
मिशन 2019: वेस्ट यूपी में भाजपा की राह इतनी अासान नहीं, इसीलिए गूढ़ मंत्र देने आएंगे अमित शाह
केपी त्रिपाठी, मेरठ। पहले आगरा और उसके बाद अब 11-12 अगस्त को मेरठ ...वेस्ट यूपी में भाजपा के राष्टीय अध्यक्ष अमित शाह का यह दूसरा दौरा सियासी मायने में यूं ही नहीं तय हो रहा। इसके पीछे भी बहुत बड़ा राजनीति कारण है। इसके तार सीधे गुजरात से जुड़े हुए हैं। जहां की दलित राजनीति में एक दलित युवक ने भाजपा के गुजराती वोट बैंक में जबरदस्त सेंधमारी की। अब वही दलित युवक वेस्ट यूपी में भी अपनी दलित राजनीति के बीज बो रहा है।
पश्चिम को संभाले कौन, पूरब में दिग्गजों की फौज
भाजपा के चुनावी रणनीतिकारों का मानना है कि पूरब को तो वहां के भाजपाई दिग्गज संभाल लेंगे, लेकिन चिंता वेस्ट यूपी की है जहां पर भाजपा का कोई इतना बड़ा दिग्गज कद्दावर नेता नहीं, जो इस क्षेत्र में भाजपा के पक्ष में माहौल तैयार करें। भाजपा की परेशानी का दूसरा कारण इस समय का माहौल भी है। अभी वेस्ट यूपी का माहौल थोड़ा शांत है। इसलिए हिंदू वोटों का ध्रुवीकरण होना थोड़ा मुश्किल दिखाई पड़ रहा है।
मुस्लिम मतदाता एकजुट के साथ बिखरे हुए
मुस्लिम मतदाता भी एकजुट हैं और बिखरे हुए भी हैं। एकजुट इस मायने में हैं कि उनका एक मात्र एजेंडा वेस्ट यूपी में भाजपा को हराना है और बिखरे हुए इस मायने में कि सपा-बसपा के गठबंधन और रालोद-कांग्रेस की अभी गठबंधन के साथ न जाने की स्थिति में। जिससे मुसलमान उम्मीदवार इन सभी पार्टियाें की ओर नजरें जमाए हुए हैं।
जिस ओर गया किसान उसी की नैया पार
वेस्ट यूपी के वोटों का गणित किसी मायने में पहेली से कम नहीं है। इसे आज तक यहां के दिग्गज नेता भी नहीं समझ पाए। इसी वोट की पहेली से भाजपा के दिग्गज राष्टीय अध्यक्ष अमित शाह को भी बेचैन किया हुआ है। हालांकि गन्ना भुगतान और किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य बढ़ोतरी के लाॅलीपाप से किसानाें के बीच थोड़ा बहुत संतोष जरूर है, लेकिन इस क्षेत्र के किसानों को नोटबंदी ने प्रभावित किया है और अगर गैर-जाट किसानों जैसे गुर्जर आदि ने बसपा-सपा गठबंधन की ओर रुख कर लिया तो भाजपा के लिए और बड़ी मुसीबत होगा यह क्षेत्र। इन्ही सब कारणों से भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह मेरठ में लोकसभा चुनाव की व्यूह रचना करने आ रहे हैं। यहां पर पश्चिमी यूपी के लिए विशेष रणनीति पर भी मंथन करेंगे। अमित शाह वेस्ट यूपी के लोकसभा चुनाव के रोडमैप पर भी चर्चा करेंगे।
दलित वोट भाजपा के लिए सिरदर्द
लोकसभा की चुनावी जंग को 2019 मे आसान बनाने के लिए भाजपा तमाम उपाय कर रही हैं, लेकिन पश्चिमी उत्तर प्रदेश का दलित वोट बैंक भाजपा के लिए सिरदर्द बना हुआ है। गुजरात के दलित नेता और विधायक जिग्नेश मेवाणी की वेस्ट यूपी में सक्रियता ने भाजपा को बेचैन किया हुआ है। जिग्नेश ने वेस्ट यूपी की राजनीति नब्ज को पकड़ लिया है। उन्हें ये भी पता है कि यहीं से ही प्रदेश के अन्य हिस्सों में भी राजनीतिक हार्इवे बनेगा। इस कारण से वह यहां पर गुप्त रूप से सक्रिय हैं। भीम आर्मी के संस्थापक चंद्रशेखर की रिहाई की मांग को लेकर जिग्नेश यहां की दलित राजनीति को लगातार हवा देते रहे हैं।
दलित राजनीति के केंद्र ये जिले
वेस्ट यूपी में मेरठ और सहारनपुर दलित राजनीति के बड़े केंद्र हैं। यही वे दो जिले हैं जहां से जिग्नेश दलित राजनीति को गर्मा रहे हैं। दलित राजनीति की गतिविधियों का बड़ा केंद्र बन रहा मेरठ में दलितों की अहमियत को देखते हुए सभी राजनीतिक दल उन्हें अपने खेमे में लाने की जुगत लगा रहे हैं। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ भी सामाजिक समरसता को आधार बनाकर हिंदुओं को एक करने की मुहिम के तहत दलितों को अहम स्थान दे रहा है। जबकि वेस्ट यूपी में जिग्नेश मेवाणी ने भाजपा सरकार और उसकी नीतियों के खिलाफ अगल मुहिम चलाई हुई है। जिग्नेश मेरठ में जनसभा करके दलितों की चेतना जगा चुके हैं। दूसरी ओर बसपा सुप्रीमो और पूर्व मुख्यमंत्री मायावती भी जिग्नेश की इस क्षेत्र में सक्रियता से काफी बेचैन हैं। इसलिए वे दलित खासकर जाटव वोटरों को अपने खेमे में करने की रणनीति बना रही हैं। जिसमें वे कैराना और नूरपुर के उपचुनाव के अलावा निकाय चुनाव में कामयाब भी हुई हैं। भाजपा के लिए बढ़ा खतरा बसपा की अपने खोए वोट बैंक को सहेजने की कोशिशों ने भाजपा नेतृत्व को बेचैन कर दिया है।
भीम आर्मी की बढ़ती लोकप्रियता से भाजपा को खतरा
भीम आर्मी की दलितों में बढ़ती लोकप्रियता से भी भाजपा नेताओं में खलबली मची है। जिग्नेश जिस तरह से युवा दलितों को अपने पाले में खड़ा करते जा रहे हैं तो यह भाजपा के लिए खतरे का संकेत है। खासकर सहारनपुर और मेरठ में दलितों के बीच जिग्नेश व चंद्रशेखर की लोकप्रियता भाजपा के लिए परेशानी पैदा कर रही है। यह दोनों ही जिले भाजपा के गढ़ हैं और पूर्व में बसपा यहां सियासी ताकत में रह चुकी है।
वेस्ट यूपी बनाता रहा है माहौल
चुनाव चाहे लोकसभा 2014 का रहा हो या फिर विधानसभा 2017 का। वेस्ट यूपी से ही राजनीतिक दलों का माहौल बनता बिगड़ता रहा है। इन दोनों चुनाव में वेस्ट यूपी से ही भाजपा के पक्ष में माहौल बना था। जिसका लाभ पार्टी ने प्रदेश के अन्य क्षेत्रों में जमकर उठाया था।
Published on:
21 Jul 2018 02:55 pm
बड़ी खबरें
View Allमेरठ
उत्तर प्रदेश
ट्रेंडिंग
