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तो यह था भाजपा प्रदेश कार्यसमिति की बैठक का गुप्त एजेंडा, सुनकर दंग रह जाएंगे आप

पार्टी के शीर्ष नेताआें ने कार्यकर्ताआें में भरा जोश

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तो यह था भाजपा कार्यसमिति की बैठक का गुप्त एजेंडा, सुनकर दंग रह जाएंगे आप

मेरठ। क्रांतिधरा मेरठ में भाजपा की दो दिवसीय प्रदेश कार्यसमिति की बैठक में मंत्र भले ही 2019 का दिया गया हो। मीडिया में कई दिन से यह सुर्खिया बनता रहा कि इस बैठक का उद्देश्य दलित और पिछड़ों को साधना रहा है, लेकिन राजनैतिक जानकारी और भाजपा के पुराने नेताओं की मानें तो प्रदेश की इस कार्यसमिति की बैठक का उद्देश्य मात्र कार्यकर्ताओं, विधायकों, सांसदों और मंत्रियों के बीच गहरी हो रही खाई को भरना था।

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कार्यसमिति की बैठक में गड़बड़ी का तोड़ तलाशा

प्रदेश में सरकार होने के बाद भी भाजपा 'थिंक टैंक' की योजनाएं परवान नहीं चढ़ पा रही थी। अब इसी गड़बड़ी का तोड़ ढूंढ़ने के लिए भाजपा ने कार्यसमिति की बैठक में कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों के मन की थाह ली। बैठक में राष्ट्रीय अध्यक्ष के सामने यह बात भी दबी जुबान में सामने आई कि राज्य में सरकार होने के बावजूद कार्यकर्ताओं की सुनवाई नहीं हो रही, न उनकी बड़े नेता सुनते हैं और न ही प्रशासनिक अधिकारी उनको तवज्जो दे रहे हैं। विगत दिनों मुरादाबाद में हुई एक बैठक में कुछ सांसदों और विधायकों ने इस बात पर बकायदा नाराजगी भी जताई थी। उन्होंने कहा था कि प्रदेश के अधिकारी तो दूर जिले के अधिकारी भी उनकी नहीं सुन रहे। सरकार का इकबाल जिले के अधिकारियों के स्तर तक प्रभाव डाल नहीं पा रहा है, इसके कारण भी कार्यकर्ताओं में निराशा और असहाय होने की प्रवृति बढ़ रही है। बैठक में राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह के अलावा अन्य भाजपाई दिग्गजों ने भी कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों में उत्साह भरने में कोई कसर नहीं छोड़ी।

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यहां तो कोई किसी से संतुष्ट ही नहीं

भाजपा के पूर्व विधायक ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि बैठक के परिणाम सकारात्मक होंगे, अब इस बात की उम्मीद की जा सकती है। लेकिन इससे पहले तो एक बात तय थी कि पार्टी के भीतर ‘कार्यकर्ता अपने नेता से संतुष्ट नहीं थे। नेता अपने विधायक से संतुष्ट नहीं थे। विधायक मंत्री से। यानी हर कोई किसी न किसी से असंतुष्ट। उनका मानना है कि इसी असंतोष का खामियाजा पार्टी को लगातार पराजय के तौर पर भुगतना पड़ रहा था।

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मुख्यमंत्री ईमानदार तो भ्रष्टाचार पर लगाम क्यों नहीं

भाजपा के असंतुष्ट कार्यकर्ताओं में छटपटाहट इस बात को लेकर भी दिख रही थी कि जब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की ईमानदारी के बाद भी प्रदेश में भ्रष्टाचार पर लगाम नहीं लग पा रही है। मुख्यमंत्री ने शुरू में जो तेजी दिखाने की कोशिश की थी, उस तेजी पर अब अफसरशाही ने पूरा शिकंजा कस दिया है। सरकारी योजनाओं में अधिकारियों के भ्रष्टाचार के मामले अब खुल कर सामने आने लगे हैं। साथ ही पार्टी संगठन और कुछ मंत्रियों पर भ्रष्टाचार का ग्रहण लगने लगा है। अवैध कमाई में विधायकों की हिस्सेदारी के आॅडियो वायरल होने लगे हैं। मेरठ में एक जमीनी ठेके को लेकर दो विधायक खुद आमने-सामने आ चुके हैं।

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