
मेरठ। 'अशिक्षा का दंश और आरोपों की गर्मी से झुलस रहे मुस्लिम समाज की औरतों के लिए तालीम हासिल करने का फतवा बहुत जरूरी है। जिससे औरतें अपने उन अधिकारों को पा सकती है, जिसकी वे हकदार हैं और अपने परिवार को सभ्य बनाने व मुल्क को मजबूती के साथ अपने मुकाम पर पहुंचाने में अहम किरदार निभा सकेंगी।' ये बातें वरिष्ठ वक्ता शाहीन परवेज ने कही। छीपी टैंक पर मुस्लिम महिलाओं की विचार गोष्ठी में सैकड़ों मुस्लिम महिलाओं ने शिरकत की।
इस कार्यक्रम में इस्लाम में 'महिलाओं की इज्जत और उसके सम्मान की बात' पर मुस्लिम वक्ताओं ने अपने विचार रखे। वक्ताओं ने कहा कि जिस तरह से औरतों पर जुल्मों सितम का सिलसिला बढ़ता जा रहा है उससे तो साफ जाहिर होता है कि न तो हम कुरान की तालीम का सही इस्तेमाल कर रहे हैं और न ही उसमें लिखी बातों पर अमल कर रहे हैं। हमें पता होना चाहिए कि कुरान एक ऐसा जरिया है, जिसने औरतों के सम्मान और उसकी इज्जत का जिक्र सबसे पहले किया है। इसमें औरतों को पुरूषों के बराबर का दर्जा दिया है और दुनिया में औरत की इज्जत व एहतराम का सबक इस्लाम ही नहीं बल्कि सभी धर्मों में है। उन्होंने कहा कि इस्लाम ने ही पहली बार इंसानियत को औरतों की अजमत से वाकिफ कराया था। दुनिया को सबक दिया कि लड़के और लड़कियों की परवरिश में भेदभाव न करें। लड़कियों को भी उतनी ही तालीम दे जितना लड़कों को दी जाती है।
वक्ता शबीना ने महिलाओं को संबोधित करते हुए कहा कि मां के कदमों के नीचे जन्नत होती है। इस्लाम महिलाओं को इज्जत की निगाह से देखने के लिए कहता है फिर क्यों बार-बार फतवा जारी करके हम उनके आत्मसम्मान को ठेस पहुंचाते हैं और उनकी तरक्की में रूकावट बनते हैं। शायद इस्लाम में इतनी पाबंदियां नहीं बताई गई होंगी, जितनी आज फतवे की शक्ल में हर दिन जारी कर दी जाती हैं। मुस्लिम समाज के सामाजिक कामकाज को लेकर फतवे दिए जाते हैं, लेकिन ये फतवे अनपढ़ मुस्लिमों की तरक्की में न सिर्फ रूकावट पैदा करते हैं बल्कि आम मुसलमानों को मुल्क की मुख्यधारा में शामिल होने और सौहार्द कायम करने में बाधक साबित हुआ है।
Published on:
20 Feb 2020 01:55 pm
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