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कवाल कांड से बदले खतौली सीट के राजनीतिक समीकरण,गठबंधन साध रहा मुस्लिम,दलित समीकरण

खतौली उपचुनाव के माध्यम से सपा—रालोद गठबंधन मदन भैया को मैदान में उतारकर मुस्लिम,दलित और गुर्जर को साधने की कोशिश कर रहा है। कवाल कांड के बाद से खतौली विधानसभा सीट के समीकरण बदले हैं। 2017 के विधानसभा चुनाव से पहले खतौली सीट रालोद की परंपरागत सीट रही थी।

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मेरठ

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Kamta Tripathi

Nov 14, 2022

कवाल कांड से बदले खतौली सीट के राजनीतिक समीकरण,गठबंधन साध रहा मुस्लिम,दलित समीकरण

खतौली विधानसभा उपचुनाव में सपा-रालोद गठबंधन प्रत्याशी मदन भैया समर्थकों से मिलते हुए

खतौली विधानसभा उपचुनाव रालोद के लिए गुर्जर,मुस्लिम और दलित वोटों के समीकरण साधने का मौका है। इसी कारण से रालोद ने खतौली उपचुनाव में गुर्जर नेता मदन भैया ने टिकट दिया है।


बता दें कि खतौली विधानसभा सीट से 2022 के विधानसभा चुनाव से पहले गुर्जर नेता करतार सिंह भड़ाना ने चुनाव जीता था। कवाल कांड ने खतौली सीट के समीकरण पूरी तरह बदले और उसके बाद भाजपा के निवर्तमान विधायक विक्रम सैनी ने खतौली से जिले की सबसे बड़ी जीत दर्ज की। अब एक बार फिर उपचुनाव के माध्यम से रालोद को मौका मिला और इस सीट पर गुर्जर प्रत्याशी उतारा है। खतौली विधानसभा सीट से सटी मीरापुर विधानसभा सीट पर गठबंधन से गुर्जर नेता चंदन चौहान विधायक है।

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खतौली विधानसभा उपचुनाव को लेकर सियासी सरगर्मियां तेज हैं। रालोद ने उपचुनाव में अपने पत्ते खोल दिए हैं। जिसमें गुर्जर प्रत्याशी पर दांव खेलते हुए बागपत की खेकड़ा सीट से तीन बार के पूर्व विधायक बहुचर्चित मदन भैया को मैदान में उतारा दिया है।


सियासी अटकलों के बीच हालांकि भाजपा ने अभी अपने पत्ते नहीं खोले है। लेकिन कयास लगाए जा रहे हैं कि विक्रम सैनी की पत्नी को भाजपा खतौली विधानसभा उपचुनाव में उतारकर एक बार फिर से खतौली विधानसभा पर कवाल के बवाल पर दांव लगा सकती है। बता दें कि इससे पहले मदन भैया लोनी सीट से चुनाव लड़ते रहे हैं। लेकिन उन्हें हार का सामना करना पड़ा था। रालोद जिलाध्यक्ष संदीप मलिक का कहना है कि मदन भैया के प्रत्याशी बनाए जाने के बाद सपा-रालोद गठबंधन अब पूरी ताकत के साथ चुनाव लड़ेगा। खतौली उप चुनाव में भाजपा को हराने का काम किया जाएगा।

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हालांकि मदन भैया लोनी में अब तक तीन विधानसभा चुनाव हार चुके है। रालोद के माध्यम से वो नई सियासी जमीन की तलाश कर रहे हैं। ऐसे में उपचुनाव मदन भैया के लिए एक मौका है। देखना है कि वह खतौली विधानसभा उपचुनाव में कितना दमखम दिखा पाते हैं।


खतौली में मतदाताओं की बात करें तो इस सीट पर करीब 1 लाख मुस्लिम मतदाता हैं जो किसी भी चुनाव में हेरफेर करने की ताकत रखते हैं। 2022 के विधानसभा चुनाव में मुस्लिम मतदाता पश्चिमी उप्र में करवट बदली तो कई सीटों पर रालोद को जीत दिलवाई। जिससे भाजपा को बड़ा नुकसान हुआ। भाजपा के चर्चित चेहरे सुरेश राणा, फायरब्रांड संगीत सोम और बुढ़ाना से विधायक रहे उमेश मलिक भी चुनाव हार गए। रालोद ने एक बार फिर से गठबंधन के दम पर खतौली उपचुनाव में भाजपा को घेरने की कोशिश की है।