
मेरठ। मेरठ में एक बार फिर रिश्तों का क़त्ल हुआ है। इस बार कत्ल बेटे का हुआ है। इसकी साजिश किसी और ने नहीं बल्कि उसके ही पिता और सौतेली मां ने रची थी। प्रॉपर्टी के लालच में पिता और सौतेली मां ने भाड़े के हत्यारों को सुपारी देकर अपने पुत्र की ह्त्या करा दी। पुलिस ने इस सनसनीखेज वारदात का खुलासा करते हुए मां-बाप और सुपारी किलर समेत पांच अभियुक्तों को गिरफ्तार किया है।
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21 को किया था कत्ल
भावनपुर थाना क्षेत्र के किनानगर के रहने वाले अभिषेक ने बीती 23 फरवरी को थाने पर अपने भाई संजीव की गुमशुदगी दर्ज कराई थी। इसके बाद 26 फरवरी को इस मामले में अभिषेक ने ही अपने पिता ओमपाल और अपनी सौतेली मां सुरेखा और उनके साथियों पर अपने भाई का अपहरण कर हत्या का मामला दर्ज कराया था। मामले के खुलासे के लिए पुलिस टीम का गठन किया और गुरुवार को जब इस संबंध में खुलासा किया गया तो सभी सन्न रह गए। दोनों ने कबूल किया कि बेटे की हत्या 21 फरवरी को ही करवा दी थी।
सिर्फ 35 हजार में बेटे का कत्ल करवाया
प्रेस कांफ्रेंस में पुलिस अफसरों ने बताया कि सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर उनसे पूछताछ की गई तो यह बात सामने आयी कि मृतक संजीव की सौतेली मां को प्रॉपर्टी का लालच था। साथ ही वह संजीव को पसंद नहीं करती थी और उसकी आदतों से परेशान थी, इसके लिए वह अपने पति संजीव के पिता से उसे रास्ते से हटाने का दबाव बनाया करती थी। पिता ओमपाल भी संजीव से परेशान रहता था। पिता का आरोप है कि संजीव उन दोनों के साथ मारपीट करता था आैर प्राॅपर्टी नहीं देने की बात करता था। पिता ओमपाल की दूसरी शादी के बाद से संजीव ओमपाल से नफरत करने लगा था। ओमपाल अपनी ज़मीन भी अपनी दूसरी पत्नी के नाम करना चाहता था, लेकिन उसका बेटा संजीव उसकी राह में रोड़ा बन गया था। बताते हैं कि मृतक संजीव पढ़ने में होशियार था। इंटरमीडिएट परीक्षा में उसने विशेष योग्यता से उत्तीर्ण की थी।
खौफनाक साजिश रच डाली
संजीव को रास्ते से हटाने के लिए ओमपाल और उसकी दूसरी पत्नी ने एक खौफनाक साजिश रच डाली। दोनों ने संजीव की हत्या करने के लिए सुपारी किलर्स के साथ ढार्इ लाख रुपये का सौदा किया। इसकी 35 हजार रुपये एडवांस भी दे दिए गए। सुपारी लेने में एक ओमपाल की पत्नी का भार्इ भी शामिल था। योजनाबद्ध तरीके से तीनों सुपारी किलर्स मोदीनगर के अशोक, सुनील और दीपक के सम्पर्क में आए। संजीव की शादी के लिए उसे देखने के बहाने उससे मिले और उसका विशवास जीतने के लिए उसके साथ शराब आदि पीना शुरू किया। जब संजीव इनके विशवास में आ गया तो 21 फरवरी को अशोक ने संजीव से घुमाने की बात कहकर उसे एक जगह शराब पिलाई और उसके बाद जब उसे नशा चढ़ गया तो अशोक ने सुनील और दीपक को बुलाकर संजीव को दोनों के हवाले कर दिया। इसके बाद उन्होंने उसे गाजियाबाद के भोजपुर में एक सरसो के खेत में लाकर संजीव की गला रेतकर हत्या कर दी। उसकी शिनाख्त मिटाने के लिए उसका मोबाइल जला दिया और मृतक का पर्स खुद उसके पिता ने अपने पास रख लिया। 25 फरवरी को गाजियाबाद की भोजपुर पुलिस ने शव बरामद किया और शिनाख्त न होने पर अज्ञात में पंचनामा भरकर 28 फरवरी को शव का अंतिम संस्कार कर दिया था।
अभियुक्तों से यह हुआ बरामद
जब भावनपुर पुलिस ने अभियुक्तों को गिरफ्तार करने के बाद उनसे सख्ती से पूछताछ की तो पूरे प्रकरण की परत दर परत खुलती चली गई। पुलिस ने आरोपियों के पास से आला-ए-क़त्ल, 24 हजार रुपये नगद, मृतक संजीव का पर्स आदि बारामद किया है। गिरफ्तार पिता, सौतेली मां समेत पांचों अभियुक्तों को पुलिस ने जेल भेज दिया।
Updated on:
02 Mar 2018 02:15 am
Published on:
02 Mar 2018 01:57 am

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