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Petrol Diesel Price : बेलगाम होगी पेट्रोल डीजल की कीमतेंं,24 घंटे में क्रूड आयल के दाम में बेतहाशा वृद्धि

Petrol Diesel Price रूस और यूक्रेन का असर पूरी दुनिया पर पड़ेगा। इससे पेट्रोल और डीजल के दामों में भी बेतहाश वृद्धि होगी। हालांकि अभी भारत में पांच राज्यों के चुनाव चल रहे हैं। इसलिए यहां पर इसका असर अभी नहीं पड़ेगा। लेकिन आने वाले दो—तीन पखवाड़े बाद मेरठ सहित पूरे प्रदेश और देश में पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ेंगे। जिसके बाद कीमतें बेलगाम हो जाएगी।

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मेरठ

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Kamta Tripathi

Feb 23, 2022

Petrol Diesel Price : बेलगाम होगी पेट्रोल डीजल की कीमतेंं,24 घंटे में क्रूड आयल के दाम में बेतहाशा वृद्धि

Petrol Diesel Price : बेलगाम होगी पेट्रोल डीजल की कीमतेंं,24 घंटे में क्रूड आयल के दाम में बेतहाशा वृद्धि

Petrol Diesel Price रूस-यूक्रेन युद्ध की ओर बढ़ते देखे जा रहे हैं। मामले का शांतिपूर्ण समाधान नहीं निकला तो इसके परिणाम दिखाई पड़ेंगे। इससे जहां दुनिया में ऊर्जा संकट गहराएगा वहीं अर्थव्यवस्था एक बार फिर गहरे संकट में फंसती नजर आएगी। दोनों देशों में तनातनी से दुनिया भर के शेयर बाजार में अफरा-तफरी मची हुई है। वहीं इसका असर पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर भी पड़ेगा। पिछले 24 घंटे के भीतर ही क्रूड ऑयल के दाम 70 डॉलर प्रति बैरल से बढ़कर 98 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गए हैं। अगर हालात यहीं रहे तो ये आने वाले दिनों में और अधिक बढ़ सकते हैं। इससे भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमतें एक बार फिर बेलगाम होगी। वर्तमान में चल रहे पांच राज्यों के चुनावों के कारण तेल कीमतें स्थिर हैं। लेकिन चुनाव बीतते ही पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी होना तय माना जा रहा है।


तेल जरूरतों का 85 फीसदी और प्राकृतिक गैस जरूरतों का 56 फीसदी आयात के माध्यम से पूरा होता है। ऐसे में यदि तेल-गैस की कीमतें बढ़ती हैं तो देश पर आर्थिक दबाव बढ़ जाएगा। उसे तेल कीमतों के रूप में ज्यादा विदेशी मुद्रा चुकानी होगी जिससे विदेशी मुद्रा भंडार में कमी आएगी। इससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में डॉलर की कीमतें बढ़ेंगी और रुपये की कीमतों में गिरावट आएगी। रुपये की कीमतों में गिरावट महंगाई बढ़ने का बड़ा अतिरिक्त कारण बन सकता है।

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रूस पूरी दुनिया में तेल-गैस का सबसे बड़ा उत्पादक है। यदि उस पर अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध लगते हैं तो इससे दुनिया भर की अर्थव्यवस्था पर असर पड़ सकता है। दूसरी अर्थव्यवस्थाओं पर असर से भारत के निर्यात क्षेत्र पर संकट गहरा सकता है जो भारत के लिए अतिरिक्त समस्या का कारण बन सकता है। डॉलर की कीमतें बढ़ने, रुपये की कीमतों में ज्यादा कमी होने और महंगाई बढ़ने से सरकार के लिए बजट घाटा कम करने में मुश्किलें आ सकती हैं। इससे कल्याणकारी योजनाओं पर होने वाले खर्च में कटौती भी हो सकती है जिसके दूरगामी परिणाम हो सकते हैं।