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कांपते पुल से गुजरेंगे 35 टन वजनी ट्रक, पुल में दरार आने से लगायी गयी थी रोक

गंगा पर 1976 में बना था शास्त्री सेतु, जिले को पूर्वांचल से जोड़ने का है एकमात्र रास्ता।

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Mirzapur Bridge

मिर्जापुर पुल

मिर्जापुर. जिले को पूर्वांचल से जोड़ने वाले गंगा नदी पर बने एकमात्र शास्त्री सेतु पर एक बार फिर से वाहनों का आवागमन शुरू हो गया है। पिछले दिनों जर्ज हो चुके इस पुल में कई जगह दरार दिखने के बाद जिला प्रशासन की ओर से सुरक्षा के मद्देनजर ट्रकों का आवागमन पूरी तरह से रोक दिया गया था। इसके चलते व्यापारियों को करोड़ों रुपये का रोज नुकसान उठाना पड़ रहा था। परेशानियों का देखते हुए ट्रक मालिकों के एसोसिएशन ने जिला प्रशसन से मिलकर ट्रकों का आवागमन फिर से शुरू कराने की अपील की थी। केन्द्रीय मंत्री और जिले की सांसद अनुप्रिया पटेल के साथ जिला प्रशासन व ट्रांसपोर्ट यूनियन के नेताओं की बैठक के बाद कुछ प्रतिबंधों के साथ पुल पर आवागमन एक बार फिर से खोल दिया गया।

10 किमी रहेगी स्पीड, लोड 35 टन

अब पुल पर 35 टन से अधिक लोडेड ट्रक नहीं गुजरेंगे। निर्धारित लोड के ट्रक भी तेज रफ्तार से पुल से नहीं जाएंगे। पुल से गुजरने के दौरान स्पीड 10 किमी प्रतिघंटा से अधिक नहीं होगी। इतना ही नहीं, 35 टन भार के 5-5 ट्रक सिंगल रूट से आएंगे। पुल पर कोई वाहन नहीं रोका जाएगा। बैठक में जिला प्रशासन ओर केन्द्रीय मंत्री दोनेां की ओर से साफ चेतावनी भी दी गयी कि इन प्रतिबंधों का उल्लंघन होने की दशा में कड़ा निर्णय लिया जाएगा।

बड़ी गाड़ियां गुजरती हैं तो कांपने लगता है पुल

बता दें कि शास्त्री पुल इस कदर जर्ज हो चुका है की उस पर से जब बड़ी गाड़ियां गुजरती हें तो पुल में कम्पन होने लगता है। कहीं पुल टूट न जाए, यह सोचकर प्रशासन की ओर से भारी वाहनों का आवागमन नियंत्रित करते हुए उसके गुजरने पर रोक लगाकर डायवर्जन लागू कर दिया गया था। इस पर मोटर ऑपेरटर संघ आपत्ति कर रहा था। उसका तर्क था कि इससे उनका काफी नुकसान हो रहा है। इसके अलावा व्यापारियों के नुकसान की बात भी आयी थी।

74 लाख रुपये पर टिकी है पुल की किस्मत

बीते साल 2018 के सितम्बर महीने की छह और सात तारीख को सेंट्रल रोड रिसर्च इंस्टीट्यूट (CRRI) नई दिल्ली ने मिर्जापुर के शस्त्री पुल का मैन्युअल मुआयना किया था। हाईटेक मशीनों के जरिये जांच कर पुल की आवागमन क्षमता को लेकर अंतिम निर्णय लेना था, लेकिन इसपर 74 लाख रुपये का खर्च आना है। मांगने के बावजूद अब तक धनराशि नहीं मिली है। फिलहाल बिना इस जांच रिपोर्ट के ही आवागमन शुरू करा दिया गया है, लेकिन यह पुल के लिये खतरनाक भी हो सकता है। कुल मिलाकर फिलहाल 74 लाख रुपये पर पुल की किस्मत टिकी है।

By Suresh singh