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अपने यार से बिछड़ कर जी नहीं सकता सारस, पढ़ें सारस की रोचक खूबियां

आरिफ़ और सारस की दोस्ती तो आपने जरूर सुनी होगी। लेकिन क्या आपको पता है सारस अपने दोस्त से बिछड़ कर जी नहीं पाता। पढ़ें सारस की खूबियां

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मेरठ

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Aniket Gupta

Mar 25, 2023

Sarus

सारस की खूबियां

आरिफ़ और सारस की दोस्ती की कहानी तो आपलोगों ने सुनी ही होगी। इस घटना के बाद सोशल मीडिया पर सारस खूब चर्चा में आया। तो क्या आपको पता है कि सारस एक ऐसा पक्षी है जिसे पेड़ों पर घर बना कर रहना पसंद नहीं ? क्या आप सारस पक्षी की खूबियों के बारे में जानते हैं ? क्या आपको पता है कि यूपी के मेरठ में एक ऐसा क्षेत्र है जहां हर साल विदेशी प्रवासी पक्षियों का डेरा जमता है। जी हाँ, मेरठ के हस्तिनापुर सेंचुरी का वेटलैंड क्षेत्र देश के बाहर से आने वाले विदेशी प्रवासी पक्षियों को खूब रास आता है। यहाँ का वातावरण उन्हें अनुकूल लगता है और हर साल सात समुंदर पार कर वे पक्षियाँ हमारे धरती पर आने को मजबूर हो जाती हैं।

सारस को पसंद है यहाँ का वातावरण
आपको बता दें कि आज कल सोशल मीडिया पर चर्चित पक्षी सारस को भी यहाँ का वातावरण काफी पसंद है। यहाँ उन्हें मनपसंद खाना मिल जाता है और साथ ही वह यहाँ अपना कुनबा भी बढ़ा लेते हैं। जब ये प्रवासी पक्षी वेटलैंड क्षेत्र पहुँच अठखेलियाँ करते हैं, यह लोगों को काफी पसंद आता है। जब आप इस सेंचुरी मे आएंगे आपको यहाँ जगह जगह सारस के कई जोड़े अठखेलियां करते नजर आ सकते हैं। सारस का यह मनोरम दृश्य आपको जरूर पसंद आएगा साथ ही आप उन्हें अठखेलियाँ करते देख मंत्रमुग्ध हो जाएंगे।

जोड़े में रहना पसंद करता है सारस
आपको बता दें कि सारस पक्षी को प्रदेश में राज्य पक्षी का दर्जा दिया गया है। और आपको यह जान कर हैरानी होगी कि सारस हमेशा परिवार में रहना पसंद करता है और यह जोड़े में रह कर अपना परिवार बढ़ाते हैं। वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार सारस प्रजाति में एक दूसरे के प्रति अटूट प्रेम होता है। सारस पक्षी की एक और खास बात है कि वह उड़ने वाले पक्षियों के उन प्रजाति मे शामिल है जो कभी पेड़ पर अपना घर नहीं बनाते। आइए अब हम सारस से जुड़े कुछ खास और रोचक जानकारियाँ आपको देते हैं।

साथी से जुदा होने पर दम तोड़ देते हैं सारस
आप यह जानकर हैरान रह जाएंगे कि जोड़े में रह रहे सारस में से अगर किसी कारण एक की भी मृत्यु हो जाती है तो दूसरा सारस भी साथी के वियोग में दुनिया को अलविदा कह देता है। वन विभाग के अधिकारियों और जानकारों का कहना है कि यहाँ के अनुकूल वातावरण और खुद को सुरक्षित महसूस करने के चलते यह पक्षी हमारे प्रदेश में आना पसंद करता है और यहाँ आकार अपना कुनबा भी बढ़ाता है। आपको बता दें कि सारस पोखर, तालाब और झीलों के किनारे दलदली जमीन के पास और खेती वाले जगह को अपना ठिकाना बनाते हैं और खेतों में पैदा हुए कीड़े मकौड़े उसके भोजन होते हैं। और इसी वजह से सारस को किसानों का दोस्त कहा जाता है।

2 माह में आसमान छूने को तैयार हो जाता है सारस
सारस पक्षी मुख्य रूप से भौगोलिक क्षेत्र में निवास करते हैं। आपको बता दें कि मादा सारस एक बार में दो से तीन अंडे देती है और लगभग एक महीने तक उस अंडे को पालती है तब जाकर शिशु चूजों के रूप में अंडे से बाहर आते हैं। यह सारस के बच्चें काफी तेजी से बड़े होने लगते हैं और करीब 2 माह में उड़ने को तैयार हो जाते हैं।

18 साल तक का होता है सारस का जीवन
आपको बता दें कि सारस का औसत भार 8 से 10 किलोग्राम का होता है और लंबाई की बात की जाए तो लगभग 5 से साढ़े पाँच फुट तक हो सकती है। और सारस को धरती के सबसे बड़े उड़ने वाले पक्षी का दर्जा भी दिया गया है। अगर आप जोड़े में भी सारस को देखते हैं तो आप आसानी से नर और मादा की पहचान कर सकते हैं। ज्यादातर मादा सारस कद में नर सारस से छोटी होती है। पूरी दुनिया में सारस के कुल 8 प्रजाति पाई जाती है जिसमे 4 अपने देश भारत में है। आपको यह जानकर हैरानी होगी कि सारस का जीवन 18 साल तक का हो सकता है। रात के समय सारस अपने परिवार के साथ या तो दलदल के टीले या पेड़ के नीचे आराम करते दिख जाते हैं।