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श्रमिकों को घर जाने के लिए झेलनी पड़ रही मुश्किलें, सोशल डिस्टेंसिंग की भी उड़ रही धज्जियां

Highlights पैदल घर निकले मजदूरों को मेरठ जनपद की सीमा में रोका बच्चों व महिला समेत सभी मजदूरों को नहीं मिला खाना दो दिन रोके जाने पर मजदूरों ने घर भेजने की लगायी गुहार  

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मेरठ। लॉकडाउन में 50 से ज्यादा दिनों के इंतजार के बाद जब लोगों के सब्र का बांध जवाब दे गया तो वे एक बार फिर पैदल ही अपने घरों को निकल लिए। काफी मजदूर साइकिल पर सवार होकर भी निकले। सभी को मेरठ जिले की सीमा पार करने से पहले ही शाहजहांपुर कस्बे में रोक दिया गया। मजदूरों की भीड़ बढ़ी तो उनके रुकने का इंतजाम भारत शिक्षा सदन स्कूल में कर दिया गया। धीरे-धीरे यहां 350 से ज्यादा मजदूर जमा हो गए, जिनमें काफी संख्या में महिलाएं और उनके बच्चे भी शामिल हैं। बीते दो दिनों से ये मजदूर यहां हैं और इनकी तादाद लगातार बढ़ रही है।

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हैरत की बात ये है कि प्रशासन का पूरा फोकस इन्हें बार्डर पर रोकने में तो है, लेकिन इनके लिए कोई पुख्ता इंतजाम करने में नहीं। श्रमिक मनसुख राम ने बताया कि वह तीन महीने से वहां काम कर रहा था, पैसे खत्म हुए तो अपने घर लखीमपुर खीरी के लिए पैदल ही निकल गया। प्रशासन ने यहां रोक दिया, दो दिनों से यहां कैद हैं, न कोई खाने के लिए पूछने वाला न है पीने के लिए। यमुनानगर से आए राजेन्द्र कुमार ने बताया कि उन्हें बिहार के कटिहार जाना है। साइकिल से घर के लिए निकले थे पुलिस ने यहां रोक दिया। इसके बाद उन्हें इस स्कूल में भेज दिया गया। भीड़ में छोटे-छोटे बच्चों के साथ मौजूद महिला ने बताया कि वह पैदल ही उनके साथ अपने घर अमेठी जाने के लिए निकली, लेकिन पुलिसकर्मियों ने पहले शाहजहांपुर में रोका फिर गजरौला बार्डर पर। वहां से वापस भेज दिया गया तो शाहजहांपुर में पुलिसकर्मियों ने इस स्कूल में भेज दिया। मेरे दो छोटे छोटे बच्चे हैं दो दिनों से इन्हें भी कुछ खाने के लिए नहीं मिला है।

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एक अन्य श्रमिक ने बताया कि पहले यहां 50 मजदूर थे लेकिन दो दिनों में भीड़ 350 तक पहुंच गई, इनके यहां रुकने की कोई व्यवस्था भी नहीं है। स्कूल के अधिकतर कमरे बंद हैं सब ऐसे ही जहां तहां पड़े हैं। सोशल डिस्टेंसिंग का भी कोई पालन नहीं हो रहा है। एसडीएम मवाना ऋषिराज ने बताया कि स्कूल में मजदूरों को रोकने का मामला उनके संज्ञान में नहीं है। वे इस बारे में तहसीलदार से बात करेंगे। उन्होंने बताया कि इस तरह से जो भी मजदूर किसी शेल्टर होम में रोके जा रहे हैं उनके खाने-पीने का पूरा इंतजाम किया जा रहा है। इन मजदूरों का भी किया जाएगा।