
त्रिभुवन सिंह
मिर्ज़ापुर. बाहुबली मोख्तार अंसारी की जेल में अचानक ज्यादा तबीयत खराब होने और इलाज के लिये उन्हें लखनऊ ले जाए जाने के बाद शासन और प्रशासन शायद जेल में बंद दूसरे बाहुबली और माफिया को लेकर सतर्क हो गया है। इसके चलते इनको लेकर कोई लापरवाही न हो इसका खास खयाल रखा जा रहा है। अचानक इनके बैरकों का निरीक्षण भी शायद इसी का हिस्सा हो सकता है। मिर्जापुर जेल में बंद बाहुबली बृजेश सिंह के सहयोगी और पूर्वांचल में चर्चित माफिया त्रिभुवन सिंह के बैरक में गुरुवार को प्रशासन की टीम ने अचानक निरीक्षण किया। इस दौरान टीम ने उनके बैरक में जो चीज पायी उसके चलते उनका बैरक बदलने का निर्देश दिया गया है। इस टीम में जिला जज, प्रभारी डीएम प्रियंकानिरंजन व एसपी आशीष तिवारी शामिल रहे। निरीक्षण काफी गोपनीय रहा, जिसके चलते जेल प्रशासन को इसकी खबर भी नहीं लग पायी।
निरीक्षण के दौरान जब एसपी आशीष तिवारी ने जेल के तन्हाई बैरक में बंद त्रिभुवन सिंह के बैरक में टीवी लगी देखी तो उन्होंने इसे नियम विरुद्ध बताया और जेलर से पूछा कि कैसे तनहाई वाले बैरक में टीवी लगा है। उन्होंने जेलर से इस पर आपत्ति और तत्काल त्रिभुवन सिंह के बैरक बदलने का निर्देश जेल अधीक्षक को दिया। हालांकि बैरक में टीवी लगे होने पर जेल अधीक्षक ने सफाई देते हुए कहा कि जेल में टीवी लगाया गया है। पर एसपी ने कहा कि टीवी बैरक के अंदर नहीं होना चाहिये, क्योंकि कैदी को तनहाई में रखने के लिए बोला गया है।
जेल में निरीक्षण के दौरान अधिकारियों को वहां लगा वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग का कैमरा भी खराब मिला। इसके अलावा मिलने आ रहे मुलाकातियों के मोबाइल नंबर मौजूद नहीं होने पर अधिकारियों ने तत्काल इसे दुरुस्त करने का निर्देश जेल अधीक्षक को दिया। पत्रिका से बात करते हुए पुलिस अधीक्षक आशीष तिवारी ने बताया कि त्रिभुवन सिंह के बैनर में टीवी लगा होना गलत है। उन्हें तन्हाई में यहां रखा गया है। निरीक्षण के बाद त्रिभुवन सिंह का बैरक बदलने के लिये कह दिया गया है।
जेल निरीक्षण के दौरान तीन थानों की फोर्स के साथ भारी संख्या में पुलिस बल मौजूद था। इस दौरान सभी बैरकों की तलाशी ली गई। हालांकि तलाशी के दौरान जेल में कोई भी संदिग्ध चीज नहीं मिली। घंटो चले इस निरीक्षण के दौरान जेल परिसर में अफरातफरी मची रही। बता दें कि गाजीपुर निवासी माफिया त्रिभुवन सिंह को अक्टूबर 2016 में पीलीभीत जेल से मिर्जापुर जेल में शिफ्ट किया गया था। उसके बाद से ही वह यहां बंद है। इस दौरान उन पर चल रहे मामलों से यहीं से वाराणसी सहित कई दूसरी अदालतों में पेश किया जाता रहा है।
by Suresh Singh
Published on:
11 Jan 2018 11:49 pm
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