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 प्रमुख सचिव ने कहा, विकास कार्यों में लापरवाही हुई तो सजा भुगतने को तैयार रहे अधिकारी

जिले के दौरे पर पहुंचे शासन के नोडल अधिकारी व प्रमुख सचिव पिछड़ा वर्ग कल्याण महेश कुमार गुप्ता

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Chief Secretary Backward Class Welfare Mahesh Kumar Gupta

अधिकारी का दौरा

मिर्जापुर. जिले के दौरे पर पहुंचे शासन के नोडल अधिकारी व प्रमुख सचिव पिछड़ा वर्ग कल्याण महेश कुमार गुप्ता ने अधिकारियों की जमकर क्लास लगाई। प्रमुख सचिव ने सीधे तौर पर यह बात कह दी कि अगर विकास कार्यों में किसी तरह की गड़बड़ी पाई गई तो उसके लिए जिम्मेदार लोग सजा भुगतने को तैयार रहें। जी हां शनिवार को प्रमुख सचिव महेश कुमार गुप्ता जिले के विकास कार्यों की समीक्षा करने पहुंचे थे।

जिले के पटेहरा में निर्माणाधीन दिव्यांग विद्यालय का निरीक्षण करने पहुंचे प्रमुख सचिव ने वहां निर्माणाधीन भवन में घटिया सामग्री लगाये जाने को लेकर गहरी नाराजगी जताई। उन्होने पहले तो इस भवन से संबन्धित बजट की जानकारी विद्यालय प्रबंधन और पैक फेड परियोजना अभियन्ता गिरीश चंद श्रीवास्तव से लिये। जिसकी जानकारी देते हुए अभियन्ता गिरीश चंद श्रीवास्तव ने बताया कि उक्त विद्यालय 17 करोड़ की लागत से बन रहा है । जिसके लिए अभी तक केवल 20 प्रतिशत धन ही मिल पाया है। साथ ही श्रीवास्तव ने बताया कि सप्लाई की गुणवत्ता व मांग से अधिक सप्लाई के कारण इस मामले में पूर्व में अभियन्ता सस्पेंड हो गए थे। साथ ही उन्होने ये भी बताया कि उनके समय के गुणवत्ताविहीन सामानों को फेल करके उसके जगह अच्छी क्वालिटी के सामान मंगाया गया।

जब प्रमुख सचिव ने महिला एसडीएम की सिखाई क्वाटिली की जांच करना

जिस समय शासन के नोडल अधिकारी व प्रमुख सचिव पिछड़ा वर्ग कल्याण महेश कुमार गुप्ता के पटेहरा में निर्माणाधीन दिव्यांग विद्यालय का निरीक्षण कर रहे थे। उसी समय उन्हे सामग्री की गुणवत्ता पर संदेह हुआ। उन्होने साथ मे मौजूद महिला एसडीएम मड़िहान सविता यादव से ईंट की गुणवत्ता चेक करने को कहा। पर एसडीएम ईंट को तोड़ ही नही पा रही थी। जिसपर प्रमुख सचिव आगे बढे दो ईंट को लेकर एसडीएम को ईट तोड़ने का तरीका बताया। कहा कि जब गुणवत्ता की जांच नहीं कर पायेंगी तो कैसे विकास कार्यों के गड़बड़ियों में सुधार संभव होगा।

दिव्यांगों की सुविधा के लिए प्रमुख सचिव ने दिये कई निर्देश

प्रमुख सचिव ककरद में बन रहे राजकीय नेत्रहीन दिब्याग इंटरमीडिएट कालेज का भी निरीक्षण किया। उन्होने फर्श के बीचोबीच सेकंड क्लास टाइल्स लगवाने व रेलिंग लगवा कर रैम्प्स की अच्छी क्वालिटी कराने का निर्देश देते हुए बच्चों को खेलने के लिए मैदान बनवाने की सलाह दी।अभियन्ता ने बताया कि 100-100 बच्चों के पठन-पाठन हेतु ये दोनों विद्यालय मय हास्टल के बनाये जा रहे हैं। पत्रिका के सवाल पर जवाब देते हुए उन्होंने कहा की पुराने ईंट वापस भेजे जा रहे हैं। उसके स्थान पर नए अच्छे ईंट आकर प्रयोग में लाये जा रहे हैं । यदि किसी प्रकार की लापरवाही पाई जाएगी तो रिकवरी के साथ-साथ दंडित भी किया जाएगा। यह तो भौगोलिक निरीक्षण स्वयं का था जांच टीम से भी जांच करवा कर मानक की परख करायेंगे ।वही ककरद के विद्यालय में अभियन्ता ने बताया कि 10 करोड़ की लागत से उक्त बिद्यालय बन रहा है जिसमे केवल 6 करोड़ ही मिला है। शेष धनराशि के लिए शासन से मांग की गई है।