह सड़कों पर उतर कर एक बड़ा प्रदर्शन सरकार के खिलाफ करने के लिए मजबूर होंगे, जिसका खामियाजा सरकार को आने वाले लोकसभा चुनाव में भुगतना पड़ेगा। साथ ही किसान मजदूर संगठन के नेताओं ने कहा कि भाजपा के किसी भी विधायक को गांव में नहीं घुसने दिया जाएगा। यह उनकी खुली चेतावनी है। यदि उनका गन्ना भुगतान नहीं होता है तो विधायकों के खिलाफ भी वह एक मुहिम छोड़ेंगे और किसी भी हाल में विधायक को गांव के अंदर नहीं आने दिया जाएगा। इस मौके पर किसानों ने अधिकारियों को ज्ञापन सौंपते हुए मुख्यमंत्री को किसानों की मांग भेजी। किसानों का कहना है कि जल्द से जल्द यदि उनकी मांगे नहीं मानी गई तो अनिश्चितकालीन धरने पर इसी तरह से बैठे रहेंगे

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