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वाराणसी सीरियल बम ब्लास्ट के दोषी वलीउल्लाह की फांसी सजा को जमीयत उलमा देगी हाईकोर्ट में चुनौती

Varanasi serial blast case वाराणसी सीरियल ब्लास्ट मामले गाजियाबाद सेशन कोर्ट द्वारा आरोपी वलीउल्लाह को दोषी करार देते हुए फांसी की सजा सुनाई गई है। अब इस मामले में दोषी वलीउल्लाह के साथ जमीयत उलमा ए हिंद खड़ी हो गई है। जिसमें जमीयत के अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी ने अब सेशन कोर्ट के फैसले केा हाईकोर्ट में चुनौती देने की बात कही है। उन्होंने कहा है कि वलीउल्लाह की फांसी सजा को हाईकोर्ट में चुनौती दी जाएगी। इसकी पुष्टि मेरठ जमीयत उलमा ए हिंद के पदाधिकारियों ने की है।

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मेरठ

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Kamta Tripathi

Jun 07, 2022

वाराणसी सीरियल बम ब्लास्ट के दोषी वलीउल्लाह की फांसी सजा को जमीयत उलमा देगी हाईकोर्ट में चुनौती

वाराणसी सीरियल बम ब्लास्ट के दोषी वलीउल्लाह की फांसी सजा को जमीयत उलमा देगी हाईकोर्ट में चुनौती

Varanasi serial blast case वाराणसी कैंट में हुए बम धमाके में गाजियाबाद सेशन कोर्ट ने गत सोमवार को एतिहासिक फैसला सुनाते हुए आरोपी वलीउल्लाह को एक मामले में आजीवन कारावास तो दूसरे मामले में फांसी की सजा सुनाई। वाराणसी में हुए सीरियल बम धमाके में कोर्ट का यह फैसला 16 साल बाद आया है। कोर्ट के इस फैसले का जमीयत उलमा ए हिंद ने विरोध किया है और जमीयत के अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी ने वलीउल्लाह की फांसी की सजा के फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती देने की बात कही है। जमीयत के राष्ट्रीय अध्यक्ष अरशद मदनी ने कहा है कि वलीउल्लाह के फांसी की सजा को हाईकोर्ट में चुनौती दी जाएगी।

गाजियाबाद की सेशन कोर्ट द्वारा छह जून 2006 में वाराणसी के संकट मोचन मंदिर में सीरियल बम ब्लास्ट मामले के आरोपी वलीउल्लाह को फांसी की सजा सुनाने के फैसले को अब जमीयत उलमा-ए-हिंद ने हाईकोर्ट में चुनौती देने की बात कही है। जमीयत उलमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी ने इस मसले पर कहा कि निचली अदालत के फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी जाएगी। उन्होंने कहा कि उनको पूर्ण विश्वास है कि हाईकोर्ट से इस मामले में वलीउल्ला को न्याय मिलेगा। मदनी ने कहा कि ऐसे कई मामले हैं जिनमें निचली अदालतों ने सजाएं दीं लेकिन जब निचली अदालतों के ऐसे मामले हाईकोर्ट की अदालत में पहुंचे तो पूरा इंसाफ मिला है।

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उन्होंने कहा कि इसका बड़ा उदाहरण अक्षरधाम मंदिर हमले का मामला है। जहां निचली अदालत ने अबदुल कय्यूम सहित तीन लोगों को फांसी और चार को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। यहां तक कि गुजरात हाईकोर्ट ने इस फैसला को बरकरार रखा। लेकिन जब जमीयत कानूनी सहायता के लिए आगे आई तो मुकदमा सुप्रीम कोर्ट ले जाया गया जहां से सभी लोग बरी हुए।