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आजादी के 76 साल बाद मिर्जापुर की पहाड़ी पर पहुंचा पानी…जानें संघर्ष की कहानी

Mirzapur News: आजादी के 76 सालों बाद मिर्जापुर की पहाड़ी पर पानी पहुंचा है। एक लंबे संघर्ष के बाद परियोजना को सफलता मिल पाई है। आइये जानते हैं यह कैसे संभव हुआ…

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after 76 years of independence water reached hilly village of mirzapur

Mirzapur News: देश को आजाद हुए 76 साल हो गए लेकिन अब तक मिर्जापुर की पहाड़ी पर नल से पानी नहीं पहुंच सका था। उत्तर प्रदेश सरकार के हर घर नल योजना से यह भी संभव हो गया है। प्रदेश में हर घर नल योजना को तेज गति से संचालित किया जा रहा है। सरकार द्वारा प्रदेश के हर क्षेत्र में शुद्ध पेयजल पहुंचाने की योजना पर काम हो रहा है। इस क्रम में मिर्जापुर के पहाड़ी इलाकों में जब नल से पानी पहुंचा तो इलाके के लोग खुशी से झूम उठे। अब तक टैंकर के पानी पर आश्रित समाज अब पाइपलाइन से पेयजल की सुविधा का लाभ उठा सकेगा। मिर्जापुर की खूबसूरत पहाड़ियों में स्थित लहुरियादह गांव के लोगों को आजादी के 76 साल बाद पहली दफा मंगलवार की शाम पाइपलाइन से पेयजल आपूर्ति का लाभ मिला। डीएम दिव्या मित्तल ने राज्य सरकार की ओर से बिछाई गई पाइपलाइन में लगाए गए नल को चालू किया। नल से पानी की धारा निकलते ही गांव के लोग खुशियों से झूम उठे।


गर्मियों में बढ़ जाती थी समस्या
देवहार ग्राम पंचायत की सीमा में स्थित लहुरियादह गांव आता है। 1200 लोगों का यह पहाड़ी गांव पास के झरने पर निर्भर था। झरना गर्मियों में सूख जाता था, जिसके बाद गांव के पानी की जरुरतो को पूरा करने के लिये टैंकर ही एकमात्र सहारा थे। ग्राम प्रधान कौशलेंद्र गुप्ता ने कहा कि हम अपना पूरा वार्षिक बजट पानी पर खर्च कर रहे हैं। डीएम दिव्या मित्तल ने योजना की सफलता पर कहा कि इस गांव तक जलापूर्ति लाइन लाना काफी कठिन था। इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि उचित योजना के अभाव में लगभग एक दशक पहले काम आधे में ही रोक दिया गया था। इसके बाद जब सरकार की ओर से काम शुरू हुआ तो सफलता मिली।

बीएचयू के विशेषरज्ञों की मदद से पूरा हुई योजना

डीएम ने योजना के बारें में बताता हुए कहा कि मुझे बताया गया कि बहुत प्रयासों के बावजूद इस गांव में पानी की आपूर्ति लाइन ले जाना संभव नहीं हो सका था। गांव के अन्य परियोजनाओं का पैसा पानी के टैंकरों पर खर्च हो रहा था।

डीएम ने कहा कि पिछले प्रयासों के दौरान आई कठिनाइयों पर ध्यान दिया गया। हमने बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के जियो फिजिक्स विभाग के विद्वानों और अन्य तकनीकी विशेषज्ञों से मदद मांगी। इसका सही समाधान खोजने के लिए जल जीवन मिशन, यूपी जल निगम, नमामि गंगे के अधिकारियों और मुख्य विकास अधिकारी की एक संयुक्त टीम बनाई गई। कठोर चट्टानी सतह पर स्थित गांवों तक जल आपूर्ति लाइनें ले जाने की तकनीक पर काम शुरू किया गया।


तकनीकी विशेषज्ञों से राय लेने के बाद सरकार को अलग से प्रस्ताव भेजा गया। प्रस्ताव को सरकार ने हरी झंडी दे दी। इसके बुनियादी ढांचे पर काम किया गया और टीम द्वारा अंतिम रूप दिए गए नए तरीकों का उपयोग कर अप्रैल में जलापूर्ति योजना पर काम शुरू किया गया।


मिशन हुआ पूरा

डीएम ने कहा कि योजना पर तेजी के साथ काम हुआ। अगस्त के समाप्त होने से पहले काम पूरा हो गया। इसके बाद इसकी टेस्टिंग शुरु की गई। मंगलवार की शाम लहुरियादह गांव में पेयजलापूर्ति लाइन की शुरुआत के मौके पर धार्मिक अनुष्ठान का आयोजन किया गया, मौके पर डीएम भी पहुंची। उन्होंने योजना के पूरा होने पर खुशी भी जताई।