
फोटो- सबा उर्फ नाजिया
UP News: उत्तर प्रदेश के मेरठ में लंबे समय से रह रही पाकिस्तानी नागरिक सबा फरहत को पुलिस ने गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। देहली गेट के कोठी अतानस निवासी रुखसाना की तहरीर पर देहली गेट थाने पर रिपोर्ट दर्ज की गई थी। सबा पर आरोप है कि भारत में रहते हुए फर्जी दस्तावेजों के सहारे दो अलग-अलग नामों (सबा मसूद और नाजिया मसूद) से वोटर आईडी कार्ड बनवाए थे। रुखसाना की शिकायत के मुताबिक वह अवैध रूप से भारत में रह रही थी।
सबा उर्फ नाजिया की जमानत याचिका पर बुधवार को सीजेएम कोर्ट में सुनवाई हुई। अभियोजन पक्ष और आरोपी पक्ष के वकीलों में जंमानत याचिका पर बहस हुई। अभियोजन पक्ष ने पाकिस्तानी नागरिक होने व दो अलग नाम से वोटर कार्ड बनवाने की दलील देकर जमानत का विरोध किया। इसके बाद कोर्ट ने जमानत याचिका खारिज करते हुए उसे 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा है। हालांकि पुलिस जांच में यह साफ हुआ कि उसके पास 2032 तक का पाकिस्तानी पासपोर्ट और 2027 तक का लॉन्ग टर्म वीजा है, इसलिए उस पर अवैध निवास का आरोप हटा दिया गया है।
सबा फरहत की गिरफ्तारी के बाद अब उसकी बेटी एमन फरहत भी जांच के दायरे में आ गई है। जानकारी के अनुसार सबा के पति फरहत मसूद ने 1988 में पाकिस्तान जाकर निकाह किया था। आरोप है कि उनकी चौथी बेटी एमन का जन्म 25 मई 1993 को पाकिस्तान के लाहौर में हुआ था। भारत वापसी के समय सबा ने अपने पाकिस्तानी पासपोर्ट पर एमन की एंट्री कराई थी। अब सवाल यह उठ रहा है कि क्या एमन ने कभी भारतीय नागरिकता हासिल की? शिकायतकर्ता रुखसाना का आरोप है कि एमन आज भी तकनीकी रूप से पाकिस्तानी नागरिक हैं और उसने फर्जी कागजात के आधार पर भारतीय पासपोर्ट बनवाया है।
मेरठ में वकालत कर रही एमन फरहत खुद को पूरी तरह निर्दोष बता रही है। उसका कहना है कि उसने भारत के प्रतिष्ठित स्कूलों से पढ़ाई की और विधि (Law) की डिग्री ली है। उसका कहना है कि अगर वह भारत की नागरिक नहीं होती तो उन्हें वकालत का लाइसेंस कैसे मिलता? फिलहाल पुलिस को कोई ठोस सबूत नहीं मिला है लेकिन पुलिस अब उस जन्म प्रमाण पत्र की तलाश कर रही है जो स्कूल में दाखिले के समय इस्तेमाल किया गया था।
मेरठ के एसपी सिटी आयुष विक्रम सिंह का कहना है कि पुलिस एमन के बचपन के तमाम दस्तावेजों को खंगाल रही है। जांच इस बिंदु पर टिकी है कि स्कूल में प्रवेश के दौरान जो कागजात लगाए गए वे फर्जी थे या नहीं। यदि कोई भी दस्तावेज फर्जी पाया जाता है तो यह पता लगाया जाएगा कि उन्हें किसने बनवाया था। वहीं दूसरी ओर सबा के वकील वीके शर्मा का कहना है कि यह पूरा मामला वक्फ संपत्ति के विवाद के कारण दर्ज कराया गया है।
Published on:
19 Feb 2026 09:01 pm
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