
अनुप्रिया पटेल और राम सकल
मिर्जापुर. रक्षाबंधन के मौके पर केंद्रीय मंत्री अनुप्रिया पटेल मनोनीत राज्यसभा सांसद राम सकल को राखी बांध कर बड़े राजनीतिक संकेत दिये। रक्षाबंधन के दिन खुद अनुप्रिया पटेल विसुन्दरपुर स्थित राज्यसभा सांसद राम सकल के आवास पर पहुंची और उन्हें राखी बांधा। वही राजनैतिक हलकों में राबर्ट्सगंज सीट के सामान्य होने के चर्चा के बीच पहली बार केंद्रीय मंत्री के राबर्ट्सगंज से पूर्व सांसद राम सकल को रक्षाबंधन पर राखी बांधने को लेकर कई कयास लगाये जा रहे हैं।
राजनीति में नेताओं के संकेतों का अपना महत्व होता है। नेता समय समय पर अपने कार्यो से बड़े संकेत छोड़ जताते है। अपना दल एस की नेता अनुप्रिया पटेल का सांसद राम सकल के घर पहुंचकर उन्हें राखी बंधना राजनैतिक हलकों में चर्चा का विषय बन गया। अनुप्रिया पटेल खुद राखी लेकर सांसद के घर पहुंची थी, उन्होंने सांसद राम सकल को राखी बांधा और काफी देर तक घर पर मौजूद रही। हालांकि रक्षाबन्धन के मौके पर पार्टी नेता इसे सिर्फ दो नेताओं के बीच शिष्टाचार भेंट के रूप में मान रहे है। मगर सूत्रों के मुताबिक इन दिनों अनुसूचित जाति के लिए सुरक्षित राबर्ट्सगंज सीट के सामान्य होने की चर्चा तेजी से चल रही है। संभावना जताई जा रही है कि यूपी में एनडीए गठबंधन की सबसे बड़ी सहयोगी पार्टी होने के कारण अपना दल एस और भाजपा के बीच सीट बंटवारे में राबर्ट्सगंज संसदीय सीट अपना दल एस के खाते में जा सकता है। इसके लिए पार्टी ने सोनभद्र में पहले से सक्रियता बढ़ा दी है।
इससे पहले विधान सभा चुनाव में जिले के दुद्धी विधान सभा सीट पर अपना दल के टिकट पर हरिराम चेरो ने जीत हासिल कर राजनैतिक पंडितों को चौका दिया था। इस लिये पार्टी की मजबूत पकड़ को देखते हुए चर्चा के अनुसार अगर राबर्ट्सगंज सीट सामान्य होता है तो अपना दल एस इस सीट पर मजबूती के साथ दमदार चेहरे को प्रत्याशी के रूप में उतार सकती है। इसके लिए वर्तमान राज्यसभा सांसद राम सकल जो कि पूर्व में राबर्ट्सगंज संसदीय सीट से तीन बार सांसद रहे है, उनका साथ पार्टी के लिये काफी मजबूती प्रदान करेगा।
राम सकल खुद सोनभद्र के शिल्पी गांव के रहने वाले है। उन्हें इस जनपद के राजनीतिक समीकरण बखूबी पता है। दलित और किसान नेता के रूप में इनकी जनता के बीच अच्छी खासी पकड़ भी बताई जाती है, इसलिए अपना दल एस दलित और पिछड़े वर्ग के इस समीकरण में चुनावी गणित तैयार करने में लगी हुई है। अनुप्रिया पटेल को यूपी में पिछड़े वर्ग का नेता माना जाता है। खास तौर से पटेल वोटरों पर उनकी पकड़ अच्छी खासी रही है।
फिलहाल यह सभी समीकरण भाजपा और चुनाव आयोग के निर्णय पर निर्भर करता है, क्योंकि 2014 के संसदीय चुनाव में भी राबर्ट्सगंज सीट के सामान्य करने का प्रयास था। मगर अंतिम समय में चुनाव आयोग ने सभी कयासों पर विराम लगाते हुए सीट में कोई परिवर्तन नही किया था। मगर राजनैतिक हलकों में दो नेताओं के रक्षाबंधन पर भाई -बहन की यह जोड़ी जरूर चर्चा का विषय बना हुआ है।
BY- SURESH SINGH
Published on:
26 Aug 2018 10:23 pm
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