10 अप्रैल 2026,

शुक्रवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

मेरठ में 859 इमारतों पर चलेगा बुलडोजर, सुप्रीम कोर्ट का बड़ा आदेश, लोगों में मचा हड़कंप

सुप्रीम कोर्ट ने मेरठ के शास्त्री नगर में 859 संपत्तियों के अवैध सेटबैक को दो महीने में हटाने का आदेश दिया है।

3 min read
Google source verification

मेरठ

image

Anuj Singh

Apr 10, 2026

सुप्रीम कोर्ट (ANI)

Meerut News: सुप्रीम कोर्ट ने यूपी के मेरठ शहर में बड़े पैमाने पर हो रहे अवैध निर्माणों पर सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने गुरुवार 9 अप्रैल 2026 को शास्त्री नगर क्षेत्र की 859 संपत्तियों में बने अवैध सेटबैक को दो महीने के अंदर तोड़ने का आदेश दिया। यह मामला सिर्फ मेरठ तक सीमित नहीं है। कोर्ट ने कहा कि यह पूरे देश के लिए चेतावनी है। अगर प्रशासन समय पर सख्ती करता तो इतनी बड़ी समस्या नहीं बनती।

सेटबैक क्या है और क्यों है समस्या?

सेटबैक का मतलब है इमारत के चारों तरफ छोड़ी जाने वाली अनिवार्य खाली जगह। नियम के मुताबिक हर इमारत के आसपास कुछ जगह खाली रखनी पड़ती है, ताकि आग लगने पर बचाव आसान हो, हवा-रोशनी आए और पड़ोसियों को परेशानी न हो। मेरठ में कई लोगों ने इस खाली जगह पर भी दुकानें, कमरे या अन्य निर्माण कर लिया। इससे पूरा इलाका नियमों के खिलाफ हो गया। कोर्ट ने साफ कहा कि कानून का राज लोगों के शोर-शराबे के आगे नहीं झुक सकता। किसी की जिंदगी की कीमत पर व्यवसाय नहीं चल सकता। खासकर बच्चों, मरीजों और आम लोगों की सुरक्षा सबसे महत्वपूर्ण है।

44 संपत्तियों को सील करने का आदेश

इस मामले में 6 अप्रैल को कोर्ट ने 859 में से सेंट्रल मार्केट की 44 संपत्तियों को तुरंत सील करने का आदेश दिया था। बुधवार को आवास विकास परिषद ने इन 44 दुकानों को सील कर दिया। लेकिन सीलिंग के समय व्यापारियों ने विरोध किया और अफसरों को परेशानी हुई। इन 44 संपत्तियों में शामिल हैं, 6 स्कूल, 6 अस्पताल, 4 बैंक्वेट हॉल, 3 बैंक, 1 नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनी।

कोर्ट ने इस पर बहुत नाराजगी जताई। जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस केवी विश्वनाथन की पीठ ने पूछा कि इतनी महत्वपूर्ण जगहों को अवैध इमारतों में चलाने की इजाजत किसने दी? स्कूल में पढ़ने वाले मासूम बच्चे, अस्पताल में इलाज कराने वाले मरीज और आम लोग खतरे में कैसे पड़ गए? कोर्ट ने कहा कि हमारे लिए बिजनेस से ज्यादा लोगों की जान मायने रखती है।

अवैध निर्माण को वैध नहीं किया जा सकता

कोर्ट ने साफ निर्देश दिया कि अवैध सेटबैक को किसी भी तरह वैध नहीं किया जा सकता। न तो जुर्माना देकर और न ही कोई फीस देकर इसे सही ठहराया जा सकता है। नियम सख्ती से लागू होंगे। कोर्ट ने यूपी के अधिकारियों को फटकार लगाई कि उनकी लापरवाही के कारण ही अवैध निर्माण इतने बड़े स्तर पर फैले। स्कूल, अस्पताल और यहां तक कि सरकारी बैंक जैसी जगहों को बिना अनुमति की इमारतों में चलने दिया गया।

ध्वस्तीकरण की प्रक्रिया

कोर्ट ने ध्वस्तीकरण की साफ प्रक्रिया बताई। कोर्ट ने कहा कि पहले कब्जादारों को नोटिस दिया जाएगा। उन्हें 10 से 15 दिन का समय मिलेगा कि वे खुद अवैध हिस्सा हटा लें। अगर वे नहीं हटाते तो प्रशासन खुद तोड़ेगा। पूरा खर्च कब्जा करने वालों से वसूला जाएगा। कोर्ट ने आवास एवं विकास परिषद को निर्देश दिया कि 44 सील की गई संपत्तियों की स्थिति पर हलफनामा दाखिल करे। इसमें सील करने से पहले और बाद की तस्वीरें भी लगानी होंगी ताकि साबित हो कि कार्रवाई सही तरीके से हुई है।

अगली सुनवाई कब है?

अगली सुनवाई जुलाई में होगी। कोर्ट ने दोहराया कि प्रशासन की लापरवाही अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी। यह सिर्फ मेरठ का मामला नहीं बल्कि पूरे देश में अवैध निर्माण रोकने का संदेश है। यह फैसला याद दिलाता है कि शहरों में विकास तो जरूरी है लेकिन सुरक्षा और नियमों से समझौता नहीं हो सकता। लोगों की जान से ऊपर कुछ नहीं। अगर समय रहते सख्त कदम उठाए जाते तो इतनी बड़ी समस्या पैदा ही नहीं होती। अब प्रशासन को दो महीने में 859 संपत्तियों के अवैध सेटबैक हटाने होंगे।

बड़ी खबरें

View All

मेरठ

उत्तर प्रदेश

ट्रेंडिंग