17 जनवरी 2026,

शनिवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

प्रदूषण के कारण पशु-पक्षियों की मृत्यु दर में इजाफा, गंभीर बीमारियां होने का बढ़ा खतरा

Highlights रिपोर्ट में आए चौंकाने वाले तथ्य कई पक्षियों की प्रजातियां हो रही कम गिद्ध और कौवे गुजरे जमाने की बातें  

2 min read
Google source verification
meerut

मेरठ। प्रदूषण से एक ओर जहां मनुष्य परेशान है, प्रतिदिन इस जानलेवा प्रदूषण से निपटने के तरह-तरह के उपाय अजमा रहा है। वहीं पशु-पक्षियों (Animals-Birds) का दर्द कोई नहीं महसूस कर रहा है। आलम यह है कि पिछले तीन सालों में प्रदूषण (Pollution) के बढ़े स्तर से देशभर में पक्षियों के मृत्यु दर (Death Rate) में 35 फीसदी का इजाफा हुआ है। कई पक्षियों की प्रजातियां तेजी से कम होती जा रही हैं। यह कहना है पक्षी वैज्ञानिक रजत भार्गव का।

यह भी पढ़ेंः एक साथ 1500 बच्चों ने किया माता-पिता का सम्मान, बन गया कीर्तिमान, देखें वीडियो

उन्होंने बताया कि भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (आइवीआरआइ) के वैज्ञानिकों की रिपोर्ट में यह बात सामने आई है। पक्षी विशेषज्ञ डा. रजत भार्गव के मुताबिक, छोटे पक्षियों के फेफड़े इंसानों की तुलना में काफी छोटे होते हैं। इंसानों की अपेक्षा पक्षियों में एक सेकेंड में चार गुना तेजी से श्वसन प्रक्रिया होती है। जिससे प्रदूषण की स्थिति में इन पक्षियों में कैंसर और कई तरह की गंभीर बीमारियों का खतरा 90 फीसदी तक बढ़ गया है। पक्षियों का मृत्यु दर प्रदूषण के संपर्क में आने से 35 फीसदी तक बढ़ गया है। क्योंकि पक्षी 24 घंटे प्रदूषण के संपर्क में रहते हैं। डॉ. भार्गव बताते हैं कि पक्षियों के पौष्टिक आहार कहे जाने वाले कैटरपिलर, कीड़े-मकोड़ों की तादाद भी इसके चलते कम होती जा रही है। डा. रजत भार्गव ने बताया कि देश के विभिन्न बड़े शहरों में जाकर वहां पक्षियों के हालात पर अध्ययन किया। इस दौरान उनमें होने वाली बीमारियों, प्रदूषण के स्तर आदि की जानकारी जुटाई।

यह भी पढ़ेंः VIDEO: चालान कटने के बाद रोने लगा युवक, खुद ही बाइक गिराकर कर दी तोडफ़ोड़, पुलिसकर्मी हंसते हुए बनाने लगे वीडियो

गौरैया, हंस समेत कई प्रजातियां कम

डा. रजत भार्गव बताते हैं कि पिछले एक साल में अकेले दिल्ली में प्रदूषण की भयावह स्थिति के कारण गौरैया, हंस, चील, किंगफिशर सहित पक्षियों की कई प्रजातियां कम हो गई हैं। पक्षियों की प्रजनन क्षमता कम हो रही है। वहीं पक्षियों की दैनिक दिनचर्या खराब हो गर्इ है। 80 फीसदी पक्षी शहरों से पलायन कर गए हैं। कैंसर समेत अन्य गंभीर बीमारियां पक्षियों को अपनी चपेट में ले रही है। वहीं मेरठ में पक्षियों की संख्या में बेतहाशा कमी हो चुकी है। गिद्ध और कौवे जैसी प्रजाति तो महानगर में गुजरे जमाने की बात हो चली है।