2 फ़रवरी 2026,

सोमवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

सरकार की बेरुखी पर छलका शहीद मेजर के परिजनों का दर्द

शहीद मेजर के परिजनों ने दी धरने पर बैठने की धमकी परिजनों का आरोप सरकार ने नहीं पूरा किया अपना वादा मुख्यमंत्री योगी अदित्यानाथ को भेजा शिकायती पत्र

2 min read
Google source verification

मेरठ

image

shivmani tyagi

Oct 05, 2020

meerut_1.jpg

meerut

मेरठ ( Meerut ) सरकार की बेरूखी के चलते शहीद मेजर केतन शर्मा के परिजनों का सब्र का बांध टूट गया है। डेढ़ वर्ष पूर्व मेजर केतन शर्मा जम्मू-कश्मीर में आतंकियों से लड़ते हुए शहीद हो गए थे। इसके बाद राज्य सरकार ने केतन शर्मा के परिजनों से उनकी अंत्येष्ठी के दौरान कुछ वादे किए थे लेकिन आज डेढ़ वर्ष बाद भी सरकार अपने वादे पूरे नहीं कर सकी।

यह भी पढ़ें: हाथरस कांड काे लेकर सवर्ण समाज ने एसआईटी काे दिया खून से लिखा पत्र

इससे शहीद के परिजनों में आक्रोश है। परिजनों ने कहा कि क्या हमें भी सरकार को उसका वादा याद दिलाने के लिए धरने-प्रदर्शन करने होंगे ? आखिर सरकार खुद ही वादें कर रही थी लेकिन अब निभाना भूल गई है। उन्होंने इस संबंध में मुख्यमंत्री ( Yogi Adityanath ) को पत्र भेजकर मांग पूरी कराने की बात कही। श्रद्धापुरी निवासी मेजर केतन शर्मा पुत्र रविंद्र शर्मा 17 जून 2019 को जम्मू कश्मीर के अनंतनाग में आतंकवादियों से मुठभेड़ के दौरान शहीद हो गए थे।

यह भी पढ़ें: सांसद राजवीर दिलेर ने कहा हाथरस के आरोपियों से मिलने के आरोप निराधार

शहीद मेजर केतन शर्मा के ताऊ अशोक शर्मा और पिता रविंद्र शर्मा का कहना है कि इसके बाद मुख्यमंत्री ने शहीद परिवार के लिए किए गए वादे आज तक पूरे नहीं हो सके, उनका कहना है कि गत 10 सितंबर 2020 प्रदेश के 11 शहीदों के नाम से सड़क का नामकरण करने की घोषणा डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य द्वारा की गई लेकिन उसमें मेजर शहीद केतन शर्मा का नाम नहीं था। इससे परिजनों को आघात पहुंचा उन्होंने कहा कि हमने सरकार से कोई मांग नहीं रखी थी। जनप्रतिनिधियों मेयर व सरकार ने चार वादे पूरे करने को कहा था। शहीद परिवार को 25 लाख रूपये, परिवार को एक सरकारी नौकरी, शहीद मेजर केतन शर्मा के नाम से सड़क का नामकरण और शहीद द्वार व पार्क का नाम शहीद मेजर केतन शर्मा के नाम रखने की घोषणा की थी।

यह भी पढ़ें: हाथरस : पीड़ित परिवार से मिलने पहुंचे सांसद संजय सिंह पर फेंकी गई स्याही, बताया PFI का एजेंट

घटना को हुए करीब डेढ़ वर्ष होने वाला है। लेकिन अभी तक सड़क और पार्क का नामकरण नहीं हो सका और ना ही शहीद के नाम से गेट का निर्माण हो सका। इससे शहीद की याद लोगों के दिलों में बसी रहे। उन्होंने कहा कि सरकार ने 25 लाख रुपए तो दे दिए और पत्नी ईरा शर्मा को क्लर्क की नौकरी दी जा रही थी जिसको ईरा शर्मा ने अस्वीकार कर दिया। उन्होंने कहा कि उसकी पढ़ाई के हिसाब से और पति क्लास वन ऑफिसर था उसी हिसाब से जॉब दी जानी चाहिए। परिजनों का कहना था कि शहीद की पत्नी को अध्यापक या उसके समकक्ष नौकरी दी जानी चाहिये।

यह भी पढ़ें: हाथरस एसपी ने बढ़ाई पीड़िता के परिवार सुरक्षा, जानिए किस सदस्य की सुरक्षा में कितने पुलिसकर्मी

इस संबंध में परिजनाें ने जिलाधिकारी से मिलने और मुख्यमंत्री को पत्र भेजने की बात कही है। इस दौरान श्रद्धापुरी आवासीय कल्याणकारी समिति के पदाधिकारी संजय सिंह, देवेंद्र कुमार गावा, बीके दास, शिवकुमार त्यागी, भोपाल सिंह, जगमोहन शर्मा और बंटी बरनाला मौजूद रहे।

Story Loader