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Online Shopping की तर्ज पर चल रहा जिस्मफरोशी का धंधा, पेटीएम से होता है पेमेंट

खास बातें एस्काॅर्ट सर्विस के नाम पर चल रहा आनलाइन जिस्मफरोशी का धंधा आनलाइन लड़कियां पसंद आने के बाद गिरोह शुरू करता है अपना काम व्हाट्सऐप, इंटरनेट, होटल के जरिए शहर में कई स्थानों पर गिरोह सक्रिय

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मेरठ। आनलाइन शाॅपिग की तर्ज पर शहर में आनलाइन जिस्मफरोशी का धंधा पांव पसार रहा है। एस्काॅर्ट सर्विस के नाम से आनलाइन चल रहे जिस्मफरोशी के धंधे में आन डिमांड लड़कियां मिल जाती हैं। इंटरनेट पर एस्काॅर्ट सर्विस के नाम से चल रहा यह धंधे से न जाने कितनी हाई प्रोफाइल लड़कियों के फोटो और उनके मोबाइल नंबर पड़े हुए हैं। जो युवकों को अपने जाल में फंसा रही हैं। वेबसाइट पर सैकड़ों लड़कियों के फोटो, प्रोफाइल और मोबाइल नंबर तक पड़े हुए हैं।

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धंधे में पेटीएम से हो रहा पेमेंट

होटलों की आड़ में यह हाई प्रोफाइल आनलाइन जिस्मफरोशी तेजी से फलफूल रही है। पुलिस भी इसे रोकने में बेबस नजर आ रही है। साइबर सेल की पकड़ से बाहर ये आॅनलाइन काॅल गर्ल्स मोबाइल से लेकर इंटरनेट चलाने तक में माहिर हैं। वेबसाइट पर दिए नंबरों पर काॅल करने पर फोन उठाने वाला एक ही बात कहता है कि पेमेंटआनलाइन पेटीएम से होगा। लड़की होटल में ही भेजी जाएगी। मेरठ के कई होटलों में छापे के दौरान इस तरह के सेक्स रैकेट पकड़े गए। पूछताछ में लड़कियों और युवकों ने बताया कि उनका पहले से कोई संपर्क नहीं था। वे आॅनलाइन पर डीलिंग होने के बाद ही एक-दूसरे के संपर्क में आए। उसी पर सौदेबाजी हुई। यानी मुख्य सूत्रधार पुलिस की गिरफ्त से दूर हो जाता है।

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ऐसे संचालित हो रहा यह धंधा

वेबसाइट पर दिए नंबर पर काॅल करने पर मोबाइल पर वाट्सऐप पर लड़की की फोटो भेजी जाती है। एक को पसंद करने के बाद पूछा जाता है- आपके पास होटल का कमरा है या इंतजाम करें। कई होटलों के नाम बताए जाते हैं। किसी एक होटल के नाम पर सहमति बनने के बाद कमरा बुक होता है और फिर काॅल गर्ल्स भेज दी जाती है।

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वाट्सऐप पर होती है फिक्सिंग

ऐसे कई वाटसएप ग्रुप बने हुए हैं जो कि इस धंधे को संचालित कर रहे हैं। इनमें कुछ सलेक्टेड लोग ही शामिल हैं। अधिकांश बड़े घर के रईसजादे या फिर कुछ बिजनेसमैन शामिल हैं। इसी वाट्सऐप ग्रुप पर लड़की की फोटो डाली जाती है। फिर शुरू होती है डीलिंग की बात। लड़कियों के फोटो शेयर करने के बाद रेट भी इसी में तय हो जाते हैं। फोटो और रेट तय होने पर ही लड़की को बुलाया जाता है। लड़की की पूरी सुरक्षा का जिम्मा एजेंट का होता है। पकड़े जाने पर उसको छुड़वाने की भी जिम्मेदारी इन एजेंटों को उठानी पड़ती है।

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रेडलाइट एरिया की सेक्सवर्कर आनलाइन

समाज में फैले इस जहर को दूर करने के लिए पुलिस भले ही कितने प्रयास करें, लेकिन इसकी जमीनी हकीकत कुछ और ही है। मेरठ के रेड लाइट एरिया से निकली सेक्सवर्कर भी अब आनलाइन हो गई हैं। मेरठ का रेड लाइट एरिया कबाड़ी बाजार बंद हुआ तो यहां की सेक्स वर्करों ने अपने ठिकाने मेरठ की पाॅश कालोनियों में बना लिए। कालोनी में आसपास किसी को पता नहीं चले, इसलिए धंधे को भी आनलाइन कर लिया। वाट्सऐप ग्रुप और अन्य वेबसाइटों के माध्यम से धंधा जारी है।

मेरठ में पकड़े गए कई हाईफाई रैकेट

मेरठ में पिछले तीन महीने में एक दर्जन से अधिक सेक्स रैकेट पुलिस ने पकड़े। जिनकी डीलिंग आनलाइन हो रही थी। वाटसअप पर लड़किया पसंद की जा रही थी। इसके बाद होटलों में जिस्मफरोशी की जा रही थी। बीती बुधवार को भी मेरठ की पाॅश कालोनी शास्त्रीनगर के एक होटल में छापेमारी के दौरान होटल में काम करने वाले युवक ने पूछताछ में बताया कि वह इस धंधे एक साल से संलिप्त था। सब कुछ आनलाइन हो रहा था।

मुख्य आरोपी तक पहुंचना बनी सिरदर्दी

पुलिस के लिए आनलाइन जिस्मफरोशी का धंधा सिरदर्दी बना हुआ है। पुलिस स्थानीय मुखबिर की सूचना पर होटल में छापेमारी कर सेक्स रैकेट तो पकड़ रही है, लेकिन इसके पीछे हाथ किसका है कौन इसको संचालित कर रहा है। वहां तक पुलिस नहीं पहुंच पा रही। यहां तक कि जिन मोबाइल नंबरों से जिस्मफरोशी के लिए लड़कियों को भेजा जाता है, उन नंबरों पर फोन करने पर वे बंद आते हैं। कुछ मिलाकर जिस्मफरोशी के इस आॅनलाइन धंधे में उनके आकाओं तक पहुंचना पुलिस के लिए मुश्किल बन गया है।

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