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इंदिरा गांधी का जमाना देेखने के बाद प्रियंका को लेकर इस वरिष्ठ नेता ने कह दी इतनी बड़ी बात, देखें वीडियो

कांग्रेस की महासचिव बनाए जाने के बाद पार्टी नेताआें व कार्यकर्ताआें में जबरदस्त उत्साह  

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इंदिरा गांधी का जमाना देेखने के बाद प्रियंका को लेकर इस वरिष्ठ नेता कह दी इतनी बड़ी बात, देखें वीडियो

केपी त्रिपाठी, मेरठ। प्रियंका गांधी की नई ताजपोशी के बाद से प्रदेश के राजनैतिक समीकरण बदल रहे हैं। प्रियंका गांधी में दादी इंदिरा का चेहरा देख रहे हैं। वहीं पुराने और दिग्गज कांग्रेसियों का मानना है कि अब कांग्रेस अपनी पुरानी फार्म में लौट आएगी। जिन कांग्रेसियों ने अपनी पार्टी का स्वर्णिम काल देखा और आज पार्टी की प्रदेश में दुर्दशा के भी गवाह हैं।

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उनका मानना है कि 2019 के लोकसभा में पार्टी बड़े पैमाने पर सीट जीतकर अपनी वापसी करेगी। वहीं कांग्रेसियों का यह भी मानना है कि कांग्रेस का कैडर वोट मुस्लिम फिर से उसके खाते में आ जाएगा। पूर्व कांग्रेसी विधायक पंडित जयनारायण शर्मा का मानना है कि अब मुस्लिम सभी दलों को भली-भांति जान चुका है। इसलिए उसके पास कांग्रेस के अलावा कोई विकल्प नहीं है। पंडित जयनारायण शर्मा कहते हैं कि भाजपा को हराने का कूवत अकेले कांग्रेस पार्टी में है। उन्होंने कहा कि आज मुसलमान का अंदाजे फिक्र ये है कि उसकी तहजीब और तसव्वुर पर हमला हो रहा है। उनके रवायत पर हमला हो रहा है उनके मजहब पर हमला हो रहा है। उन्होंने कहा कि मुसलमानों के वजूद पर भी हमला हो रहा है। उन्होंने कहा कि मुसलमान आज फैसला कर चुका है कि भाजपा को हराने के लिए एक तरफा वोट देंगे तो कांग्रेस को।

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ये है मुस्लिमों की 2014 की हकीकत

हकीकत में 2014 के लोकसभा चुनाव के समय लगभग 20 फीसदी मुस्लिम जनसंख्या वाले उत्तर प्रदेश से एक भी मुस्लिम सांसद नहीं जीत सका था। पंडित जयनारायण शर्मा कहते हैं कि यही बात मुस्लिम समुदाय के लोगों को नागवार गुजर रही है। उन्होंने कहा कि सपा हो या बसपा दोनों ही मुस्लिम वोटों के सौदागर के रूप में मैदान में आती हैं। जो कि अपने-अपने हिसाब से इस बार दावे कर रहे हैं। पिछले लोकसभा चुनाव में सबसे बड़े प्रदेश से अपना एक भी प्रतिनिधि नहीं चुना जाना उन्हें अंदरखाने कचोट रहा है।

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प्रदेश के मुस्लिम मतदाता दुविधा में हैं कि उनका वोट किस राजनीतिक दल या गठबंधन को जाएगा यूपी में बीते ढाई दशक में मुस्लिम मतदाता अधिकतर मुलायम सिंह यादव पर ही भरोसा जताते रहे हैं, लेकिन मुलायम ने मुसलमानों को कुछ नहीं दिया। इस बार समाजवादी पार्टी की कमान मुलायम सिंह के हाथों में नहीं बल्कि उनके बेटे अखिलेश यादव के पास है। वह भी मुसलमानों के वोटों के सौदागर बन गए है। अखिलेश ने अपनी बुआ मायावती के साथ गठबंधन कर मुसलमानों के वोटों को घेरने की कोशिश की है। जिससे मुसलमानों की दुविधा खत्म हो सके, लेकिन उत्तर प्रदेश में 20 फीसदी मुस्लिम वोटर आज दोराहे पर खड़ा है। बुआ-भतीजे ने अपना राजनैतिक वजूद बचाने के लिए समझौता तो कर लिया, लेकिन वे मुस्लिमों के वजूद को भूल बैठे।