
योगी की पुलिस के परिवार रहते हैं एेसे सरकारी मकानों में कि कभी भी हो जाए कोर्इ हादसा, अफसरों बता रहे ये मजबूरी, देखें वीडियो
मेरठ। आमतौर पर पुलिस को अपराध की रोकथाम और समाज की सुरक्षा के लिए ही जाना जाता है, लेकिन क्या कभी सरकार या महकमे ने यह सोचा कि जिस खाकी के कंधों पर समाज और लोगों की सुरक्षा का जिम्मा होता है उनके बच्चे या उनका परिवार किस हाल में रहता है। 24 घंटे ड्यूटी पर रहने वाले सिपाही या दरोगा के परिवार की सुरक्षा या फिर उनके रहने की क्या व्यवस्था की गई है। मेरठ की पुलिस लाइन में बने फैमिली क्वार्टर्स देखकर यही लगता है कि जैसे यहां बने मकानों की तो बरसों से किसी ने सुध ही नहीं ली है। जर्जर मकान और सीलन भरी दीवारों के बीच रह रहे हैं पुलिस कर्मियों के परिजन। मकान देखकर तो ऐसा लगता है कि कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। लेंटर टूटकर नीचे गिर गया है और उसमें से सरिये निकलकर बाहर झांक रहे हैं। इसी लाइन में महकमे के अालाधिकारी महीने में करीब दस बार बैठते हैं, लेकिन किसी को इन परिवारों की ओर देखने की फुर्सत नहीं है।
80 साल पुराने हैं मकान
मेरठ पुलिस लाइन में बने ये मकान 70-80 साल पुराने हैं। पुलिस लाइन के आरआई होरी लाल सिंह कहते हैं कि इन क्वार्टर्स में तीन टाइप के मकान हैं। जिनमें टाइप ए के 72, टाइप टू के करीब 300 और बाकी टाइप थ्री के हैं। लाइन में कुल 890 मकान बने हुए हैं। उनका कहना है कि साल में एक बार मकानों की मेंटीनेंस के लिए बजट आता है, लेकिन जितना बजट आता है उससे कुछ मकानों की ही मरम्मत हो पाती है। जब तक दूसरा साल आता है मकानों की हालत और सख्ता हो जाती है।
रहते हैं सात सौ परिवार
पुलिस लाइन में बने मकानों में करीब सात सौ पुलिसकर्मियों के परिवार रहते हैं। जिसमें सिपाही और चतुर्थ श्रेणी के अलावा इंस्पेक्टर रैंक के अधिकारियों के भी परिवार निवास करते हैं। लोगों ने कैमरे के सामने बात करने से मना कर दिया, लेकिन इन मकानों की दुर्दशा पर पीछे खुलकर बात की। उनका कहना है कि अधिकांश लोग तो मकानों की हालत के कारण इनको छोड़कर चले गए। सुखपाल जो कि चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी है और मेरठ के ही एक थाने में तैनात है उसने बताया कि दो दिन पहले उसकी बेटी मकान के छज्जे पर खड़ी थी इतने में छज्जा टूटकर नीचे गिर गया। शुक्र है उसकी बेटी नहीं गिरी।
नए मकानों के लिए न बजट, न जगह
आरआई होरी लाल बताते हैं कि नए मकानों के लिए कोई बजट नहीं है। नए मकानों के लिए प्रस्ताव भी भेजे गए हैं। लेकिन उन पर कोई गौर नहीं किया गया। वहीं नए मकान लाइन में बनाने के लिए भी कोई जगह नहीं है। लाइन के भीतर जो जगह थी उनमें आठ सौ लोगों के रहने के लिए नई बैरक का निर्माण हो रहा है। जो सिर्फ सिपाहियों के लिए ही है। इस बारे में जब एसएसपी अखिलेश कुमार से बात की गई तो उन्होंने कहा कि उन्हें मकानों की दुर्दशा की कोई जानकारी नहीं है। वे इसके बारे में पता करवाएंगे और इसके बाद मुख्यालय पत्र लिखेंगे।
Published on:
21 Nov 2018 10:17 am
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