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शव यात्रा में रोने की जगह ढोल की थाप पर जमकर थिरके परिजन, देखें वीडियो

परिवार के बुजुर्ग की मौत पर घर के लोगों ने खूब किया डांस और जमकर की आतिशबाजी

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मेरठ

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Iftekhar Ahmed

Dec 19, 2017

funeral procession

मेरठ. मेरठ के परतापुर क्षेत्र के गांव रिठानी में 120 साल की बुद्धो की मौत पर परिजनों ने आंसू बहाने के बजाए ढोल की थाप पर जमकर डांस किया। उनकी शव यात्रा में लोगों ने डांस करने के साथ ही जमकर आतिशबाजी भी की। बैंड-बाजे के साथ डांस करते हुए लोग श्मशान तक पहुंचे और उनका अंतिम संस्कार किया। गांव में हर कोर्इ यह देखकर अचंभित था और इस शव यात्रा को उत्सव की तरह मनाए जाने की वजह भी पूछ रहा था। उसके बाद वह भी इस यात्रा खुशी-खुशी शामिल हो रहे थे।

गमजदा नहीं हर्षोल्लास मना रहे थे परिजन
आमतौर पर जब किसी के परिवार में मृत्यु हाेती है तो परिवार का माहौल गमजदा हो जाता। परतापुर में सामने आए इस अनोखे मामले ने सभी को हैरत में डाल दिया है, क्योंकि जनपद में एेसी घटना पहले कभी देखने को नहीं मिली, क्योंकि वृद्धा की शव यात्रा में परिजनों ने ढोल की थाप पर न सिर्फ डांस किया, बल्कि इस मौके पर जमकर आतिशबाजी भी की। रिठानी गांव में 120 साल की महिला बुद्धो अपने भरे-पूरे परिवार के साथ रह रही थी। परिवार में 30 से 40 सदस्य हैं। बुद्धो की सोमवार की देर रात लंबी बीमारी के चलते मौत हो गई। बुद्धो अपने जीते जी अपने परिवार के सभी सदस्यों को सिर्फ एक बात कहती रहती थी कि उसकी मृत्यु के बाद परिवार का कोई भी सदस्य रोए नहीं और न ही घर में कोई गमगीन मौहाल हो। इसके अलावा उसकी अंतिम यात्रा खूब धूमधाम से साथ निकाली जाए। इसके पीछे बुद्धो का तर्क था कि ये सब भगवान का दिया हुआ है और एक दिन हर किसी को भगवान के पास जाना है। ऐसे में जब भी विदाई हो, तो खुशी के साथ होनी चाहिए। बुद्धो के पड़पौते का कहना है कि दादी की शव यात्रा धूमधाम से निकाली गई है। मरने से पहले उनकी ऐसी ही इच्छा थी।

नोएडा में भी दिखा था ऐसा ही माहौल
इसी वर्ष 12 नवंबर को गुटका किंग 64 वर्षीय हरिभार्इ लालवानी की मृत्यु हुर्इ थी तो उनकी शव यात्रा में उनकी चारों बेटियों ने उन्हें न सिर्फ कंधा दिया, बल्कि उनकी शव यात्रा में जमकर डांस भी किया। इस खबर को पढ़ और सुनकर सभी अचंभित थे और हैरतभरी नजरों से यह सब देख रहे थे। उनकी बेटियों ने बताया कि था कि उनके पिता की यही इच्छा थी कि जब उनकी मृत्यु हो, तो कोर्इ रोए नहीं, बल्कि जिस तरह बच्चे के जन्म पर सब खुश होते हैं, उसी तरह वे भी खुशी-खुशी उन्हें अंतिम विदार्इ दें । उनकी मृत्यु को उत्सव की तरह मनाया जाए। इसलिए बेटियों ने बैंडबाजे के साथ डांस करते हुए गुटका किंग अंतिम विदार्इ दी थी।