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नहीं रहे पूर्व सांसद भाईलाल कोल, जानिये प्रधानी से लेकर सांसद तक उनका सियासी सफर

लम्बी बीमारी से जूझने के बाद पूर्व सांसद भाईलाल कोल (Bhai Lal Kol) का इलाहाबाद में उनका निधन हो गया। उन्होंने लालगंज तहसील के पचोखर गांव से प्रधान का चुनाव जीतकर अपना सियासी सफर शुरू किया था और वो दो बार विधायक व एक बार सांसद भी बने।

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Bhai Lal Kol

भाई लाल कोल

मिर्जापुर. दो बार छानबे विधानसभा से विधायक और सोनभद्र की राबर्ट्सगंज लोकसभा से एक बार सांसद रहे पूर्व सांसद भाईलाल कोल (Bhai Lal Kol) अब हमारे बीच नहीं रहे। उन्होंने रविवार को प्रयागराज में अंतिम सांस ली। वो किडनी की बीमारी से जूझ रहे थे। इलाज कराने के लिये इलाहाबाद ले जाते समय रास्ते में ही उनकी मौत हो गई। भाई लाल कोल ने अपने सियासी सफर की शुरुआत प्रधान के चुनाव से की, लेकिन उनका लक्ष्य बड़ा था और महत्वकांक्षा भी। उन्होंने प्रधान बने तो उन्होंने क्षेत्र की जनता की समस्या दो बार विधानसभा में उठाई और एक बार उन्हें सोनभद्र की जनता का लोकसभा में प्रतिनिधित्व करने का मौका मिला। भाईलाल कोल भाजपा बसपा और समाजवादी पार्टी तीनों दलों में रहे और इन पार्टियों में रहते हुए एक-एक चुनाव भी जीते।

समाजवादी पार्टी के नेता व पूर्व सांसद भाईलाल कोल का निधन

पूर्व सांसद भाईलाल कोल मिर्जापुर जिले की लालगंज तहसील के पचोखर गांव के रहने वाले थे। उन्होंने अपना सियासी सफर गांव प्रधान की राजनीति से शुरू किया और दो बार विधायक व एक बार सांसद बने। 2017 का विधानसभा और 2019 का लोकसभा चुनाव भी वह लड़े लेकिन उन्हें सफलता नहीं मिली। भाई लाल कोल ने 1995 में अपने गांव से प्रधान का चुनाव जीता तो फिर मुड़कर पीछे नहीं देखा। वह राजनीति में सफलता के पायदान चढ़ते चले गए। 1996 में वो भारतीय जनता पार्टी के टिकट पर छानबे सीट से विधानसभा का चुनाव लड़े और जीत हासिल की।

2001 के विधानसभा चुनाव में टिकट कट जाने के चलते उन्होंने बहुजन समाज पार्टी का दामन थाम लिया। 2004 में सोनभद्र जिले की राबर्ट्सगंज सीट से लोकसभा का चुनाव लड़े और सांसद बन गए। पर 2009 में बसपा ने भी टिकट काट दिया तब इन्होंने समाजवादी पार्टी का रुख किया और 2012 में छानबे विधानसभा से एक बार फिर विधायक चुने गए। 2017 में भी सपा के टिकट पर चुनाव लड़े लेकिन भाजपा अपना दल एस गठबंधन के उम्मीदवार राहुल प्रकाश कोल के हाथों हार का सामना करना पड़ा। बावजूद इसके सपा-बसपा गठबंधन में जब राबर्ट्सगंज सीट सपा के पाले में आई तो समाजवादी पार्टी ने भाजपा अपना दल एस गठबंधन के पकौड़ी लाल कोल के सामने भाईलाल कोल को मैदान में उतारा, हालांकि इस बार भी उन्हें जीत हासिल नहीं हो सकी।