
मेरठ में दशहरा पर राम-रावण युद्ध से पहले शहर में रथ पर सवार भगवान श्रीराम।
Meerut: मेरठ में दशहरा के दिन दर्जनों स्थान पर रावण दहन कार्यक्रम आयोजित हुआ। श्री सनातन धर्म रक्षिणी सभा पंजीकृत मेरठ शहर के तत्वधान में श्री रामलीला कमेटी पंजीकृत मेरठ शहर द्वारा दिल्ली रोड स्थित रामलीला मैदान में श्री रामलीला मंचन के बाद दशहरा पर राम-रावण युद्ध लीला मंचन व विशालकाय दशानन दहन किया गया।
भगवान श्री रामदल व रावण सेना युद्ध के लिए रथ पर सवार होकर बैंड बाजे के साथ दिल्ली गेट चौक स्थित नीलकंठ महादेव मंदिर से ब्रह्मपुरी, इंदिरा नगर से होते हुए बहादुर मोटर्स के सामने से रामलीला मैदान दिल्ली रोड पहुंचे।
एक ओर अस्त्र-शस्त्रों से सुसज्जित रावण की असुर सेना, दूसरी ओर चट्टान उठाये भगवान राम की वानर सेना
सभी उपस्थित पदाधिकारियों ने पूजा अर्चना की। श्रद्धालुओं की मांग पर श्री राम लीला कमेटी ने इस वर्ष प्रथम बार सम्पूर्ण श्री राम लीला मंचन श्री राम के जन्म से लेकर रावण वध तक रामलीला मैदान दिल्ली मार्ग पर किया गया। हजारों की संख्या में श्रद्धालु ने बच्चों सहित सम्पूर्ण श्री रामलीला आयोजन देख धर्म लाभ लिया।
अधर्म के विरुद्ध धर्म, असत्य के विरुद्ध सत्य, अन्याय के विरुद्ध न्याय आज अपनी चुनौती लेकर खड़ा था| दोनों ही पक्षों के वीर, अपनी पूरी शक्ति के साथ सुसज्जित खड़े थे| एक ओर अस्त्र-शस्त्रों से सुसज्जित रावण की असुर सेना, दूसरी ओर वृक्ष, चट्टान आदि उठाये भगवान राम की वानर और रीछों की सेना थी।
एक ओर रावण अस्त्र-शस्त्रों से लदे अपने विशाल रथ पर सवार चला आ रहा था, दूसरी ओर भगवान राम धरती पर नंगे पाँव खड़े थे। यह देखकर भगवान राम के प्रति अपने प्रेम से अधीर होकर विभीषण जी कहते हैं, “हे नाथ! न आपके पास रथ है, ना ही आपके पैरों में खडाऊ तक हैं। रावण जैसे बलवान वीर से आप किस प्रकार जीत सकेंगे?”
जीवन-रण के विजय-रथ में शौर्य और धैर्य रुपी दो पहिये
भगवान राम मुस्कराते हुए कहते हैं , “सुनो मित्र! जिस रथ से विजय होती है, वह रथ ऐसा होता है..”
जीवन-रण के विजय-रथ में शौर्य और धैर्य रुपी दो पहिये होते हैं।
रणभूमि में रथ पर सवार रथी की पहचान के लिए रथ पर ध्वज और पताका (ध्वज के नीचे उससे थोड़े छोटे ध्वज को पताका कहते हैं) होते हैं। जब तक ध्वज और पताका रणभूमि में दिखती रहती है, रथी सकुशल माना जाता है|
जीवन के रण में विजय दिलाने वाले इस रथ के चार घोड़े हैं: बल, विवेक, दम और परहित यानी दूसरों की भलाई करना।
भगवान राम बताते हैं कि दंड देने का बल होने पर भी क्षमा और दया की संभावना हमेशा बनाये रखनी चाहिए।
राम और रावण के बीच युद्ध मे रावण का वध होता है।
रावण के वध के साथ प्रदूषण जैसी बुराइयों का प्रतीक जलाया जाता है
रावण के वध के साथ रोग, अपराध ,भ्रष्टाचार, गंदगी, लोभ, लालच, महिला उत्पीड़न, आज के दृष्टिकोण से मिलावट खोरी, टूटी सड़कें, सिल्ट से भरे नाले, अवैध निर्माण, अतिक्रमण, जाम, प्रदूषण जैसी बुराइयों का प्रतीक रावण को मानकर उसको जलाया जाता है और बुराइयों का अंत होता है। मंचन देखने आई हजारों की संख्या में भक्त जनों की भीड़ इस लीला मंचन का आनंद लेती है और मेले में लगी अस्थाई खाने में खिलौनों की दुकानों में खरीदारी करती है।
120 फुट ऊँचे रावण दहन किया गया। रावण दहन के पश्चात 2 घंटे से अधिक समय तक आतिशबाजी होती रही। आसमान में रंग-बिरंगे पटाखों की रोशनी से संपूर्ण मेरठ शहर जगमगा गया, 10,000 पटाखों वाली लड़ी का भरपूर आनंद वहां मौजूद बच्चों व जनता ने उठाया।
संपूर्ण लीला मंचन के लिए संस्था पदाधिकारियों व कलाकारों का उत्साहवर्धन
संपूर्ण लीला मंचन के लिए संस्था पदाधिकारियों व कलाकारों का उत्साहवर्धन कैंट विधायक अमित अग्रवाल द्वारा किया गया। लीला मंचन का विश्राम मनीष प्रताप द्वारा किया गया।
जिमखाना मैदान बुढ़ाना गेट मेरठ शहर व रामलीला मैदान के संपूर्ण मंचन की मुख्य भूमिका में कमल दत्त शर्मा जी रहे जिनके सहयोग से इस लीला मंचन का मेरठ की जनता में उत्साह भरा रहा।
कार्यक्रम का संचालन राकेश शर्मा ने किया , स्थल पर संस्था अध्यक्ष मनोज गुप्ता , महामंत्री मनोज अग्रवाल , कोषाध्यक्ष योगेंद्र अग्रवाल बबलू, रोहताश प्रजापति, अम्बुज गुप्ता, राकेश गर्ग और विपुल सिंघल सहित हजारों की संख्या में भक्तगण मौजूद रहे।
Published on:
25 Oct 2023 08:48 am

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