
खुलासा: सात फर्जी आधार कार्ड से महीने भर में 1027 बार निकाला गया राशन, 500 क्विंटल का हुआ घोटाला
मिर्जापुर. देश में भ्रष्टाचार को रोकने के लिए भाजपा की सरकार ने डिजिटल इंडिया का नारा दिया। कहा गया कि डिजिटल युग में पारदर्शी व्यवस्था होगी और बिचौलिये हमेशा के लिए समाप्त हो जायेंगे। लेकिन अब भ्रष्टाचारी इसी व्यवस्था को ही हथियार बनाकर गरीबों को लूटने में कसर नहीं छोड़ रहे हैं।
ऐसा ही एक संगीन मामला सामने आया है मिर्जापुर जनपद में। जहां कोटे कि दुकान पर लाभार्थी के आधार नंबर पर दूसरे के आधार को इम्पोर्ट कर गरीबो को मिलने वाले खाद्यान का बंदरबाट किया गया है।
खास बात तो यह कि यह घोटला अधिकारियों के नाक के नीचे शहरी इलाकों में लगे ई पास(इलेक्ट्रानिक प्वाइंट ऑफ सेल) में सेंधमारी कर किया गया। किसी को कानों-कान खबर तक नहीं हुई। खुलासे के बाद अधिकारी से लेकर कोटेदारों में हड़कंप मच गया है। ये आंकड़े महज जुलाई माह का है। कहा तो यहां तक जा रहा है कि यूपी के अन्य जिलों में भी बड़ा राशन का घोटाला ई पास के माध्यम से किया गया है। सूत्रों की मानों तो इलाहाबाद शहर में इस तरीक से तरीबन 40 हजार क्विंटल राशन के घोटाले की बात जल्द सामने आ सकती है। जनपद में पाँच हजार किलो का खाद्यान घोटाला प्रकाश में आने के बाद कोटेदारों और अधिकारियों में हड़कंप मचा हुआ है।
बतादें कि दुकानों में खाद्यान की चोरी रोकने और पारदर्शिता बरतने के लिए फूल प्रूफ समझे जाने वाले डिजटल ई-पास मशीन कोटे कि दुकानों पर लगाया गया था। जिसमे लाभार्थी के आधार नंबर को जोड़ कर मशीन पर लाभार्थी के द्वारा अंगूठे का निशान लगाने के बाद उसे खाद्यान मिलता है। ट्रायल के तौर पर यह मशीन शहरी इलाकों में स्थित कोटे के दुकानों में लगाई गयी थी। मगर खाद्यान विभाग के अधिकारी उस समय हैरान रह गए जब घोटालेबाजों ने इसका भी तोड़ निकाल लिया।
लखनऊ में खाद्य विभाग के अधिकारियों से शिकायत के बाद जब जुलाई माह में कोटेदारों द्वारा वितरित किये गए खाद्यान का आंकड़ा निकाला गया तो अधिकारी भी स्तब्ध रह गए। मिर्जापुर जैसे जिले में सात आधार कार्ड का इस्तेमाल कर तकरीबन 500 क्विंटल खाद्यान का घोटाला हो गया। लखनऊ से जिला आपूर्ति अधिकारी के पास भेजे गए आदेश के बाद जिले के एक दर्जन से अधिक कोटे कि दुकान संदेह के घेरे में है। जिनमे से नौ दुकानदारों ने सबसे अधिक बार आधार नंबर में हेराफेरी कर खाद्यान का घोटाला किया है।
हालांकि जाँच के दौरान पता चला कि पंद्रह दुकानों पर सिर्फ एक बार लाभार्थी के आधार नंबर पर दूसरे का आधार पोर्ट कर खाद्यान निकाला गया। जिनमे से जांच के बाद लाभार्थी से पूछताछ में पाया गया कि उन्हें खाद्यान मिला था। मगर नौ कोटे कि दुकानों पर सबसे अधिक संदेह है यहां पर सात आधार कार्ड के जरिये 1027 बार लाभार्थी के आधार नंबर पर दूसरे का आधार फीड कर खाद्यान निकाल लिया गया है। इन दुकानों कि जांच के लिए अब जिला आपूर्ति अधिकारी ने नौ टीमें गठित कर दिया है। जिला आपूर्ति अधिकारी उमेश चंद का कहना है कि जाँच के बाद कारवाई की जाएगी।
Published on:
27 Aug 2018 06:14 pm
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