बीएसपी सुप्रीमो ने प्रदेश में राज्यसभा चुनाव के बाद राजनैतिक पैतरा बदल दिया है। पहले जहां वे महागठबंधन की गोरखपुर और फूलपुर जीत से उत्साहित नजर आ रही थी और उन्हें उस जीत के बाद उम्मीद लग रही थी कि समाजवादी पार्टी उनके पार्टी के एकमात्र राज्यसभा प्रत्याश को जीत दिलवाएगी। लेकिन, ये संभव नहीं हो सका। राज्यसभा की सीट भी गई और मायावती के हाथ कोई राजनैतिक लाभ भी महागठबंधन के बाद नहीं लगा। जिससे वे अपने आप को ठगा हुआ महसूस कर रही है। इसी कारण उन्होंने कैराना और बिजनौर उपचुनाव से खुद को दूर करने का ऐलान किया है। प्रदेश में तेजी से बदलते हुए राजनीति हालात व सामाजिक समीकरण एवं आपनी तालमेल पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए मायावती ने कहा कि बहुत मजबूरी में ही सही अगर सर्वसमाज के गरीब, उपेक्षित व शोषित लोग एकजुट होकर वोट को अपने अन्तिम हथियार का सही राजनीतिक इस्तेमा करके सत्ता की मास्टर चाबी अपने हाथ में हासिल कर लेते हैं, तो एक कल्याणकारी सरकार का उनका सपना पूरा हो सकता है।