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Lockdown: थानों में महिला पुलिसकर्मी बना रही पूड़ी—सब्जी, मेरठ पुलिस रोज 20 हजार लोगों को खिला रही खाना

Highlights Lockdown के बाद बदल गया है थानों का नजारा Meerut के थानों से गायब हो गए हैं फरियादी सदर थाने में ही 10—12 महिला सिपाही बना रही हैं खाना

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मेरठ

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sharad asthana

Apr 06, 2020

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मेरठ। हमेशा फरियादियों से गुलजार रहने वाले मेरठ के थानों का नजारा लॉकडाउन के दौरान एकदम बदला हुआ है। लॉकडाउन में फरियादी थाने से गायब हैं। थाने में तैनात महिला सिपाही और कुछ एनजीओ की सदस्य गैस पर गरमा—गरम खाना बना रही हैं। ऐसे में पुलिस अधिकारी भी महिला सिपाहियों और खाना बना रही इन महिलाओं के काम में हाथ बंटा रहे हैं। मेरठ पुलिस का दावा है कि रोज करीब 20 हजार जरूरतमंदों को खाना खिलाया जा रहा है।

गाड़ियों में भरकर भेजा जा रहा है खाना

थानों में महिला कांस्टेबलों और एनजीओ द्वारा बनाया हुआ खाना गरीब असहायों को बांटा जा रहा है। खाने के लिए पहले मेरठ के तमाम थानों के सामने सुबह और शाम को भीड़ एकत्र हो जाती थी, लेकिन अब पुलिस ने सोशल डिस्टेंस को बरकरार रखते हुए खाने के पैकेट तैयार करवाए हैं। इनको थानों की गाड़ियों में भरकर गरीबों को बांटा जाता है। मेरठ जिले के अधिकांश थानेदारों ने अपने क्षेत्रों में स्वयं ही इस प्रकार की पहल करते हुए भूखे और गरीब लोगों के लिए खाना बनवाने की शुरुआत की है।

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इन थानों में बन रहा है खाना

थानों में पुलिस की इस पहल का स्वागत जिले के संभ्रात लोगों ने किया है। साथ ही बहुत से एनजीओ पुलिस की इस मदद में आगे आए हैं। अब सामाजिक संगठनों से कच्चा राशन और बाकी समान मिल रहा है। इसकी सहायता से थानों में ही एक स्थान पर खाना बनाने का काम महिला पुलिसकर्मी और एनजीओ से जुड़ी सदस्य कर रही हैं। मेरठ के थाना सदर, लालकुर्ती, परतापुर, कोतवाली, देहली गेट, दौराला आदि में हलवाई की जगह थाने में तैनात महिला कांस्टेबलों और एनजीओ की सदस्य खाना बनाती हैं। सुबह और शाम गैस चूल्हे पर पूड़ी और सब्जी तैयार की जा रही है।

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स्टाफ में बांटे जा रहे हैं पैकेट

एसओ सदर विजय गुप्ता का कहना है कि यह सब सामाजिक संगठनों के सहयोग से हो रहा है। इस कार्य से पुलिस के काम में कोई व्यवधान नहीं उत्पन्न हो रहा। खाना बनने के बाद सर्वप्रथम गरीब और असहायों को इसका वितरण किया जाता है। बता दें कि पहले केवल महिला पुलिसकर्मी गरीबों के लिए खाना बना रही थीं लेकिन अब इस काम में एनजीओ भी आगे आए है। वे खाने—पीने का सामान भी उपलब्ध करा रहे हैं। केवल सदर थाने में ही 10—12 महिल पुलिसकर्मी खाना बनाने का काम कर रही हैं। जबकि एनजीओ की 15—20 सदस्य उनका हाथ बंटाती हैं। यह खाना थाने के स्टाफ और अन्य चौकियों पर भी भेजा जाता है।