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Patrika Exclusive: मेरठ के इस पुलिस अफसर ने अपने ही आदेश में कठुआ दुष्कर्म पीड़िता का नाम कर दिया उजागर

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद मेरठ के एसपी सिटी मान सिंह चौहान के आदेश में दो बार कठुआ दुष्कर्म पीड़िता का नाम

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केपी त्रिपाठी, मेरठ। सुप्रीम कोर्ट के सख्त आदेश के बावजूद भी दुष्कर्म पीड़िता का नाम उजागर करने में प्रतिबंध नहीं लग रहा है। खुद अधिकारी सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश की धज्जियां उड़ाने में लगे हैं। ऐसा ही एक मामला मेरठ में सामने आया है। जब मेरठ के एसपी सिटी मान सिंह चौहान ने अपने नाम से अपने अधीनस्थ सभी पुलिस अधिकारियों को आदेशा जारी किया। हद तो तब हो गई जब इस आदेश में कठुआ दुष्कर्म पीड़िता का नाम ही एसपी सिटी ने उजागर कर दिया।

एसपी सिटी ने दिनांक 19 अप्रैल 2018 पत्रांक -आर-एसपीसी- 30/2018 जारी आदेश में कहा है कि प्राप्त सूचना के अनुसार दिनांक 20 अप्रैल 2018 को शुक्रवार होने के कारण मुस्लिम समुदाय द्वारा समय 12.30 बजे से 14.30 के मध्य जुमे की नमाज जामा मस्जिद के अलावा अन्य मस्जिदों में पढ़ी जाएगी। जम्मू एंड कश्मीर के कठुआ में नाबालिग बच्ची (रेप पीड़िता का नाम) के साथ हुई दुष्कर्म की घटना को लेकर मस्जिदों के इमाम और धर्म गुरूओं द्वारा जुमे की नमाज के दौरान तकरीर कर ज्ञापन देने का निर्णय लिया जा सकता है। एसपी सिटी के इस आदेश में कठुआ दुष्कर्म पीड़िता का नाम दो बार उजागर किया गया है।

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कानूनी कार्रवाई करने वाले ही उजागर कर रहे

सुप्रीम कोर्ट के सख्त आदेश है कि जो भी दुष्कर्म पीड़िता या उसके मां-बाप और उसका पता का नाम उजागर करता है उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई करनी चाहिए। स्थानीय पुलिस को उसके खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ऐस करने वाले के खिलाफ कठोर दंडात्मक कार्रवाई का अधिकार है, लेकिन जब स्थानीय पुलिस के अधिकारी ही दुष्कर्म पीड़िता का नाम उजागर कर रहे हैं तो दूसरों पर वे कार्रवाई कैसे कर सकते हैं। कठुआ कांड की पीड़िता का नाम उजागर करने के आरोप में करीब दस मीडिया संस्थानों के ऊपर कोर्ट भारी-भरकम जुर्माना लगा चुकी है।

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एसपी सिटी का कहना है

एसपी सिटी मान सिंह चौहान ने अपने इस आदेश के बारे में कहा कि यह विभागीय त्रुटि रही है। इसका आगे से ध्यान रखा जाएगा।

आर्इजी ने यह कहा

आईजी रामकुमार से जब 'पत्रिका' ने इस बारे में जानकारी की तो उनका कहना था इस बारे में एसपी सिटी से पूछा जाएगा। वैसे यह तो सभी को पता है कि दुष्कर्म पीड़िता का नाम उजागर नहीं किया जा सकता, लेकिन उन्होंने ऐसा क्यों किया, यह पूछा जाएगा।

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सीनियर अधिवक्ता बोले

सीनियर अधिवक्ता प्रबोध कुमार शर्मा ने कहा कि कोर्ट आैर पुलिस की प्रोसीडिंग में पीड़िता का मूल नाम ही जाता है, बशर्ते कि यह आम लोगों में हार्इलाइट न हो।