
Lalitesh Pati Tripathi
मिर्ज़ापुर. प्रदेश में सपा और बसपा के गठबंधन होने के बाद मिर्जापुर संसदीय सीट पर एक बार फिर कॉग्रेस की रणनीति पर सभी की निगाहें औरंगाबाद हाउस के नाम से प्रसिद्ध त्रिपाठी परिवार पर लगी है। जिले के सियासत में पिछले चार दशकों से इस परिवार ने अच्छी खासी मौजूदगी रही है। कॉग्रेस से इस सीट से कौन उम्मीदवार होगा प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से इस परिवार की सहमति जरूर होती है। जिले में एक बार फिर से इस परिवार से ललितेश पति त्रिपाठी के चुनावी मैदान में आने की चर्चा जोरों पर है। जिला में कभी प्रदेश की राजनीति का केंद्र रहा पड़ोसी बनारस जिले का औरंगाबाद हॉउस की मौजूदगी हमेसा रही है।
कॉग्रेंस की राजनीति जिले में कैसे परवान चढ़ेगी इसकी दशा और दिशा इसी परिवार से जुड़ी रही है। जिले में इस परिवार से पहली बार पं. लोकपति त्रिपाठी ने चुनाव लड़ा था। फिर इनके भी पुत्र राजेशपति त्रिपाठी अब इस राजेश पति त्रिपाठी के पुत्र ललितेश पति त्रिपाठी परिवार कि राजनैतिक विरासत सम्भाल रहे हैं। पिछली बार 2012 में नक्सल प्रभावित मड़िहान विधानसभा सीट से कॉग्रेस को अप्रत्याशित सफलता दिलाने वाले ललितेश पति त्रिपाठी लोकसभा चुनाव 2014 में कॉग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ा था। वह एक लाख 52 हजार के करीब मत पाकर वह तीसरे स्थान पर रहे भाजपा और अपना दल गठबंधन से प्रत्यासी अनुप्रिया पटेल को जीत हासिल हुई थी।
हालांकि अब एक बार फिर से सम्भावना जताई जा रही है कि कॉग्रेस के टिकट पर ललितेश पति त्रिपाठी दोबारा यहां से चुनावी मैदान में हो सकते हैं। मड़िहान विधायक के तौर पर किए गए कार्यों से जनता के बीच ललितेश पति त्रिपाठी की लोकप्रियता भी है। मगर इस बार परिस्थिति पहले जैसी नहीं है। सपा और बसपा के गठबंधन से बाहर कॉग्रेस की राह बहुत कठिन है। ऐसे में यह भी कयास लगाया जा रहा है। ललितेश पति त्रिपाठी खुद लड़ने के बजाय यहां से किसी और को टिकट दिलवा कर उस पर भी दांव आजमा सकते है। हालांकि किसी और के मैदान में उतारने पर उसके जीत की सम्भावना क्षीण होगी। फिलहाल यह तो आने वाला वक्त ही बताएगा कि इस परिवार से कोई मैदान में आता है या फिर कोई दूसरा प्रत्यासी मैदान में होता है। काग्रेस में औरंगाबाद हाउस व त्रिपाठी परिवार की हैसियत व जिले में उनकी मौजूदगी कब कहा से चुनाव लडा:- काग्रेस की बात करे तो त्रिपाठी परिवार काग्रेस में शामिल पूर्वांचल का ऐसा परिवार है।जिसने कभी भी काग्रेस और गांधी परिवार का साथ नहीं छोड़ा।इसी लिए आज भी यह परिवार काग्रेस के शिर्ष नेतृत्व के बेहद खास है।अगर हम इससे पहले की राजनीति देखे तो त्रिपाठी परिवार एक समय में कमलापति त्रिपाठी केंद्र में रुतबेदार जहाजरानी एवं परिवहन व रेल मंत्री के साथ-साथ प्रदेश के मुख्य मंत्री भी रह चुके है।और उनके बेटे लोकपति त्रिपाठी प्रदेश के खेल एवं जेल सिचाई व स्वास्थ मंत्री थे।तो ये कहना गलत नहीं होगा की देश की राजनीति ने महत्वपूर्ण जगह रखने वाला त्रिपाठी घराना। जिले में औरंगाबाद हाउस की राजनैतिक मौजूदगी:- जिले में पहली बार 1971 मे लोकपति त्रिपाठी ने राजगढ़ विधान सभा सीट से चुनाव लड़ा। वह इस सीट से चार बार व मझवा विधान सभा सीट से पांच बार चुनाव लड़ चुके है। जिसमे उन्हें पांच बार जीत हासिल किया लेकिन चार बार उन्हें हार का सामना करना पड़ा।इसके बाद बेटे राजेश पति त्रिपाठी भी दो बार लोक सभा और एक बार मिर्ज़ापुर नगर विधान सभा सीट से चुनाव लड़े लेकिन किस्मत ने साथ नहीं दिया और हार का सामना करना पड़ा।हालांकि वह यहां से 2001 में एमएलसी का चुनाव जीत चुके है।
लोकपति त्रिपाठी सन (1971) में उप चुनाव राजगढ़ विधान सभा से (जीते ) लोकपति त्रिपाठी सन (1974) राजगढ़ विधान सभा से (जीते ) लोकपति त्रिपाठी सन (1977) राजगढ़ विधान सभा से(हारे ) लोकपति त्रिपाठी सन (1980) में मझवा विधान सभा से (जीते ) लोकपति त्रिपाठी सन (1985) में मझवा विधान सभा से (जीते ) लोकपति त्रिपाठी सन (1989) में मझवा विधान सभा से (हारे) लोकपति त्रिपाठी सन (1993) में मझवा विधान सभा से(हारे ) लोकपति त्रिपाठी सन (1996) में राजगढ़ विधान सभा से(जीते ) लोकपति त्रिपाठी सन (2002) में मझवा विधान सभा से(हारे ) राजेश पति त्रिपाठी सन (2001)में एम० एल० सी० से (जीत) राजेश पति त्रिपाठी सन(2002) में मिर्ज़ापुर लोक सभा से(हारे) राजेश पति त्रिपाठी सन (2004)में मिर्ज़ापुर लोक सभा से(हारे) राजेश पति त्रिपाठी सन (2007) में मिर्ज़ापुर नगर विधान से(हारे) ललितेश पति त्रिपाठी(2012) मड़िहान विधान सभा (जीत) ललितेश पति त्रिपाठी(2014) मिर्ज़ापुर लोक सभा से(हार) ललितेश पति त्रिपाठी-(2017) मड़िहान विधानसभा(हार)।
BY-Suresh Singh
Published on:
18 Jan 2019 04:20 pm
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