
देवबंद के फतवे का इस मुस्लिम महिला ने किया विरोध, गाया वंदेमातरम गान, देखें वीडियो
मेरठ। 26 जनवरी को लेकर देवबंद की ओर से मुस्लिमों को जो फतवा जारी किया गया है उस पर राजनीतिक बहस छिड़ गई हैं। वहीं मुस्लिम लोगों ने भी इस फतवे को मानने से मना कर दिया है। मेरठ में देवबंद से जारी इस फतवे का विरोध मुस्लिम समाज कर रहे हैं, जिसमें देवबंद स्थित दारूल उलूम ने कहा कि 26 जनवरी के दिन कोई भी मुस्लिम वंदे मातरम गान और भारत माता की जय नहीं कहेगा। किसी भी मदरसे में वंदे मातरम गान नहीं गाया जाएगा, सिर्फ मदरसे में राष्ट्रीय ध्वज फहराया जाएगा।
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मेरठ में मुस्लिम राष्ट्रीय मंच की राष्ट्रीय सहसंयोजिका एडवोकेट शाहीन परवेज ने इस फतवे का विरोध किया है। उन्होंने कहा कि आजकल का मुस्लिम समाज पढा-लिखा है। वह ऐसे फतवों को नहीं मानता। उन्होंने कहा कि हम मुस्लिम देश से प्यार करते हैं अपने वतन से प्यार करते हैं। फिर ऐसे फतवों की आजकल मुस्लिम समाज को कहां जरूरत है। उन्होंने इन फतवों को राजनीति से प्रेरित बताया है। उनका कहना है कि हमारे मजहब में सिखाया गया है कि हम अपने मुल्क से प्यार करें उससे देश भक्ति रखें। उन्होंने कहा कि ऐसा किस मजहब में लिखा है कि मुल्क से प्यार न करें या फिर मुल्क उन गीतों को न गाए जिनमें देशभक्ति की बाते हों।
उन्होंने कहा कि फतवे जारी करने का मतलब यह नहीं कि मुस्लिम समाज उसको मानें भी। उन्होंने कहा कि फतवा मानना जरूरी नहीं होता। जिसका मन हो मानें और जिसका मन न हो न मानें। उन्होंने कहा कि वे 26 जनवरी पर वंदे मातरम गान करेंगी और भारत माता की जय भी बोलेगी। इस दौरान उन्होंने वंदे मातरम गीत भी गाया। उन्होंने कहा कि मुस्लिम भाइयों और बहनों ने भी आजादी की लड़ाई में अपना पूरा योगदान दिया है। उनके योगदान को भुलाया नहीं जा सकता, लेकिन कुछ मौकापरस्त लोग हिन्दू और मुस्लिमों के बीच मजहबी दीवार खींचना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि वे ऐसे लोगों को बता देना चाहती हैं कि मुस्लिम युवा पीढ़ी ऐसे फतवों को हवा में उड़ाती है। वे इन दकियानूसी बातों में आने वाली नहीं है।
Published on:
26 Jan 2019 07:55 am
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