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Ground Report: कोरोना के कारण ऐतिहासिक नौचंदी मेला भी लॉकडाउन, इस बार शुरू होने पर लटकी तलवार

Highlights सन 1672 में हुई थी मेला नौचंदी मेले की शुरुआत नवरात्र के नौवें दिन से भर जाता था नौचंदी मेला लॉकडाउन के चलते नौचंदी मैदान पड़ा हुआ है सूना  

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केपी त्रिपाठी, मेरठ। शहर में जब-जब सांप्रदायिक दंगे हुए तब-तब नौचंदी मेले ने ही हिन्दू-मुस्लिम के दिलों की कड़वाहट को दूर किया। दंगों के बाद भी दोनों ही पक्ष के लोग नौचंदी मेले में एक साथ देखे गए। शहर में नौचंदी मेला 348 साल का हो गया है। सन् 1672 में नौचंदी मेले की शुरुआत यहां स्थित मां नवचंडी के मंदिर से हुई थी।

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शुरुआत में इसका नाम नवचंडी मेला था, जो बाद में नौचंदी के नाम से जाना गया। जानकारों की मानें तो नवरात्र के नौवें दिन यहां मेला भरना शुरू हुआ था। धीरे-धीरे मेला बड़ा होता गया और इसका स्वरूप एक दिन से निकल कर दिनों में तब्दील हो गया। आज कोरोना वायरस के कहर के चलते जहां पूरा देश लॉकडाउन है तो ऐसे में इस ऐतिहासिक मेले पर भी कोरोना का ग्रहण लग गया है। मेले का ऐतिहासिक शम्भूद्वार गेट वीरान खड़ा लॉकडाउन खुलने की बाट जोह रहा है। बता दें कि हर साल इस मेले को देखने के लिए दूर-दूर से लोग देखने के लिए आते हैं, लेकिन इस बार कोरोना वायरस के कारण मेले की सभी तैयारियां धरी रह गई।

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उद्घाटन भी नहीं हुआ मेले का

कोरोना ने मेले की सैकड़ों वर्ष पुरानी परंपरा पर ब्रेक लगा दिया है। परंपरा तो टूटी ही साथ ही टूट गई मेला लगने की आस। जो लोग साल भर मेले लगने का इंतजार किया करते थे। उनकी भी उम्मीदों पर कोरोना और लॉकडाउन ने पानी फेर दिया। पहले इस मेले का उद्घाटन 22 मार्च को होना था, लेकिन कोरोना वायरस के कारण लॉकडाउन के चलते अप्रैल के दूसरे सप्ताह में इसके उद्घाटन की तारीख तय की गई है, जबकि मेला 15 मई से शुरू होने की बात कही जा रही है। हालांकि इसके उद्घाटन होने पर भी संदेह है। मेले की ओर से अभी तक कोई भी तैयारी नहीं है, जबकि हर साल नवरात्र के नौवें दिन से नौचंदी मेला भरता है। अभी तक नौचंदी मेला सूना पड़ा हुआ है।

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कभी कम नहीं हुई नौचंदी की रौनक

पौराणिक मेरठ के इतिहास से जुड़ा है नौचंदी का स्वरूप। मुगलकाल से चले आ रहे नौचंदी मेले में शहर के कई स्वतंत्रता आंदोलनों को महसूस किया। स्वतंत्रता सेनानियों के संघर्ष की जहां नौचंदी गवाह बनी। वहीं शहादत के दर्द को भी मेले ने करीब से महसूस किया। यहीं नहीं 1857 का संग्राम देखने का गौरव भी नौचंदी से अछूता नहीं रहा। आजादी की मूरत बने नौचंदी मेले ने मेरठ के कई उतार चढ़ाव देखे, लेकिन मेले की रौनक कभी कम न हुई। आज तक ऐसा कभी नहीं हुआ कि शहर में नौचंदी के मेले का आयोजन न हुआ हो। देश के कोने-कोने से व्यापारी आकर यहां भिन्न-भिन्न उत्पाद बेचते आए हैं। एक महीने से ज्यादा लगने वाले इस मेले में हर साल काफी भीड़ रहती है।