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गवास्कर से लेकर किंग कोहली को पसंद है मेरठ के बल्ले, क्या है इसकी खासियत? जिसके सचिन, धोनी और पोंटिंग भी हैं फैन

Meerut Bat : देश-विदेश में मेरठ और मेरठ स्पोर्ट्स इंडस्ट्री को खास पहचान दिलाने का श्रेय रिफ्यूजी को जाता है तो आइए जानते हैं कि कैसे रिफ्यूजी और सूरजकुंड स्पोर्ट्स मार्केट का नाम सबकी जुबां पर छाया हुआ है।

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मेरठ

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Adarsh Shivam

Apr 11, 2023

Sunil Gavaskar and Virat Kohli likes Meerut bats know its specialty

बाएं से से विराट कोहली बीच में मेरठ के बल्ले दाएं में सुनील गावस्कर

मन में जब बैट का ख्याल आता है तो मेरठ का नाम याद आता है। यहां के बैट के दीवाने सचिन, विराट और पोंटिंग हैं। इतना ही नहीं यहां तैयार होने वाली स्पोर्ट्स सामग्री देश ही नहीं बल्कि विदेशों तक में बड़ी मात्रा में सप्लाई होती है। जहां देशभर के विभिन्न राज्यों में कोई भी मैच आयोजित किया जाता है। उसके लिए स्टांप मेरठ से ही मंगाए जाते हैं।

मेरठ सूरजकुंड स्पोर्ट्स मार्केट का जिक्र हर एक क्रिकेटर करता है। क्योंकि यहां के बैट से खेलना विदेशी खिलाड़ियों की भी पहली पसंद रहती है। देश-विदेश में मेरठ और मेरठ स्पोर्ट्स इंडस्ट्री को खास पहचान दिलाने का श्रेय रिफ्यूजी को जाता है। आइए जानते हैं कि कैसे रिफ्यूजी और सूरजकुंड स्पोर्ट्स मार्केट का नाम सबकी जुबां पर छाया हुआ है।

लगभग 60 देशों में सप्लाई होते हैं बैट
सूरजकुंड स्पोर्ट्स मार्केट में क्रिकेट सामग्री को बनाने का इतिहास आजादी के समय से चलता आ रहा है। साल 1947 में भारत-पाकिस्तान बंटवारे के बाद सियालकोट से आए रिफ्यूजी ने ही मेरठ में बल्ले का निर्माण किया था। बैट बनाने के साथ ही रिफ्यूजी ने मेरठ में कई तरह के अन्य स्पोर्ट्स सामग्री का भी निर्माण किया है। अपने काम में इतने माहिर हैं कि उनके बनाए गए बैट लगभग 60 देशों में सप्लाई हो रहे हैं।

सुरेश रैना और ऋषभ पंत खुद बल्ले लेने आते हैं यहां
मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर भी मेरठ की बल्ले से धूम मचा चुके हैं। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटर रिकी पोंटिंग, महेंद्र सिंह धोनी, विराट कोहली, युवराज सिंह, रोहित शर्मा सहित अन्य ऐसे कई खिलाड़ी हैं जो मेरठ में विशेष रूप से अपने लिए बल्ले तैयार करवाते हैं। सुरेश रैना और ऋषभ पंत भी परतापुर मेरठ की स्पोर्ट्स इंडस्ट्री से ही बल्ले लेने आते रहे हैं।

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आज के समय में लोग आधुनिक मशीन का उपयोग करके जल्द ही अपना काम पूरा करना चाहता है। लेकिन मेरठ में आज भी कारीगर हाथ से बैट की फिनिशिंग करते हैं। भले ही बल्ले का निर्माण एक घंटे में क्यों न होता हो। मेरठ के कारीगर मशीन से फिनिशिंग के बाद हाथों की कारीगरी अवश्य करते हैं।

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75 से लेकर 20,000 रुपए तक के बैट मिलते हैं यहां
कारीगरों का कहना है कि मशीन से सभी बल्ले की फिनिशिंग एक तरह होती है। जब ग्राहक उनसे बल्ले खरीदने आते हैं, तो वह बल्ले को अपने अनुसार बदलाव करना चाहते हैं। इसीलिए हाथ से बने बल्ले ज्यादा पसंद आते हैं। वहीं बैट की कीमत की अगर बात की जाए तो 75 से लेकर 20,000 रुपए तक की बैट यहां मिलती है। विशेष ऑर्डर पर बनने वाले बल्ले की कीमत काफी होती है।