
Cricket World Cup 2019: धोनी के जिन ग्लव्स पर हो रहा विवाद, उन्हें बनाने वाली कंपनी ने किया चौंकाने वाला खुलासा
मेरठ। इन दिनों ICC Cricket World Cup 2019 चल रहा है। जिसका जुनून देशभर के लोगों में खासा देखने को मिला रहा है। यही कारण है कि जगह-जगह बड़ी स्करीन लगाकर क्रिकेट मैच (Cricket Match) का प्रसारण किया जा रहा है। इस सबके बीच भारतीय विकेट कीपर महेंद्र सिंह धोनी (M.S Dhoni) के ग्लव्स (Cricket Gloves) लगातार सुर्खियों में बने हुए हैं।
धोनी के ग्लव्स की वजह से मेरठ भी चर्चा में
वहीं अब इन ग्लव्स के चलते उत्तर प्रदेश का मेरठ में चर्चा में है। कारण, Cricket World Cup 2019 में South Africa के खिलाफ खेले गए मैच में धोनी (Dhoni) ने बलिदान बैज (Balidan Badge) के चिन्ह वाले जो ग्लव्स पहने थे। जिन पर आईसीसी ने बीसीसीआई को धोनी के ग्लव्स से यह चिन्ह हटाने के निर्देश दिए थे। ये ग्लव्स करीब तीन सप्ताह पहले मेरठ से ही डिलीवर हुए थे।
दुनिया भर में मशहूर है मेरठ के स्पॉर्ट्स इंडस्ट्री
मेरठ दुनिया भर में खेल का सामान बनाने के लिए मशहूर है। यहां बनने वाले क्रिकेट बैट की शानदार गुणवत्ता, हाथों से गेंदों की बेहतरीन सिलाई आदि के चलते भारतीय क्रिकेटर ही नहीं, अन्य देशों के क्रिकेटर भी मेरठ से ही अपने स्पॉर्ट मैटेरिल ऑर्डर करते हैं। इसी कड़ी में महेंद्र सिंह धोनी ने भी अपने ग्लब्स, क्रिकेट बैट आदि का मेरठ की एसजी कंपनी को ऑर्डर दिया था। जिन्हें लेकर अब इस कंपनी ने चौंकाने वाला खुलासा भी किया। आइए जानते हैं धोनी के ग्लव्स तैयार करने वाली कंपनी ने क्या कहा...
गुपचुप तरीके ऑर्डर देने पहुंचे थे धोनी
दरअसल, ग्लव्स बनाने वाली एसजी कंपनी का कहना है कि उनका काम ग्लव्स बनाकर देना है। बाकी धोनी ने ये निशान कहा से लगवाया, इसके बारे में उनको कोई जानकारी नहीं है। एसजी कंपनी के मैनेजर सुमित शर्मा ने बताया कि एमएस धोनी मेरठ आईपीएल से पहले आये थे। उस दौरान उनकी पत्नी साक्षी भी साथ थी। इसके बाद से उनके आर्डर आते रहे हैं। इस बार भी वर्ल्ड कप शुरू होने से पहले वो सुबह 6 बजे कंपनी आये थे। गुपचुप तरीके से उन्होंने बैट और अन्य खेल के सामान का आर्डर दिया और इसके बाद चले गए।
इस तरह तैयार हुए धोनी के ग्लव्स
मैनेजर ने बताया कि ग्लव्स तैयार करते समय विशेष सावधानी बरती जाती है। धोनी के स्पेशल विकेटकीपिंग ग्लव्स कई खास चीजों से बनते हैं। ग्लब्स में धोनी की उंगलियों को सुरक्षित रखने के लिए ठोस फाइबर मैटेरियल का इस्तेमाल किया जाता है। ग्लव्स के कैचिंग प्वॉइंट पर रबड़ की मोटी परत होती है, जिससे गेंद की रफ्तार का हाथों पर कोई खास असर नहीं होता।
उन्होंने बताया कि ग्लव्स में फ्लैक्सिब्लिटी के लिए एक रबड़ ग्रिप दिया जाता है। जिससे हाथ को पूरा खोलने में कोई दिक्कत नहीं होती। ग्लव्स के ऊपरी हिस्से पर चमड़े की मोटी परत होती है, जिससे स्टंप्स को छूने पर भी उन्हें कोई तकलीफ न हो।
ग्लव्स को लेकर ये हैं ICC के नियम
गौरतलब है कि आईसीसी के नियम के अनुसार क्रिकेट के किसी भी टूर्नामेंट में विशेषकर इंटरनेशनल मुकाबलों के लिए बनने वाली एसेसरीज के लिए कोई चिन्ह या स्टीकर नहीं लगाई जा सकती। इन्हें बनाने वाली कंपनियां इसका विशेष ध्यान रखती हैं। खिलाड़ियों के कपड़ों या अन्य वस्तुओं पर अंतरराष्ट्रीय मैच के दौरान राजनीति, धर्म या नस्लभेद आदि का संदेश अंकित नहीं होना चाहिए।
80 के दशक से हर वर्ल्ड कप में छाया रहा मेरठ
उल्लेखनीय है कि 80 के दशक से क्रिकेट की दुनिया में मेरठ निर्मित ग्लव्स, क्रिकेट बैट, गेंद आदि की विशेष मांग रही है। 90 के दशक के बाद से 1992, 1996, 1999 व 2002 से लेकर अब तक हर क्रिकेट वर्ल्ड कप में मेरठ से बल्ले, गेंद व अन्य क्रिकेट संबंधित सामग्री बनकर जाती है।
Published on:
08 Jun 2019 06:33 pm
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