केन्द्रीय मंत्री ने पर्वतारोही लड़की का पत्र मुख्यमंत्री को भेजने का दिया है आश्वासन।
मिर्ज़ापुर. प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री से मदद की गुहार लगा चुकी पर्वतारोही काजल पटेल मदद की आस में केन्द्रीय मंत्री अनुप्रिया पटेल के कार्यालय पहुंची। उसने वहां मुलाकात कर 25 लाख रुपये की मदद मांगी तो मंत्री जी ने साफ कह दिया कि 25 लाख रुपये कहां से आएंगे। मदद के नाम पर उन्होंने सिर्फ इतना कहा कि मैं ये चिट्ठी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को भेज दूंगी।
जिले जमालपुर विकास खंड के हिनौती माफी गांव कि रहने वाली पर्वतारोही काजल पटेल विश्व की सबसे ऊंची चोटी माउण्ट एवरेस्ट पर तिरंगा लहराने का सपना पूरा करना चाहती है। पर उसके इस सपने को पूरा करने के लिये रजिस्ट्रेशन फीस जमा करने के वासते 25 लाख रुपए की जरूरत है। सामान्य वर्ग के किसान की बेटी होने के बावजूद एनसीसी व निमास की बेस्ट कैडेट अवार्ड विजेता काजल पटेल के परिजनों के पास इतना पैसा नहीं कि वह बेटी को बाहर भेज सकें।
मदद के लिए काजल ने सबसे पहले देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से अपील की। वहां से कुछ बात न बनने पर मदद के लिये रविवार को भरुहना स्थित केंद्रीय मंत्री अनुप्रिया पटेल के कार्यलय पहुंची और मदद मांगी। परिजनों के साथ पहुंची काजल ने केंद्रीय मंत्री अनुप्रिया पटेल को पत्र भी सौपा।
इस दौरान केंद्रीय मंत्री ने कहा कि वह इस पत्र को प्रदेश के सीएम के पास भेज देंगी। उन्हें भी नही पता कि 25 लाख रुपये कहां से आएंगे। वहीं केंद्रीय मंत्री से मिलने के बाद काजल पटेल ने बताया कि उनका माउंट एवरेस्ट पर चढ़ने का पूरा सपना इसी पैसे पर टिका है। अगर उन्हें पैसे नहीं मिलते तो वह आगे के कैम्प में भाग नही ले पायेंगी। बता दें कि काजल पटेल का बीएचयू वाराणसी में पढ़ाई के दौरान चयन लद्दाख अभियान के लिए 2017 में किया गया था।
वह देश भर से चुने गए 20 पर्वतारोहियों में प्रदेश कि इकलौती पर्वतारोही थी जिसका चयन इस अभियान के लिए हुआ था। इसके बाद केंद्रीय मंत्री अनुप्रिया पटेल कि मदद से खेल मंत्रालय ने काजल पटेल को अरूणाचल प्रदेश में स्थित भारतीय पर्वतारोहण फाउण्डेशन द्वारा संचालित माउण्ट एवरेस्ट चढ़ाई करने वाले एक विशेष ट्रेनिंग कोर्स में प्रवेश देकर प्रशिक्षित कराया। वहां उसे बेस्ट कैडेट का अवार्ड भी मिला चुका है। उसका अगला लक्ष्य माउंट एवरेस्ट पर तिरंगा फहराया कर देश और प्रदेश का नाम रोशन करना। पर अब उसके रास्ते में गरीबी रोड़ा बन गयी है। अब देखने वाली बात होगी कि उसकी गुहार पर कब देश के प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री मदद करते हैं।
By Suresh Singh