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गर्मियों की छुट्टियों के लिए जन्नत से कम नहीं है पूर्वांचल का ये पर्यटन स्थल, देता है उत्तराखंड का मजा

गर्मी के मौसम में अगर छुट्टियां मनाने की योजना बना रहे हैं तो यूपी के उत्तराखंड की उपाधि पाए इस जिले मे आइये...

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गर्मियों की छुट्टियों के लिए जन्नत से कम नहीं है पूर्वांचल का ये पर्यटन स्थल, देता है उत्तराखंड का मजा

गर्मियों की छुट्टियों के लिए जन्नत से कम नहीं है पूर्वांचल का ये पर्यटन स्थल, देता है उत्तराखंड का मजा

मिर्ज़ापुर. गर्मी के मौसम में अगर छुट्टियां मनाने की योजना बना रहे हैं तो यूपी के उत्तराखंड की उपाधि पाए मिर्ज़ापुर घूमने के लिए बेहतरीन स्थल है। यह उन पर्यटकों के लिए ज्यादा मुफीद है जो घूमने के लिए धर्मिक स्थलों को पसंद करते हैं। इन पर्यटकों के लिए मिर्ज़ापुर में धर्मिक और प्राचीन विरासत देखने के लिए बहुत कुछ मिलेगा। यूपी के प्रसिद्ध पर्यटन स्थल वाराणसी और इलाहाबाद के बीच में स्थित मिर्ज़ापुर वाराणसी से 65 किलोमीटर दूरी पर स्थित है। यहां आने के लिए वाराणसी के बावतपुर एयरपोर्ट से कार द्वारा पहुचा जा सकता है। घूमने के लिए यहां विश्व प्रसिद्ध माँ विंध्यवसनी मंदिर है। जिनके बारे में मान्यता है कि, यह सिद्धि पीठ है। इस मंदिर से तीन किलो मीटर के दायरे में एक और मंदिर काली खोख मंदिर जिसके बारे में मान्यता है कि, यह विश्व कि इकलौती मूर्ति है जिनमे काली का मुंह आसमान की तरफ है। इस मंदिर के बगल से ही पैदल जाने के लिए पहाड़ों पर सीढ़ियां बनी हैं जो पास मौजूद दूसरे मंदिर अष्टभुजा पर जाती है।

मां अष्टभुजा मंदिर द्वापर युग मे कंस द्वरा अपनी बहन देवकी कि सातवीं संतान थी, जो कंस द्वारा धरती पर पटके जाने से पहले उनके हाथों से छूट कर आकाश मार्ग द्वारा विंध्य पहाड़ियों में पहुंच गयी। जहां इन्हें माँ अष्टभुजा के नाम से जाना जाने लगा। मान्यता है कि, मूर्ति देखने पर आज भी बाल रूप में दिखाई देता है। अष्टभुजा मंदिर के पास ही राम गया घाट स्थित जिसके बारे में मान्यता है कि, यहां त्रेतायुग में भगवान राम अपने पिता दशरथ का पिंड दान करने आये थे। गंगा तट पर पिंडदान स्थल आज भी है। जहां पैरो के निशान मिलते है। इसके बारे में मान्यता है कि, यह भगवान राम और सीता के पैरों के निशान है। यहीं पर भगवान राम ने अपने हाथों से शिवलिंग को स्थापित किया था।

यह मंदिर यहां आज भी मौजूद है। जिसकी पूजा दूर दूर से आने वाले भक्त करते है। विंध्याचल में ही भारत कि टाइम लाइन रेखा भी स्थित है। जहाँ से पूरे देख का समय निर्धारित होता है। इसके बोर्ड के पास छोटा सा पार्क भी मौजूद है। घूमने के लिए विंध्य पहाड़ियों पर आनंदमयी माता का आश्रम और प्रसिद्ध संत देवहवा बाबा का आश्रम भी मौजूद है। इसके साथ ही मिर्ज़ापुर शहर में स्थित तारकेश्वर देव शिव मन्दिर भी जिसके बारे में मान्यता है कि, यहां पर शिव कि आराधना कर भावना विष्णु ने वरदान में सुदर्शन चक्र कि पाया था। मिर्ज़ापुर में घूमने के लिए कई ऐतिहासिक धरोहर भी मौजूद है। जिनमे से चुनार का किला सबसे प्रसिद्ध है रहस्यमय और तिलस्म के रूप में प्रसिद्ध इस किले में रहस्यमय कुआं, सोनवा मंडप, और तहखाना के साथ कई सुरंग है। चुनार से लगभग 15 किलोमीटर दूरी पर मौजूद भुइली खास जगह है जहां शेरशाह शूरी द्वारा बनवाया गया डाक मीनार आज भी मौजूद है।

इसके साथ ही 20 किलोमीटर दूरी पर अहरौरा में भंडारी देवी का मंदिर और उसी के पास सम्राट अशोक के पत्थर पर लिखे शिलापट भी देखने लायक स्थल है। अहरौरा में ही गुफाओं में भित्ति चित्र भी देखने के लिए प्रमुख स्थल है। जिले में कई फॉल और झरने दरी भी है मगर गर्मी के दिनों में अधिकांश सूखे रहते हैं। मगर टांडा फाल में बरसात के समय भी पानी मिल जाता है। जिले में ठहरने के लिए शहर में अच्छे होटल मौजूद है। साथ ही वाराणसी भी पास मौजूद के कारण दिनभर घूम कर वापस लौटा जा सकता है। फिलहाल धार्मिक रूचि के पर्यटकों के लिए जिले में घूमने के लिए बहुत से स्थल है।