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सामाजिक अन्याय के खिलाफ गांधीवादी तरीके से लड़ी ये देशभक्त मुस्लिम महिला

आज 21 अक्टूबर को देशभक्त मुस्लिम महिला कुलसुम सयानी का जन्मदिन मनाया गया। मेरठ के एक शिक्षण संस्थान में आयोजित कार्यक्रम में कुलसुम सयानी के जीवन पर एक प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। जिसमें छात्रों ने कुलसुम सयानी की जीवनी से संबंधित बातें कहीं। बता दें कि कुलसुम सयानी का जन्म 21 अक्टूबर 1900 को गुजरात में हुआ था। 17 साल की उम्र में, वह और उनके पिता महात्मा गांधी से मिले। उसके बाद से कुलसुम ने गांधी जी के कदमों पर चलने का फैसला किया था।

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मेरठ

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Kamta Tripathi

Oct 21, 2022

सामाजिक अन्याय के खिलाफ गांधीवादी तरीके से लड़ी देशभक्त मुस्लिम महिला कुलसुम सयानी

सामाजिक अन्याय के खिलाफ गांधीवादी तरीके से लड़ी देशभक्त मुस्लिम महिला कुलसुम सयानी

देश में ऐसी भी मुस्लिम महिलाएं हुई हैं। जिन्होंने रूढिवादियों की जंजीर को तोड़ फेका और समाज में फैली कुरीतियों के खिलाफ झंडा बुलंद किया। इन्हीं में से एक कुलसुम सयानी हैं। कुलसुम सयानी एक देशभक्त मुस्लिम महिला थीं। कुलसुम ने प्रसिद्ध स्वतंत्रता योद्धा डॉ. जान मोहम्मद सयानी से शादी की। उन्होंने भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन में काम करते हुए सामाजिक अन्याय के खिलाफ लड़ाई लड़ी। वह अपने पति के समर्थन के कारण भारतीय स्वतंत्रता संग्राम की विभिन्न गतिविधियों में अत्यधिक शामिल हो गईं।

भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन के दौरान, उन्होंने सामाजिक परिवर्तन के लिए अभियान चलाया। उन्होंने निरक्षरों को शिक्षित करना शुरू किया और चरखा वर्ग का हिस्सा बन गईं। वह भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की जन जागरण पहल में भी एक प्रमुख व्यक्ति थीं, जिसका उद्देश्य लोगों को सामाजिक समस्याओं के बारे में अधिक जागरूक बनाना था। उन्होंने वयस्क शिक्षार्थियों, भारतीय मुक्ति आंदोलन में महिलाओं के महत्व, लोक कल्याण और भारत-पाकिस्तान संबंधों के अलावा अन्य विषयों के बारे में कई रचनाएँ लिखीं।

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उनके हिंदी भाषा के काम में प्रौध शिक्षा में मेरे अनुभव, भारत-पाक मैत्री-मेरे प्रयत्न, भारतीय स्वतंत्र संग्राम में महिलाओं की भूमिका, भारत में प्रौध शिक्षा शामिल हैं। सयानी को उनके योगदान के लिए 1959 में भारत सरकार द्वारा पद्मश्री से सम्मानित किया गया था। 1969 में, भारत के राष्ट्रपति ने उन्हें नेहरू साक्षरता पुरस्कार से सम्मानित किया। 27 मई, 1987 को उनकी मृत्यु हो गई।