
मेरठ। मेरठ की क्रांतिधरा ने ऐसे सपूतों को जन्म दिया है जिन्होंने देश ही नहीं विदेश में नाम कमाया। 1857 की क्रांति हो या फिर वर्तमान में क्रिकेट का मैदान। मेरठ के युवाओं ने कोई क्षेत्र ऐसा नहीं छोड़ा जहां मेरठ का डंका न बजा हो। सेना में शामिल होकर देश की सेवा का मामला हो या फिर शिक्षा का क्षेत्र हर तरफ मेरठी छोरों और छोरियों का डंका बजा है।
मेरठ के गांव नेक के निश्चल ने कम उम्र में शिक्षा के क्षेत्र में ऐसी उड़ान भरी कि वे सीधे अमरीका पढ़ाई करने पहुंच गए। उनके पिता गांव में ही मात्र तीन बीघा जमीन के कास्ताकर हैं। आमदनी के नाम पर उनके मेडीकल स्टोर की नौकरी से ही घर का खर्च चलता है। लेकिन उन्होंने बच्चों की पढ़ाई के साथ कभी कोई समझौता नहीं किया। तीन बच्चों के पिता पवन भारद्वाज ने पत्रिका को फोन पर बताया कि उनका बेटे निश्चल ने शिव नाडर फाउंडेशन द्वारा संचालित विद्या ज्ञान स्कूल सिकंदराबाद में रहकर पढ़ाई की। दो बेटियां मेरठ के कनोहर लाल डिग्री कालेज से स्नातक कर रही हैं।
निश्चल ने विद्या ज्ञान स्कूल में पढ़ते-पढ़ते ही स्कॉलरशिप की परीक्षा एसईटी पास की और अमरीका की सर्वश्रेष्ठ यूनिवर्सिटी में शामिल वेलेस्ले कालेज में उसे एडमिशन मिल गया। इतना ही नहीं चार साल के उसके कोर्स का खर्च करीब दो करोड़ रूपए वेलेस्ले कालेज खुद वहन करेगा। पवन ने बताया कि हमारे आसपास के गांव से विदेश तो काफी लोग जाते हैं लेकिन पढ़ाई करने पहली बार कोई छात्र गया है और वह भी अमरीका के खर्चे पर। उन्होंने कहा कि बच्चों की सफलता के पीछे विद्या ज्ञान स्कूल का बहुत बड़ा योगदान रहा है।
शिव नाडर फाउंडेशन द्वारा संचालित इस स्कूल में उन परिवार के बच्चों को प्रतियोगी परीक्षा पास कर दाखिला दिया जाता है जिन बच्चों के परिवार की आय एक लाख से कम होती है। पवन कहते हैं कि पूरे उत्तर प्रदेश से पांच बच्चों का चयन हुआ। जिनमें से एक मेरठ से उनका बेटा है। निश्चल की दो बहनें श्रद्धा और सृष्टि हैं। उन दोनों से पत्रिका ने बात की तो उनका कहना था कि भाई के सलेक्शन पर पूरे परिवार ही नहीं गांव वाले भी खूब खुश हैं।
मां ने भी साथ ही पास की है 12वीं की परीक्षा
निश्चल के घर में शिक्षा का महत्व इतना है कि उसकी मां ने भी उसके साथ ही 12वीं की परीक्षा उत्तीर्ण की है। निश्चल ने शिव नाडर फाउंडेशन के बोर्डिंग स्कूल से पढ़ाई की है। यहां 200 प्रतिभाशाली बच्चों को प्रवेश परीक्षा के जरिए चुना जाता है। इस परीक्षा में केवल वही छात्र शामिल होते हैं जिनके परिवार की सालाना आय एक लाख से कम हो। परीक्षा में पांचवीं क्लास के बच्चे भाग लेते हैं। बोर्डिंग स्कूल के खर्च पर बच्चों को उच्चस्तरीय अंग्रेजी माध्यम में छठी से 12वीं कक्षा तक की शिक्षा दी जाती है। इसके बाद उनको दुनियाभर के टॉप कॉलेजों में स्कॉलरशिप के लिए टेस्ट दिलाया जाता है।
Published on:
25 Nov 2017 09:42 pm
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