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अनुप्रिया पटेल की पार्टी ने बीजेपी को दिया 20 फरवरी तक गठबंधन विवद सुलझाने का अल्टिमेटम

अपना दल (एस) और भाजपा गठबंधन में बढ़ सकता आने वाले समय मे विवाद।

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Anupriya Patel

अनुप्रिया पटेल

मिर्ज़ापुर. सपा-बसपा गठबंधन और प्रियंका गांधी की इंट्री से चिंतित बीजेपी को एक बार फिर उसकी सहयोगी पार्टी अपना दल ने मुश्किल में डाल दिया है। पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और केन्द्रीय मंत्री अनुप्रिया पटेल के पति एमएलसी आशीष पटेल ने बीजेपी को 20 फरवरी तक का अल्टिमेटम दिया है। उन्होंने कहा है कि भाजपा केन्द्रीय नेतृत्व 20 फरवरी तक इस मामले को सुलझा ले। सूत्रों के मुताबिक अगर मामला नहीं सुलझा तो अपना दल (एस) कोई बड़ा निर्णय ले सकती है। ओम प्रकाश राजभर पहले ही बीजेपी को अपनी मांगें मानने के लिये 25 फरवरी तक का अल्टिमेटम दे चुके हैं, उसके बाद पार्टी के प्रत्याशियों के ऐलान की चेतावनी उन्होंने दी है।

बता दें कि अपना दल एस के राष्ट्रीय अध्यक्ष आशीष पटेल ने प्रधानमंत्री के बीते 25 दिसंबर को वाराणसी और गाजीपुर दौरे के ठीक पहले आशीष पटेल ने बीजेपी से नाराजगी जाहिर करते अपने लिये 2019 में सम्मानजनक सीटें न मिलने पर गठबंधन से हटने तक की धमकी दी थी। पीएम मोदी के कार्यक्रम में न बुलाए जाने पर भी नाराजगी जतायी थी। इसके बाद से बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष से लेकर रेल राज्यमंत्री मनोज सिन्हा तक ने इसे घर की बात कहते हुए मामले को सुलझा लिये जाने की बात कही थी। पर इसके बाद अनुप्रिया पटेल ने एक बार फिर यह कहकर नाराजगी बने होने का संकेत दिया कि उन्हें मनाने के लिये कोई आया ही नहीं। बीजेपी नेता फिर इसे आपस का मामला बताते रहे और मनोज सिन्हा ने यहां तक कहा कि बीजेपी सहयोगी दलों के साथ बड़े भाई की तरह है।

माना जा रहा था कि मामला शांत हो गया है पर एक बार फिर आशीष पटेल ने अल्टिमेटम देकर मुश्किल खड़ी कर दी है। पार्टी सूत्रों की मानें तो बीजेपी केन्द्रीय नेतृत्व से गठबंधन से जुड़े मुद्दे सुलझाने के लिये अब अपना दल (एस) के नेता इतजार के मूड में नहीं हैं। उनमें गठबंधन के भविष्य को लेकर चिंता बढ़ती जा रही है। सूत्र का आरोप यह भी है कि बीजेपी के पिछड़े वर्ग के बड़े नेता के चलते दोनों दलों के बीच विवाद सुलझने के बजाय उलझता जा रहा है। अब देखना यह होगा कि बीजेपी यूपी 2014 लोकसभा चुनाव के यूपी में अपने एकमात्र सहयोगी को मना पाती है या फिर ये विवाद सुलझने के बजाय और उलझता है। अगर ऐसा हुआ तो दोनों दल चुनावी समर में आमने-सामने भी हो सकते हैं।

By Suresh Singh