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मेरठ में बवाल के आरोपी पूर्व विधायक की मेयर पत्नी का चार महीने बाद छिन गया गनर

जिला प्रशासन की रिपोर्ट पर शासन ने वापस लिया गनर, बसपा के पूर्व विधायक योगेश वर्मा इन दिनों जेल में      

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मेरठ। बसपा के टिकट पर सुनीता वर्मा को मेयर बने अभी मात्र चार माह ही बीते हैं। सत्ता पक्ष के टकराव के क्या नतीजे होेते हैं, इसको वह भलीभांति भुगत रही हैं। मेयर बनते ही उन्होंने और उनके बड़बोडे़ पति पूर्व विधायक योेेगेश वर्मा ने निगम सदन में वंदेमातरम गायन को लेकर विवादित बयान दिया था। उसके चलते करीब दो महीने तक दोनों पति-पत्नी सुर्खियों में रहे। इसके बाद दो अप्रैल को भारत बंद के दौरान मेरठ में हुई आगजनी और उपद्रव में मेरठ पुलिस प्रशासन ने पूर्व विधायक योगेश वर्मा की संलिप्तता मानी, जिसका नतीजा योगेश वर्मा जेल में है। अब उनकी पत्नी और मेरठ से मेयर सुनीता वर्मा का गनर भी शासन ने वापस ले लिया।

आरोप है कि सुनीता वर्मा ने गनर लेने की तय राशि सरकारी खाते में जमा नहीं की। इस कारण उनका गनर वापस ले लिया गया है। एसएसपी मंजिल सैनी ने बताया कि इसके लिए मेयर को तीन बार पत्र भेजा गया, लेकिन उन्होंने इस पर कोई संज्ञान नहीं लिया। एसएसपी का कहना है कि मेयर पदेन अधिकार में नहीं आते इस कारण उनके गनर की वापसी हुई है। पुलिस ने इसके लिए तीन बार नोटिस जारी की थी। मेयर को गनर दस प्रतिशत पर दिया गया था। जो उन्होंने जमा नहीं कराया।

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मेयर सुनीता वर्मा ने लगाए आरोप

वहीं दूसरी ओर भाजपा सरकार पर आरोप लगाते हुए मेयर सुनीता वर्मा ने को बताया कि गनर वापसी राजनैतिक कारणों से हुआ है। उन्हें कोई पत्र आदि नहीं मिला है। चूंकि वे भाजपा को चुनाव हराकर मेयर पद पर जीती हैं, इसलिए उनके साथ ऐसा किया जा रहा है। मेयर ने कहा कि मैंने कोई ईवीएम में धांधली करके चुनाव नहीं जीता, मुझे जनता ने चुनाव में वोट देकर जीत दिलवाई है। भाजपा सरकार जो आज मेरे साथ कर रही है कहीं न कहीं यह उस जनता के साथ भी अप्रत्यक्ष रूप से हो रहा है। मुझे प्रताड़ित कर भाजपा सरकार जनता का धमकाना चाहती है कि देख लो बसपा को वोट देने का अंजाम।

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