
मेरठ। 10 मई 1857 के दिन से मेरठ से देशभक्ति की जो ज्वाला धधकी, वह आज भी यहां के लोगों के दिलों में देश के लिए जल रही है। देशभक्ति का जो जुनून मेरठवासियों के दिलों में है, वह कम ही देखने को मिलता है। यहां के जवान चाहे सरहद पर डटे हों या फिर नागरिक के रूप में। देशभक्ति की कीमत चुकाने की बात जहां आती है, वह अपनी जान देने से भी पीछे नहीं हटते। पुलवामा में मेरठ के बसा टीकरी गांव के 55 राष्ट्रीय राइफल्स के सिपाही अजय कुमार शहीद हुए थे। आज देश स्वतंत्रता दिवस मनाने की तैयारी में व्यस्त है। शहीद अजय कुमार के घर में देश के राष्ट्रीय पर्व का माहौल है।
अपने पोते को भी सेना में भर्ती कराएंगे
'पत्रिका' की हुई बातचीत में शहीद अजय के पिता वीरपाल ने बताया कि अजय का ढाई साल का बेटा आरव हाथ में तिरंगा लिए हुए है। वह हाथ उठाकर भारत माता की जय बोलता है। उनका कहना है कि उन्हें अपने बेटे पर नाज है। उन्होंने कहा कि वह पोते आरव को भी सेना में भर्ती कराएंगे। जिससे वह भी देश की सेवा कर सके। पुलवामा में बीती 16 फरवरी की देर रात एनकाउंटर में मेरठ के जानी थाना क्षेत्र के बसा टीकरी गांव निवासी सिपाही अजय कुमार भी शहीद हुए थे। एनकाउंटर में 55 राष्ट्रीय राइफल्स के मेजर समेत चार जवानों ने शहादत पाई थी। अजय का निशाना अचूक था। सेना ने जैश के दो आतंकियों को मार गिराया था। मारे गए आतंकियों में सीआरपीएफ पर आतंकी हमले का मास्टरमाइंड कामरान भी शामिल था। अजय का एक बेटा आरव है जो कि ढाई साल का है। उनके पिता वीरपाल भी सेना से रिटायर्ड हैं।
शहादत का शहीद होकर लिया बदला
जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में सीआरपीएफ के काफिले में आतंकी ने 350 किलो विस्फोट से भरी कार घुसा दी थी। इस हमले में सीआरपीएफ के 40 जवान शहीद हो गए थे। इसके बाद जवानों ने आतंकवादियों के साथ एनकाउंटर में पुलवामा हमले के मास्टरमाइंड कामरान समेत दो आतंकियों को ढेर कर दिया था। बसा टीकरी के जवान अजय कुमार ने सीआरपीएफ जवानों की शहादत का बदला लेते हुए अपनी जान की बाजी लगा दी थी।
Published on:
14 Aug 2019 02:56 pm
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