
कांवड़ यात्रा 2018 Live: राजस्थान के शिवभक्त यूपी के इस शहर में आए सबसे पहले, 25 साल में इतनी बदली यह यात्रा
मेरठ। कांवड़ यात्रा 2018 का आगाज हो गया है। मेरठ से कांवड़ियों का गुजरना शुरू हो गया हैं। बम-बम भोले की गूंज शहर से करीब 15 किलोमीटर चौधरी चरण सिंह गंग नहर कांवड़ पटरी मार्ग पर गूंजने लगी है। रविवार को कांवड़ियों का पहला जत्था गोमुख से गंगा जल लेकर अपने गंतव्य को रवाना होकर मेरठ पहुंचा। शहर में सबसे पहले राजस्थान के कावंड़िए पहुंचे हैं। राजस्थान के एेतिहासिक नगर दौसा से 20 कांवड़ियों का दल सुबह मेरठ पहुंचा। इन्होंने बताया कि गोमुख से कांवड़ लाकर दौसा लौट रहे हैं। इन्होंने बताया कि पिछले दिनों बारिश के कारण पहाड़ी क्षेत्रों में पत्थर टूटकर नीचे आ रहे थे, तो उन्हें थोड़ी परेशानी हुर्इ, लेकिन उसके बाद से सबकुछ ठीक है। उन्होेंने उम्मीद जतार्इ कि नौ अगस्त सावन शिवरात्रि से एक दिन पहले तक दौसा पहुंच जाएंगे। रविवार को राजस्थान के शिवभक्त यहां पहुंचने के बाद से पटरी मार्ग कांवड़मय होना शुरू हो गया है। मेरठ जनपद में गंग नहर पटरी मार्ग 42 किलोमीटर है। दूर-दराज के कांवड़िए इसी पटरी मार्ग से गुजरकर अपने नगर के शिवालय तक पहुंचते हैं।
पहले पूरे सीजन में 500 कांवड़िए, अब रोजाना पांच हजार
मेरठ में आने वाले कांवड़िए कांवड़ पटरी मार्ग पर लगाए गए कांवड़ शिविरों में रुकते हैं आैर फिर आगे बढ़ जाते हैं। 1994 से गंग नहर जानी पुल के पास सह मित्र मंडल कांवड़ सेवा संघ जानी कांवड़ शिविर लगाते आए हैं। शिविर के संचालक यशपाल सिंह का कहना है कि यह 25वां साल है, जब हम कांवड़ियों के लिए शिविर लगा रहे हैं। उन्होंने बताया कि कावंड़ मार्ग तब कच्चा होता था आैर पूरे सीजन में ही करीब 500 कांवड़िए ही आते थे, लेकिन कांवड़ लाने की आस्था धीरे-धीरे बढ़ती गर्इ आैर अब सीजन में रोजाना पांच हजार कांवड़िए यहां से गुजरते हैं। उन्होंनेे बताया कि समय के साथ कांवड़ शिविर में बदलाव आया है, पहले छोटे शिविर तो अब कर्इ सुविधाएं वाले कांवड़ शिविर लगने लगे हैं। उन्होंने बताया कि इस बार सुरक्षा काे लेकर विशेष सतर्कता है आैर पुलिस रात में गश्त कर रही है।
Published on:
29 Jul 2018 05:05 pm
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