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ATS की पूछताछ में खुलासा, लुकमान पर थी 50 से अधिक आतंकी माड्यूल तैयार करने की जिम्मेदारी

ATS द्वारा पकड़े चार संदिग्ध आतंकवादी लंबे समय से देश विरोधी गतिविधियों में लिप्त थे। चारों सहारनपुर के रहने वाले हैं। इनमें लुकमान को पश्चिमी उत्तर प्रदेश में और कामिल को उत्तराखंड में 50 से अधिक आतंकी माड्यूल तैयार करने की जिम्मेदारी मिली थी। एटीएस की पूछताछ में दोनों ने ये राज खोला है। एटीएस की टीम इनसे पूछताछ कर रही है। वहीं इनके संपर्क में और कौन—कौन लोग थे उसके बारे में भी जानकारी की जा रही है। आतंकी संगठन अलकायदा और जमात—उल—मुजाहिदीन के लिए ये सक्रिय होकर काम कर रहे थे।

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मेरठ

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Kamta Tripathi

Oct 12, 2022

ats_looking_for_parvez_alam_after_pfi_agent_mufti_shahzad_in_ghaziabad.jpg

ATS looking for Parvez Alam after PFI agent Mufti Shahzad in Ghaziabad

ATS की टीम ने अलकायदा al Qaeda और जमात-उल- मुजाहिदीन Jamaat-ul-Mujahideen के आठ संदिग्ध आतंकियों को गिरफ्तार किया था। इनमें थाना गागलहेड़ी के गांव सैय्यद माजरा से लुकमान, चिलकाना थाना क्षेत्र के मनोहरपुर गांव निवासी कारी मुख्तयार, कामिल निवासी देवबंद कोतवाली के गांव जहीरपुरा, मोहम्मद अलीम निवासी कैलाशपुर गांव थाना गागलहेड़ी पकड़े गए थे। एटीएस के अनुसार लुकमान बांग्लादेशी निवासी अब्दुलतल्हा के संपर्क में काफी समय से था। कारी मुदस्सिर मदरसा संचालक है। जिसकी गतिविधियां भी संदिग्ध हैं। जबकि मोहम्मद अलीम और कामिल अपने घरों से गायब रहते थे। लेकिन चारों हमेशा एक-दूसरे के संपर्क में रहते थे।


लुकमान और कामिल से एटीएस ATS को काफी अहम जानकारियां हाथ लगी हैं। इनके संपर्क में आए लोगों को पकड़ने के लिए एटीएस फिर से छापेमार कार्रवाई कर सकती है। पकड़े गए चारों आतंकी उत्तराखंड और पश्चिम उत्तर प्रदेश के युवाओं को आतंकी संगठनों को जोड़ रहे थे। एसटीएस के अनुसार कामिल छह महीने पहले गांव में रहता था। उसके पास अचानक पैसा आया और वह फिर हरिद्वार जाकर रहने लगा। जहां पर उसने दिखावे के लिए परचून की दुकान खोल ली। माना जा रहा है कि कामिल के पास अब्दुल तल्हा के माध्यम से पैसा आया।

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पिछले काफी समय से पश्चिमी उप्र देश विरोधी गतिविधियों का बड़ा केंद्र बनता जा रहा है। कटटरपंथी संगठनों के अलावा आतंकी संगठन भी पश्चिमी उप्र के जिलों में पैठ बना रहे हैं। इसी कारण से देश की खुफिया एजेंसियों के अलावा जांच एजेंसियां भी सक्रिय हैं और संदिग्ध आतंकियों की धरपकड़ के लिए छापेमारी करती रहती हैं।