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‘पांच मिनट और देख लेने दो’… तिरंगे में लिपटा बेटा लौटा गांव, मां-बाप के चीखों की गूंज से रो पड़ा पूरा गांव

देहरादून सड़क हादसे में शहीद मेजर शुभम सैनी का तिरंगे में लिपटा पार्थिव शरीर गांव पहुंचते ही मातम छा गया। मां-बाप की चीखों से पूरा गांव रो पड़ा। सैन्य सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गई।

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मेरठ

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Mahendra Tiwari

Jan 18, 2026

शहीद जवान शुभम सैनी फोटो सोर्स @panditsunilbharala Facebook Account

शहीद जवान शुभम सैनी फोटो सोर्स @panditsunilbharala Facebook Account

उत्तराखंड के देहरादून में हुए दर्दनाक सड़क हादसे में शहीद हुए मेजर शुभम सैनी का पार्थिव शरीर रविवार को उनके पैतृक गांव घसौली, मेरठ पहुंचा। जैसे ही तिरंगे में लिपटा ताबूत गांव में आया। पूरे माहौल में मातम छा गया। परिवार का रो-रोकर बुरा हाल था। मां और बहन बार-बार बेहोश हो जा रही थीं। गांव और आसपास के लोग उन्हें संभालते रहे। सेना ने पूरे सम्मान और सैन्य परंपरा के साथ मेजर शुभम को अंतिम विदाई दी।

रविवार को जब मेजर शुभम सैनी का पार्थिव शरीर गांव लाया गया। तो घर से लेकर श्मशान घाट तक हर आंख नम थी। मां ताबूत से लिपटकर बिलखती रहीं। वह बार-बार कहती रहीं कि उनका बेटा दूल्हा बनकर आखिरी सफर पर जा रहा है। बहन और भाई शव को कुछ देर और देखने की गुहार लगाते रहे। सेना के जवान प्रोटोकॉल के तहत पार्थिव शरीर को अंतिम संस्कार के लिए ले जाने लगे। तब परिजनों का दुख और गहरा हो गया। बड़े भाई तुषार सैनी ने चिता को मुखाग्नि दी।

उत्तराखंड के सड़क हादसे में हुई थी शुभम सैनी की मौत

मेजर शुभम सैनी की शनिवार सुबह उत्तराखंड में एक सड़क दुर्घटना में मौत हो गई थी। वह चकराता में तैनात थे। और किसी काम से देहरादून जा रहे थे। इसी दौरान उनकी कार अनियंत्रित होकर करीब 50 मीटर गहरी खाई में गिर गई। कई घंटे चले रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद उन्हें बाहर निकाला गया और देहरादून के सैनिक अस्पताल ले जाया गया। जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।

शुभम सेना परिवार से जुड़े थे, पिता सतेंद्र सैनी रिटायर्ड सूबेदार

27 वर्षीय मेजर शुभम सेना से जुड़े परिवार से थे। उनके पिता सत्येंद्र सैनी सेना से रिटायर्ड सूबेदार हैं। शुभम तीन भाई-बहनों में दूसरे नंबर पर थे। बड़े भाई तुषार एक आईटी कंपनी में काम करते हैं। और छोटी बहन निधि आर्मी स्कूल में शिक्षिका हैं।

इंटरमीडिएट के बाद हुआ था एनडीए में चयन

पिता ने बताया कि शुभम बचपन से ही सेना में जाने का सपना देखता था। पढ़ाई के साथ-साथ वह शारीरिक और मानसिक तैयारी भी करता था। आर्मी स्कूल से इंटरमीडिएट करने के बाद 2015 में उनका चयन एनडीए में हुआ। 2019 में देहरादून से पासिंग आउट के बाद वह सेना में लेफ्टिनेंट बने और प्रमोशन पाकर मेजर पद तक पहुंचे। उनकी पहली पोस्टिंग पंजाब के भटिंडा में हुई थी।

हादसे के एक दिन पहले शादी के तैयारी की ली जानकारी

परिवार ने बताया कि बड़े भाई की शादी 18 फरवरी को तय थी। हादसे से एक दिन पहले शुभम ने फोन कर शादी की तैयारियों के बारे में पूछा था। और छुट्टी लेकर घर आने की बात कही थी। लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था।